विदेश की खबरें | ब्रिटेन की राजकुमारी ऐन प्रथम विश्व युद्ध की वर्षगांठ पर तुर्किये में आयोजित समारोह में शामिल हुईं
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

यह सभा एक समुद्र तट के निकट हुई, जहां ऑस्ट्रेलियाई और न्यूजीलैंड सेना कोर या ‘एंजैक’ के कर्मी 25 अप्रैल, 1915 को भोर में पहली बार गैलीपोली में उतरे थे।

न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री लक्सन ने युद्ध की मानवीय कीमत और भविष्य में संघर्ष को रोकने के महत्व पर बात की।

लक्सन ने कहा, ‘‘एंजैक सैनिक आधी दुनिया पार करके अपने भाइयों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर यहां तट पर आए थे। कुछ घर से दूर रोमांच की उम्मीद में आए थे लेकिन उन्हें रोमांच नहीं बल्कि खौफ का सामना करना पड़ा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम इस अभियान का असली सबक भूल जाते हैं, तो यह उन लोगों के प्रति अन्याय होगा जिनकी वीरता को हम याद करते हैं। हमें यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कोशिश करनी चाहिए कि ऐसा कुछ फिर से न हो।’’

यह अभियान ओटोमन साम्राज्य को परास्त करने के ब्रिटिश नेतृत्व वाले प्रयास का हिस्सा था, जो अंततः विफल हो गया था। इसके परिणामस्वरूप आठ महीने के संघर्ष के दौरान दोनों पक्षों के हजारों लोग मारे गए।

महाराजा चार्ल्स तृतीय की बहन तथा राष्ट्रमंडल कब्र आयोग की अध्यक्ष ऐन ने कुछ सैनिकों द्वारा अपने परिजन को लिखे गए पत्रों को पढ़ा तथा संघर्ष में शामिल दोनों पक्षों के सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।

एपी सिम्मी देवेंद्र

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