नयी दिल्ली, चार फरवरी मंगलवार को राज्यसभा को सूचित किया गया कि मार्च 2024 तक 2,664 विशिष्ट उधारकर्ताओं को जानबूझकर चूक करने वाले (विलफुल डिफॉल्टर्स) के रूप में वर्गीकृत किया गया था, जिसमें व्यक्तिगत और विदेशी उधारकर्ता शामिल नहीं हैं।
हालांकि, ऐसे चूककर्ताओं की संख्या में वृद्धि, वित्तवर्ष 2021-22 के 160 से घटकर वित्तवर्ष 2023-24 में 42 रह गई है। वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, मार्च 2024 तक 2,664 विशिष्ट उधारकर्ताओं को ‘विलफुल डिफॉल्टर्स’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जिसमें व्यक्तिगत और विदेशी उधारकर्ता शामिल नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार और रिजर्व बैंक ने जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों को रोकने और जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों से संबंधित एनपीए को कम करने और वसूलने के लिए व्यापक उपाय किए हैं, जिससे बैंकों की वित्तीय स्थिरता और वित्तीय सेहत में सुधार हुआ है।
जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों को बैंकों या वित्तीय संस्थानों द्वारा कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं दी जाती है और उनकी इकाई को पांच साल के लिए नए उद्यम शुरू करने से रोक दिया जाता है।
मंत्री ने कहा कि इसके अलावा, जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों और जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों को प्रवर्तक/निदेशक बनाने वाली कंपनियों को पूंजी बाजार में धन जुटाने से रोक दिया गया है।
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