जरुरी जानकारी | बजट बाद बांड प्राप्ति 0.31 प्रतिशत बढ़ी, पहली छमाही में 16 साल के निचले स्तर पर थी : रिपोर्ट

मुंबई, 22 फरवरी वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान बाजार कर्ज लक्ष्य को बढ़ाकर 23 लाख करोड़ रुपये किये जाने के बाद बांड प्रतिफल 0.31 प्रतिशत बढ़कर छह प्रतिशत से ऊपर पहुंच गया। एक रिपोर्ट में यह जानकारी देते हुए कहा गया है कि रिजर्व बैंक को शॉर्ट-सेलर्स पर अंकुश के जरिये इसे नियंत्रण में लाना चाहिए।

एसबीआई रिसर्च की सोमवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि रिजर्व बैंक ने केंद्र के ऋण प्रबंधन में तत्परता से सहयोग दिया है। इससे 2020-21 की पहली छमाही में केंद्र के लिए कर्ज की लागत पिछले 16 साल के निचले स्तर पर आ गई है, क्योंकि बांड प्राप्ति 5.75 प्रतिशत रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इसकी मुख्य वजह शॉर्ट-सेलर हैं जो बड़े कर्ज की योजना को लेकर चिंतित हैं। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि चालू वित्त वर्ष में सरकार का सकल कर्ज 12.8 लाख करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान की तुलना में 13.9 लाख करोड़ रुपये रहेगा। वहीं शुद्ध कर्ज 10.5 लाख करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान की तुलना में 11.6 लाख करोड़ रुपये रहेगा।

रिपोर्ट के अनुसार, इस साल केंद्र और राज्यों का सकल कर्ज 22.1 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इसका संशोधित अनुमान 21.5 लाख करोड़ रुपये था।

इसी तरह केंद्र और राज्यों का शुद्ध कर्ज 17.8 लाख करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान की तुलना में 18.4 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र का सकल ऋण अगले वित्त वर्ष में घटकर 12.1 लाख करोड़ रुपये और शुद्ध कर्ज 9.2 लाख करोड़ रुपये रह सकता है। हालांकि, सामूहिक रूप से सकल कर्ज 23 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचने का अनुमान है। वहीं सामूहिक रूप से शुद्ध ऋण घटकर 18.1 लाख करोड़ रुपये पर आने का अनुमान है।

अजय

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