देश की खबरें | श्वान विशेषज्ञों ने वीआईपी कार्यक्रमों के लिए पुलिस दस्ते के श्वानों के इस्तेमाल पर रोक की मांग की

नयी दिल्ली, नौ जून अति विशिष्ट लोगों (वीआईपी) के स्वागत के लिए गुलदस्ता भेंट करने जैसी रस्म के लिए प्रशिक्षित श्वान के इस्तेमाल की परंपरा समाप्त की जानी चाहिए और इनका इस्तेमाल केवल अपराधियों को पकड़ने तथा प्रतिबंधित वस्तुओं एवं आईईडी का पता लगाने जैसे विशिष्ट कार्यों के लिए किया जाना चाहिए। एक समिति ने यह सिफारिश की है जिसमें श्वान विशेषज्ञ भी शामिल थे।

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि इसके बजाय पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के रेजिमेंटल कार्यों के दौरान दर्शकों के मनोरंजन के कार्यक्रम में प्रदर्शन के लिए एक अलग ‘‘प्रदर्शनी श्वान इकाई’’ तैयार की जा सकती है।

सेना के अलावा विभिन्न राज्य और केंद्रीय पुलिस बलों के विशेषज्ञों की समिति ने पिछले दो राष्ट्रीय पुलिस के9 सेमिनार के दौरान इसकी सिफारिश की थी। आखिरी बार इस साल फरवरी में इस कार्यक्रम का आयोजन हुआ था। पुलिस डॉग यूनिट को ‘के9’ कहा जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशिक्षित श्वान सुरक्षा, खुफिया और सीमा शुल्क से संबंधित कार्यों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण संसाधन हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रशिक्षित श्वानों को स्टूल पर बैठाकर रखना, गुलदस्ता पेश करने और ‘जोकर डॉग’, ‘प्लास्टिक कचरा एकत्र करने वाला श्वान’ और ‘सर्कस डॉग शो’ बनाने से बचा जाना चाहिए या बंद कर दिया जाना चाहिए।

‘के9’ के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘पिछले एक दशक में पुलिस और सीएपीएफ ने बड़ी संख्या में श्वान दस्ते बनाए हैं। ‘शो डॉग’ के रूप में इनका इस्तेमाल करने का चलन धीरे-धीरे बढ़ा है। पहले कुछ पुलिस संगठनों ने ऐसा किया और अन्य ने इसका पालन किया।’’

‘ऑपरेशनल डॉग्स’ वे होते हैं जिन्हें इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेज (आईईडी) , नशीले पदार्थों का पता लगाने, संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान करने, किसी आपदा में जीवित व्यक्ति का पता लगाने या पुलिस शिविर तथा संवेदनशील प्रतिष्ठान के लिए रक्षक ड्यूटी को लेकर प्रशिक्षित किया जाता है।

राज्य पुलिस बलों के अलावा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), सीमा सुरक्षा बल (एसएसबी) और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) जैसे कई सीएपीएफ अतिथि या वीआईपी को गुलदस्ता भेंट करने या औपचारिक बैनर के साथ स्वागत करने के लिए अपने इन प्रशिक्षित श्वानों का इस्तेमाल करते हैं।

‘के9’ कमांडर ने कहा कि केरल पुलिस ने इस संबंध में शुरुआत की है। भारतीय पुलिस संगठनों के पास अपने प्रतिष्ठान में मृतकों का पता लगाने वाले श्वान नहीं हैं क्योंकि उनका ध्यान अब तक आपदा के दौरान जीवित पीड़ितों का पता लगाने पर रहा है।

उन्होंने कहा कि हालांकि, यह महसूस किया गया कि फंसे हुए और जीवित लोगों को बचाने के बाद इन श्वानों का इस्तेमाल मृतकों का पता लगाने में किया जाएगा।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)