देश की खबरें | ‘नबन्ना मार्च' के दौरान भाजपा कार्यकर्ता कोलकाता-हावड़ा में सड़क पर उतरे, पुलिस के साथ हुई झड़प

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भाजपा के हजारों कार्यकर्ता राज्य सचिवालय मार्च करने के लिये कोविड-19 से जुड़े दिशानिर्देशों की अवज्ञा करते हुए बृहस्पतिवार को कोलकाता और हावड़ा में सड़कों पर उतरे। इसके चलते पुलिस को उन पर कार्रवाई करनी पड़ी, जिसमें दर्जनों लोग घायल हो गये। प्रत्यक्षदर्शियों और अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

कोलकाता/हावड़ा, आठ अक्टूबर भाजपा के हजारों कार्यकर्ता राज्य सचिवालय मार्च करने के लिये कोविड-19 से जुड़े दिशानिर्देशों की अवज्ञा करते हुए बृहस्पतिवार को कोलकाता और हावड़ा में सड़कों पर उतरे। इसके चलते पुलिस को उन पर कार्रवाई करनी पड़ी, जिसमें दर्जनों लोग घायल हो गये। प्रत्यक्षदर्शियों और अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

भाजपा कार्यकर्ताओं ने राज्य में कानून व्यवस्था की कथित तौर पर खराब होती स्थिति को लेकर ‘नबन्ना’ की ओर मार्च किया। इस दौरान दोनों शहरों के कई हिस्से प्रभावित हुए। प्रदर्शनकारियों को तितर बितर करने के लिये पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े, उन पर पानी की बौछार करनी पड़ी और यहां तक कि लाठी का भी इस्तेमाल करना पड़ा।

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कार्रवाई में भाजपा के कई नेता एवं कार्यकर्ता तथा पुलिसकर्मी भी घायल हो गये ।

अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम (एनडीएमए) का उल्लंघन करने को लेकर भाजपा के 100 से अधिक समर्थकों को हिरासत में लिया गया। यह अधिनियम कोविड-19 महामारी के कारण 100 से अधिक लोगों के एकत्र होने और राजनीतिक रैली करने पर रोक लगाता है।

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अगले साल अप्रैल-मई में पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या सहित कई राजनीतिक हत्या की घटना देखने को मिली हैं।

भाजपा के बैरकपुर सांसद अर्जुन सिंह के करीबी सहयोगी मनीष शुक्ला को शनिवार को गोली मारे जाने की घटना प्रदर्शन का तात्कालिक वजह थी।

अधिकारियों ने बताया कि भाजपा की युवा शाखा भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) ने बृहस्पतिवार को राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ की ओर मार्च का आह्वान किया था। वहीं, पार्टी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, राष्ट्रीय सचिव अरविंद मेनन और प्रदेश प्रमुख दिलीप घोष सहित पार्टी के शीर्ष नेताओं ने प्रदर्शनों का नेतृत्व किया।

भाजयुमो प्रमुख और बेंगलुरू दक्षिण से सांसद तेजस्वी सूर्या भी प्रदर्शन के दौरान मौजूद थे।

हजारों की संख्या में पुरूषों और महिलाओं के राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ की ओर मार्च करने के दौरान पुलिस और दंगा रोधी रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) से उनकी झड़प हुई।

प्रदर्शन के दौरान पथराव हुआ, सड़कों को जाम किया गया और टायरों में आग भी लगाई गई।

इस दौरान प्रदर्शनकारियों द्वारा अवरोधक लांघने की कोशिश करने पर पुलिस के साथ उनकी कई स्थानों पर झड़प हुई।

भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने सिलसिलेवार ट्वीट कर कहा, ‘‘ममता दीदी द्वारा राज्य की शक्ति के दुरुपयोग के बावजूद हम बंगाल की जनता के साथ खड़े हैं। हमारे भाजयुमो के बहादुर कार्यकर्ताओं ने उन्हें सचिवालय को बंद करने पर बाध्य कर दिया। यह इस बात की स्वीकारोक्ति है कि उन्होंने जनता का विश्वास खो दिया है।’’

पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने पार्टी कार्यकर्ताओं पर पुलिस की कार्रवाई को लोकतांत्रिक विरोध दर्ज करने के अधिकार के खिलाफ राज्य की तृणमूल कांग्रेस की सरकार का ‘‘तानाशाही’’ रूप करार दिया ।

प्रसाद ने दावा किया कि पुलिस की कार्रवाई में भाजपा के 1500 से ज्यादा कार्यकर्ता घायल हुए हैं। इन कार्यकर्ताओं में पार्टी के राष्ट्रीय सचिव अरविंद मेनन और प्रदेश के उपाध्यक्ष राजू बनर्जी सहित कई अन्य नेता शामिल हैं।

उन्होंने आशंका जताई की कि पुलिस की ओर से की गई पानी की बौछार के दौरान, इस्तेमाल किए गए पानी में रसायन मिला हुआ था।

वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार ने पुलिस कार्रवाई का बचाव किया। राज्य के मुख्य सचिव ने जोर देते हुए कहा कि बगैर अनुमति के मार्च निकाला गया।

मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय ने कहा , ‘‘यह महामारी अधिनियम का उल्लंघन करते हुए भी किया गया। ’’

उन्होंने इस दावे को खारिज कर दिया कि भाजपा के कुछ नेताओं और प्रदर्शनकारियों पर रसायन घुले हुए पानी की बौछार की गई। उन्होंने कहा कि होली के दौरान इस्तेमाल किये जाने वाले रंगों का उपयोग किया, ताकि संकट पैदा करने वालों की बाद में पहचान की जा सके।

उन्होंने कहा, ‘‘यह एक अंतरराष्ट्रीय परंपरा है। इस तरह के प्रदर्शनों के दौरान रंग घुले हुए पानी की बौछार का इस्तेमाल किया जाता है ताकि प्रदर्शनकारियों के तितर बितर होने के बाद उनकी पहचान की जा सके। ’’

प्रदर्शनकारियों द्वारा टायर जलाने से आसमान में धुएं का गुबार छा गया और यातायात भी बाधित हुआ। सड़कों पर पत्थर भी बिखरे दिखे। इस दौरान लोगों ने अपनी दुकानें और अन्य संस्थान भी तुरंत बंद कर दिए।

दोनों शहरों में सड़कों पर तीन घंटे से अधिक समय तक पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच चूहे-बिल्ली का खेल जारी रहा।

भाजपा के एक कार्यकर्ता को भरी हुई पिस्तौल के साथ गिरफ्तार किया गया। भाजपा ने दावा किया है कि वह पार्टी के एक नेता का निजी सुरक्षा अधिकारी है और वह लाइसेंसी पिस्तौल लिये हुए था।

सूर्या ने प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर रसायन घुले हुए पानी की बौछार किये जाने की केंद्रीय गृह मंत्रालय से जांच कराये जाने की मांग की।

भजापा के वरिष्ठ नेता राजू बनर्जी, सांसद ज्योर्तिमय सिंह महतो और राष्ट्रीय सचिव अरविंद मेनन सहित अन्य नेता घायल होने वालों में शामिल हैं। बनर्जी को अस्पताल ले जाया गया।

विजयवर्गीय ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘पुलिस और तृणमूल कांग्रेस के गुंडों ने हम पर हमला किया।’’

प्रदेश भाजपा सूत्रों के मुताबिक भाजयुमो का नबन्ना मार्च उसकी सात सूत्री मांग का हिस्सा है जिसमें कथित भ्रष्टाचार से लेकर बेरोजगारी और कानून व्यवस्था तक के मुद्दे शामिल हैं।

घोष ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के गुंडों ने पुलिस के वेष में भाजपा कार्यकर्ताओं पर बम फेंका।

वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर अराजकता फैलाने और साम्प्रदायिक दंगे भड़काने का आरोप लगाया।

प्रदेश के मंत्री फिरहाद हकीम ने कहा, ‘‘भाजपा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यह उपद्रवी पार्टी है। क्या आप मुझे बता सकते हैं कि कहां राजनीतिक रैली के कार्यकर्ता बंदूक लिये पाये जाते हैं। वे राज्य में साम्प्रदायिक दंगे भड़काना चाहते हैं।’’

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