देश की खबरें | उपचुनाव : बिहार में दोनों सीटों पर नीतीश कुमार की जद (यू) का कब्जा बरकरार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जद (यू) ने मंगलवार को राहत की सांस ली, जब उसने दोनों विधानसभा सीटों- कुशेश्वर स्थान और तारापुर पर अपना कब्जा बरकरार रखा। दोनों सीटों पर 30 अक्टूबर को उपचुनाव कराए गए थे।

पटना, दो नवंबर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जद (यू) ने मंगलवार को राहत की सांस ली, जब उसने दोनों विधानसभा सीटों- कुशेश्वर स्थान और तारापुर पर अपना कब्जा बरकरार रखा। दोनों सीटों पर 30 अक्टूबर को उपचुनाव कराए गए थे।

तारापुर में जद (यू) उम्मीदवार राजीव कुमार सिंह ने राजद के अरुण कुमार साह को करीब 3,800 मतों से हराया। सिंह को 78,966 वोट मिले जबकि साह को 75,145 मतों से ही संतोष करना पड़ा।

तारापुर में जद (यू) विधायक मेवालाल चौधरी की मृत्यु के कारण उपचुनाव की आवश्यकता पड़ी।

इससे पहले सत्तारूढ़ जद (यू) ने कुशेश्वर स्थान (सुरक्षित) सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा और उसने लालू प्रसाद की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार को 12,000 से अधिक मतों के अंतर से पराजित किया।

जनता दल (यू) के अमन भूषण हजारी को 58,882 मत मिले, जबकि राजद उम्मीदवार गणेश भारती को 47,184 वोट मिले। अमन भूषण हजारी के पिता की मृत्यु के कारण उपचुनाव कराना पड़ा।

मुख्यमंत्री कुमार ने अपनी पार्टी के प्रदर्शन पर प्रसन्नता जताते हुए विजयी उम्मीदवारों को बधाई दी और कहा, “लोकतंत्र में लोग सर्वोपरि होते हैं। उन्होंने अपना फैसला दे दिया है।"

दोनों परिणाम राजद के लिए निराशाजनक रहे हैं जो सबसे अधिक संख्या में विधायक होने के बावजूद विपक्ष में है और उसे दोनों सीटों पर जीत की उम्मीद थी।

लालू प्रसाद के असंतुष्ट बड़े पुत्र तेजप्रताप यादव ने हार के लिए प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के अलावा विधान पार्षद सुनील सिंह और अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव के प्रमुख सहयोगी संजय यादव को जिम्मेदार ठहराया, जिनके साथ उनका टकराव होता रहता है। तेजप्रताप ने संजय यादव को पार्टी से निकालने की भी मांग की थी।

कांग्रेस जेएनयू के पूर्व छात्र नेता कन्हैया कुमार को शामिल किए जाने के बाद ऊंची जाति के युवाओं से कुछ समर्थन मिलने की उम्मीद कर रही थी। लेकिन दोनों सीटों पर वह प्रभाव डालने में विफल रही। चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) भी तारापुर में अपनी छाप छोड़ने में विफल रही। यह क्षेत्र उनकी अपनी जमुई लोकसभा सीट के तहत आता है।

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