नयी दिल्ली, एक अगस्त उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को बंबई उच्च न्यायालय से कहा कि वह 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित की याचिका पर तेजी से फैसला करे।
पुरोहित ने उच्च न्यायालय का रुख किया था और कहा था कि संबंधित मामले में उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सरकार द्वारा दी गई मंजूरी कानूनन गलत है।
न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति विक्रमनाथ की पीठ ने उल्लेख किया कि अब तक 246 गवाहों से पूछताछ की जा चुकी है।
पीठ ने कहा, “याचिकाकर्ता द्वारा दायर याचिका उच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है जहां उन्होंने मंजूरी (मुकदमा चलाने) को रद्द करने का आग्रह किया है। मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, हम उच्च न्यायालय से याचिका पर विचार करने और कानून के अनुसार इस पर शीघ्र निर्णय लेने का अनुरोध करना उचित समझते हैं।’’
उच्च न्यायालय ने 18 दिसंबर 2017 को पुरोहित के खिलाफ मुकदमा चलाने संबंधी सरकारी मंजूरी को रद्द करने से इनकार कर दिया था।
इससे पहले, एक विशेष राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) अदालत ने मामले में आरोपमुक्त करने की उनकी याचिका को खारिज कर दिया था।
पुरोहित के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पूर्व अनुमति की आवश्यकता थी क्योंकि उस समय वह एक सेवारत सेना अधिकारी थे।
मुंबई से लगभग 200 किलोमीटर दूर उत्तरी महाराष्ट्र के मालेगांव में 29 सितंबर, 2008 को एक मस्जिद के पास हुए विस्फोट में छह लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे।
मामले में आरोपी सभी सात लोग फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।
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