देश की खबरें | बिहार विधानमंडल का बजट सत्र शुरू, राज्यपाल ने नीतीश के शासन की सराहना की

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पटना, 28 फरवरी बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने शुक्रवार को कहा कि 24 नवंबर 2005 को नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद से राज्य में ‘‘कानून का शासन’’ कायम है और ‘‘निरंतर विकास’’ हो रहा है।

बजट सत्र के पहले दिन, विधानमंडल के संयुक्त सत्र में राज्यपाल ने 30 मिनट के अपने पारंपरिक अभिभाषण में इस तिथि का दो बार प्रमुखता से उल्लेख किया।

खान ने यह बात भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के विधायकों की नारेबाजी के बीच कही, जो अमेरिका से वापस भेजे गए अवैध प्रवासी भारतीयों के साथ किये गए दुर्व्यवहार के विरोध में हथकड़ी और जंजीर पहनकर विधानसभा परिसर पहुंचे थे।

राज्यपाल को हंगामा कर रहे सदस्यों को फटकार लगाते देखा गया। साथ ही खान ने कहा, ‘‘आपका विरोध दर्ज हो चुका है। अब आप कृपया मुझे मेरी संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने दें।"

राज्यपाल ने 24 नवंबर 2005 का जिक्र नीतीश सरकार के समग्र प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए अभिभाषण की शुरूआत में किया। उन्होंने यह तिथि उस समय दोहराई, जब वह पुलिस बल में बड़े पैमाने पर भर्तियों, विशेष रूप से महिलाओं की भागीदारी बढ़ने को रेखांकित कर रहे थे।

जनता दल(यूनाइटेड) के अध्यक्ष और बिहार में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे कुमार साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव में जीत हासिल कर लगातार पांचवीं बार इस पद पर काबिज होने की उम्मीद कर रहे हैं।

राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में पांच वर्षीय ‘‘रोड मैप’’ के माध्यम से प्रदेश के कृषि क्षेत्र में हुए सुधार और नये मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के साथ स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में किये गए व्यापक सुधारों को भी रेखांकित किया।

उन्होंने सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया।

विधानमंडल के केंद्रीय कक्ष में राज्यपाल के अभिभाषण के बाद, विधानसभा और विधानपरिषद सदस्य अपने-अपने सदन में चले गए। दोनों सदनों में, दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि देने के बाद कार्यवाही स्थगित कर दी गई।

विधानसभा में, विपक्षी विधायकों द्वारा ‘‘लोकतंत्र की हत्या’’ के नारे लगाये जाने के बीच, उपमुख्यमंत्री एवं वित्त विभाग का भी प्रभार संभाल रहे सम्राट चौधरी ने राज्य का आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया।

विपक्षी सदस्य इस बात से नाराज दिखे कि पिछले साल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(राजग) में शामिल हुए दल-बदलुओं को सत्ता पक्ष के करीब बैठने की अनुमति दी गई।

इन दल-बदलू सदस्यों में से चार राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से और दो कांग्रेस से हैं। उन्हें अयोग्य ठहराए जाने के लिए दोनों दलों की ओर से याचिकाएं विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव के पास लंबित हैं।

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