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बलात्कार के मामले में भाजपा विधायक रामदुलार गोंड को 25 साल की कैद,गंवानी पड़ेगी सदस्यता

सोनभद्र की एक एमपी-एमएलए अदालत ने शुक्रवार को दुद्धी विधानसभा क्षेत्र (अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट) से भाजपा विधायक रामदुलार गोंड को एक नाबालिग लड़की से नौ साल पहले बलात्कार करने के मामले में 25 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई.

बलात्कार के मामले में भाजपा विधायक रामदुलार गोंड को 25 साल की कैद,गंवानी पड़ेगी सदस्यता
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सोनभद्र (उप्र), 15 दिसंबर: सोनभद्र की एक एमपी-एमएलए अदालत ने शुक्रवार को दुद्धी विधानसभा क्षेत्र (अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट) से भाजपा विधायक रामदुलार गोंड को एक नाबालिग लड़की से नौ साल पहले बलात्कार करने के मामले में 25 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई. इसके साथ ही उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराया जाना तय है। दरअसल जनप्रतिनिधित्व कानून के अनुसार, कोई भी जनप्रतिनिधि को दो या उससे अधिक साल की कैद होने पर ‘दोषसिद्धि’ की तारीख से सदन की सदस्यता के लिए अयोग्य माना जाएगा.

इतना ही नहीं, सजा पूरी होने के बाद अगले छह साल के लिए वह सदन की सदस्यता के लिए पात्र नहीं होगा. एमपी/ एमएलए अदालत के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ए डी जे) एहसान उल्लाह खान ने अभियुक्त पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जो पीड़िता के पुनर्वास के लिए इस्तेमाल किया जाएगा . विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) सत्य प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि अदालत ने 12 दिसंबर को विधायक को दोषी करार दिया था और सजा सुनाने के लिए 15 दिसंबर (आज) की तारीख तय की थी .

फैसला सुनाए जाने से पहले गोंड के वकील ने कम से कम सजा देने का आग्रह किया और अदालत को यह भी आश्वासन दिया कि बलात्कार पीड़िता के परिवार की पूरी देखभाल आरोपी द्वारा की जाएगी. गोंड उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के दुद्धी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक हैं. त्रिपाठी ने बताया कि यह घटना चार नवंबर 2014 की है जिसमें भारतीय दंड संहिता की धाराओं 376 (दुष्कर्म), 506 (आपराधिक धमकी के लिए सजा) और बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम (पोक्सो) के प्रावधानों के तहत विधायक पर मुकदमा दर्ज हुआ था। घटना के समय विधायक की पत्नी ग्राम प्रधान थीं.

पीड़ित लड़की के भाई की तहरीर पर म्योरपुर थाना की पुलिस ने रामदुलार गोंड मामला दर्ज किया था. गोंड उस समय विधायक नहीं थे और मामले की सुनवाई पोक्सो अदालत में चल रही थी. गोंड के विधायक निर्वाचित होने के बाद मामले की सुनवाई सांसद/विधायक (एमपी/ एमएलए) अदालत में स्थानांतरित कर दी गई. खचाखच भरी हुई अदालत में जब विधायक गोंड को सजा सुनाई गई तो उनकी गर्दन झुकी हुई थी और वह उदास थे. दूसरी तरफ पीड़िता के भाई ने अदालत के निर्णय पर संतोष जताते हुए कहा कि लंबे संघर्ष और उतार-चढ़ाव के बाद अंततः उन्हें न्याय मिला.

उत्तर प्रदेश में इसके पहले भी कई जनप्रतिनिधियों को अदालत से सजा सुनाये जाने के बाद अपनी सदस्यता गंवानी पड़ी. नफरत भरे भाषण मामले में अदालत द्वारा सजा सुनाये जाने के बाद अक्टूबर 2022 में रामपुर के समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक आजम खान और फरवरी 2023 में सरकारी काम में रुकावट पैदा करने एवं धरना-प्रदर्शन मामले में सजा सुनाये जाने के बाद स्वार के उनके विधायक पुत्र अब्दुल्ला आजम को विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित किया गया था.

इसके अलावा 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के एक मामले में दो साल की कैद की सजा सुनाये जाने के बाद मुजफ्फरनगर के खतौली के भाजपा विधायक विक्रम सिंह सैनी को अक्टूबर 2022 से उत्तर प्रदेश विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया था. इसके पहले बलात्कार के एक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्नाव के बांगरमऊ निर्वाचन क्षेत्र के भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को 2020 में उत्तर प्रदेश विधानसभा से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। सेंगर को पहले ही भाजपा ने निष्कासित कर दिया था.

इस साल मई की शुरुआत में उत्तर प्रदेश की एक अदालत द्वारा अपहरण और हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने और चार साल कैद की सजा सुनाये जाने के बाद गाजीपुर के बसपा सांसद अफजाल अंसारी को लोकसभा सदस्य के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया गया था. वर्ष 2009 में फैजाबाद (अयोध्या) के समाजवादी पार्टी के सांसद मित्रसेन यादव को एक अदालत ने धोखाधड़ी के एक मामले में सात वर्ष की सजा सुनाई जिसके बाद उन्हें संसद सदस्य के रूप में अयोग्य घोषित किया गया था.

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(The above story first appeared on LatestLY on Dec 15, 2023 06:16 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).