13 अगस्त की बड़ी खबरें
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यूएन की रिपोर्ट में दावा, लाल किला आतंकी हमला अल कायदा से जुड़ा
‘बर्थ टूरिज्म’ पर अमेरिका की सख्ती, 600 से ज्यादा वीजा रद्द
सीमा पर शांति से ही सुधरेंगे रिश्ते, चीन को भारत का संदेश
प्लेन के अचानक 300 फीट नीचे आने का मामला, एयर इंडिया ने सभी पायलटों के लिए ड्रग टेस्ट अनिवार्य किया
एयर इंडिया ने अपने सभी पायलटों के लिए अनिवार्य ड्रग स्क्रीनिंग शुरू करने का फैसला किया है. समाचार एजेंसी एएफपी द्वारा देखे गए एक आंतरिक मेमो के अनुसार, यह जांच गुरुवार से शुरू हो गई है और समूह के सभी पायलटों पर लागू होगी. मौजूदा नियमों के तहत एयरलाइंस को हर साल अपने फ्लाइट क्रू के कम से कम 10 प्रतिशत सदस्यों का साइकोएक्टिव पदार्थों के लिए रैंडम टेस्ट करना जरूरी है, लेकिन एयर इंडिया ने अब व्यापक जांच का निर्णय लिया है.
यह कदम 4 अगस्त को हुए एक गंभीर हवाई हादसे के बाद उठाया गया है. फुकेट से नई दिल्ली जा रही एयर इंडिया की एक एयरबस A320 विमान ने उड़ान भरने के तुरंत बाद करीब 300 फीट की ऊंचाई खो दी थी, जिससे कम से कम 24 यात्री घायल हो गए थे.
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि विमान के कैप्टन ने गांजा का सेवन किया था और पुष्टिकरण जांच में भी उसका टेस्ट पॉजिटिव आया. हालांकि एयर इंडिया का कहना है कि उसे इन जांच परिणामों की आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है.
भारतीय जांच एजेंसियां इस घटना से जुड़े सभी साक्ष्यों की जांच कर रही हैं और जांच में एयरबस तथा फ्रांस की विमानन सुरक्षा एजेंसी बीईए भी सहयोग कर रही हैं. यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब एयर इंडिया हाल के झटकों के बाद अपनी परिचालन व्यवस्था और सुरक्षा मानकों को मजबूत करने की कोशिश कर रही है.
महाराष्ट्र में सुखबीर सिंह बादल पर गुरुद्वारे के अंदर हमला
महाराष्ट्र के नांदेड़ में शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर गुरुवार सुबह हमला किया गया. महाराष्ट्र पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि घटना गुरुद्वारे के अंदर हुई. हमले में सुखबीर सिंह बादल के हाथ में चोट लगी है और शरीर के कुछ अन्य हिस्सों में भी चोट लगने की प्राथमिक सूचना है. उन्हें इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
पुलिस के अनुसार, हमला सुबह करीब 11 बजे नांदेड़ स्थित तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब परिसर में माता साहिब गुरुद्वारे के पास हुआ. प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, एक निहंग ने कृपाण से सुखबीर सिंह बादल पर हमला किया. हालांकि, मौके पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने हमलावर को पकड़ लिया और उसे हिरासत में ले लिया गया है.
हमले के दौरान सुखबीर सिंह बादल की विशेष सुरक्षा में तैनात इंस्पेक्टर संतोष केंद्रे पर भी हमला किया गया, जिसमें वह घायल हो गए. पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और हमले के पीछे की वजह का पता लगाया जा रहा है.
सीजेपी प्रदर्शनकारियों की बायोमेट्रिक निगरानी पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उस याचिका पर विचार करने पर सहमति जताई, जिसमें प्रदर्शन स्थलों पर पुलिस द्वारा फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी और अन्य बायोमेट्रिक निगरानी उपकरणों के इस्तेमाल को चुनौती दी गई है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की पीठ ने इस याचिका को कॉकरेच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित हालिया छात्र प्रदर्शनों से जुडी अन्य लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया.
केरल से सीपीआई (एम) के राज्यसभा सांसद ए.ए. रहीम ने यह याचिका दायर की है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए चेहरे की मैपिंग के साथ-साथ वाहनों पर लगाए गए निगरानी उपकरणों का इस्तेमाल किया. इसमें दावा किया गया है कि लोगों की अनुमति के बिना उनका डेटा एकत्र किया गया और बाद में उसे दो निजी कंपनियों के सर्वर पर रखा गया. रहीम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने अदालत को बताया कि चेहरे की मैपिंग के लिए विशेष चश्मे और डेटा जुटाने के लिए एक निगरानी वाहन का इस्तेमाल किया गया. उन्होंने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के प्रावधानों के कथित उल्लंघन का आरोप भी लगाया.
मामले में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस आयुक्त, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) और दो निजी कंपनियों-आदित्य इंफोटेक लिमिटेड तथा डाइमेंशन एनएक्सजी प्राइवेट लिमिटेड- को रिस्पोंडेंट बनाया गया है.
अग्निवीर भर्ती बहाली की मांग को लेकर नेपाल में प्रदर्शन
नेपाल के पोखरा शहर में बुधवार को बड़ी संख्या में नेपाली युवाओं, भारतीय सेना के पूर्व गोरखा सैनिकों और उनके परिजनों ने रैली निकाली. उनकी मांग है कि नेपाली नागरिकों की अग्निवीर के तौर पर भर्ती फिर शुरू की जाए. रैली का आयोजन इंडियन एक्स-सर्विसमेन गोरखा ब्रिगेड नेपाल के बैनर तले किया गया. प्रदर्शनकारियों ने नेपाल सरकार से इस मुद्दे पर अपने मौजूदा रुख पर पुनर्विचार करने की अपील की. भारतीय सेना में नेपाली गोरखाओं की भर्ती 2019 से बंद है. शुरुआत में कोविड-19 महामारी के चलते भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हुई थी. बाद में भारत में 2022 में अग्निवीर योजना लागू होने के बाद नेपाल ने इस योजना के तहत अपने नागरिकों की भर्ती की अनुमति नहीं दी.
अग्निवीर योजना में चार साल की सेवा पूरी करने वाले जवानों में अधिकतम 25 प्रतिशत को भारतीय सेना में आगे स्थायी सेवा का अवसर मिलता है. नेपाल सरकार का कहना है कि अग्निवीर व्यवस्था 1947 में भारत, नेपाल और ब्रिटेन के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते की मौजूदा व्यवस्था के अनुरूप नहीं है. इसी वजह से नेपाली नागरिकों की भारतीय सेना में भर्ती को लेकर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है. हालांकि, नेपाल में रोजगार के सीमित विकल्पों के बीच बड़ी संख्या में युवा अभी भी भारतीय सेना में भर्ती को बेहतर अवसर के तौर पर देखते हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अग्निवीर योजना के तहत भर्ती का रास्ता बंद होने से युवाओं के लिए रोजगार का एक महत्वपूर्ण विकल्प खत्म हो गया है.
नाबालिगों की सोशल मीडिया पहुंच रोकने के लिए मेटा की कार्रवाई, 7.5 लाख खाते हटाए
ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू होने के बाद फेसबुक और इंस्टाग्राम की मालिक कंपनी मेटा ने बड़ी कार्रवाई की है. कंपनी ने बताया कि दिसंबर से जून के बीच उसने 7.5 लाख से अधिक ऐसे खातों को हटाया, जिनके बारे में संदेह था कि वे 16 वर्ष से कम आयु के ऑस्ट्रेलियाई यूजर्स द्वारा संचालित किए जा रहे थे. इनमें इंस्टाग्राम के 4.62 लाख और फेसबुक के 2.94 लाख खाते शामिल हैं.
तन्हाई भी बिकती है! लोनलीनेस इन्फ्लुएंसरों के कंटेंट पर बरस रहे हैं क्लिक
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने बच्चों और किशोरों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया के प्रभाव को देखते हुए यह ऐतिहासिक कानून लागू किया था. हालांकि सरकारी आंकड़ों और स्वतंत्र अध्ययनों के अनुसार प्रतिबंध लागू होने के शुरुआती तीन महीनों में भी 80 प्रतिशत से अधिक नाबालिग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते रहे. इसी बीच सरकार ने नियमों का पालन नहीं करने वाली कंपनियों पर अधिकतम 9.9 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक का जुर्माना लगाने और नियामक शक्तियां बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा है.
एआई प्रेमियों से बिछड़ने के गम में डूबे चीन के यूजर
मेटा ने कहा कि वह कानून का पालन करने के लिए एआई का इस्तेमाल कर रही है. कंपनी प्रोफाइल में जन्मदिन समारोह, स्कूल की कक्षा से जुड़े संकेत और अन्य संदर्भों के आधार पर संभावित नाबालिग खातों की पहचान कर रही है. साथ ही, हटाए गए खातों को दोबारा बनाने की कोशिशों को रोकने के लिए भी अतिरिक्त कदम उठाए गए हैं. शुक्रवार को मेटा, टिकटॉक, गूगल और स्नैपचैट के प्रतिनिधि इस मुद्दे पर ऑस्ट्रेलियाई संसदीय जांच समिति के समक्ष अपने अनुपालन प्रयासों की जानकारी देंगे.
कोलंबिया में भूकंप से मरने वालों की संख्या 265, बचाव अभियान ‘अंतिम चरण’ में
कोलंबिया में आए विनाशकारी भूकंप के बाद बचावकर्मी लगातार तीसरी रात मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे रहे. राष्ट्रपति अबेलार्दो डे ला एस्प्रिएला के अनुसार, भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर 265 हो गई है. करीब 3,500 लोग घायल हुए हैं, जबकि लगभग 500 लोग अब भी लापता हैं. हालांकि, परिवारों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे एक क्राउडसोर्सिंग ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म के अनुसार लापता लोगों की संख्या 4,100 से अधिक हो सकती है. राष्ट्रपति ने बताया कि कुल मिलाकर 25,800 से अधिक परिवार इस आपदा से प्रभावित हुए हैं.
काली के मेयर अलेजांद्रो एडर ने कहा कि राहत एवं बचाव अभियान अब अपने अंतिम और बेहद महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है. शुरूआती 72 घंटे पूरे होने के बाद भी लोगों के जीवित मिलने की संभावना रहती है, लेकिन समय बीतने के साथ उम्मीद कम होती जाती है. उन्होंने बताया कि बचाव दलों को अब भी मलबे के नीचे जीवन के संकेत मिल रहे हैं और हर मिनट बेहद महत्वपूर्ण है.
भूकंप के बाद मलबे में कोई कितनी देर तक जिंदा रह सकता है
7.4 तीव्रता का यह भूकंप सोमवार, 11 अगस्त की सुबह उत्तर-पश्चिमी चोको क्षेत्र के सान जोसे डेल पालमार के पास आया था. इसे पिछले कई दशकों में कोलंबिया में आया सबसे शक्तिशाली भूकंप बताया जा रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, करीब 140 इमारतें पूरी तरह ढह गईं. मुख्य भूकंप के बाद से अब तक 130 आफ्टरशॉक दर्ज किए गए हैं. अमेरिका ने 1.5 करोड़ डॉलर से अधिक की आर्थिक सहायता देने का एलान किया है और राहत दल भी भेजे हैं. वहीं मेक्सिको ने करीब 20 टन खाद्य सामग्री लेकर सैन्य विमान भेजे हैं.
2026 में 50 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ने की राह पर भारत
भारत साल 2026 में सौर ऊर्जा क्षमता वृद्धि का नया रिकॉर्ड बनाने की ओर अग्रसर है. वुड मैकेंजी की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 2026 की पहली छमाही (जनवरी-जून) में 34 गीगावाट डायरेक्ट करंट (जीडब्ल्यूडीसी) सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ी है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 38 प्रतिशत अधिक है. मौजूदा रफ्तार को देखते हुए पूरे वर्ष में भारत 50 गीगावाट से अधिक सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ सकता है, जो देश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक विस्तार होगा.
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत इस वर्ष अपने सौर ऊर्जा स्थापना इतिहास में किसी भी अन्य वर्ष की तुलना में सबसे अधिक क्षमता स्थापित करने जा रहा है. हालांकि, इस तेज वृद्धि को बढ़ावा देने वाली नीतियां घरेलू सप्लाई चेन पर दबाव भी पैदा कर रही हैं, जिसके चलते निकट अवधि में सौर परियोजनाओं की लागत बढ़ने की संभावना है.
इस वर्ष सौर ऊर्जा क्षेत्र में तेजी का एक अन्य कारण अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन शुल्क में मिलने वाली छूट का धीरे-धीरे कम होना भी रहा. जुलाई 2026 से कमीशन होने वाली परियोजनाओं के लिए यह छूट 75 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत कर दी गई है, जबकि जुलाई 2028 के बाद इसे पूरी तरह समाप्त करने की योजना है. इसी वजह से कई डेवलपर्स ने समयसीमा से पहले परियोजनाओं को पूरा करने में तेजी दिखाई.
हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में यह रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है, जिसकी मुख्य वजह घरेलू सौर सेल उत्पादन क्षमता की कमी और मॉड्यूल कीमतों में बढ़ोतरी है, जो नई परियोजनाओं के विकास पर दबाव डाल सकती है.
ईरान में प्रदर्शनकारियों की फांसी पर 30 से ज्यादा देशों ने जताया विरोध
फ्रांस, ब्रिटेन और कनाडा समेत 30 से ज्यादा देशों ने ईरान में प्रदर्शनकारियों को दी जा रही फांसी की कड़ी निंदा की है. इन देशों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि ईरान सरकार असहमति को दबाने और लोगों में डर पैदा करने के लिए मृत्युदंड का इस्तेमाल कर रही है. बयान में कहा गया कि लोगों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार बिना किसी डर के मिलना चाहिए. इन देशों ने ईरान से मृत्युदंड का इस्तेमाल तुरंत बंद करने और मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने की मांग की.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पश्चिमी देशों की आलोचना को खारिज करते हुए दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि फ्रांस जैसे देशों को को मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानून पर दुनिया को "लेक्चर" देना बंद करना चाहिए. उन्होंने गाजा में इस्राएल के समर्थन और ईरान के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी फ्रांस की आलोचना की.
हाल के महीनों में ईरान में फांसी की घटनाओं में तेजी आई है. इस साल ईरान देशव्यापी सरकार-विरोधी प्रदर्शनों से प्रभावित हुआ था और फरवरी में मध्य-पूर्व में युद्ध शुरू हुआ था. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टुर्क ने अगस्त की शुरुआत में कहा था कि ईरान मृत्युदंड का इस्तेमाल लोगों में भय पैदा करने के लिए कर रहा है. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 19 मार्च के बाद से कम से कम 56 लोगों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े आरोपों में फांसी दी जा चुकी है, जिनमें 27 मामले विरोध प्रदर्शनों से जुड़े हैं. इसके अलावा 100 से अधिक लोग इसी तरह के आरोपों में फांसी के खतरे में हैं.
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संसदीय समिति रिपोर्ट: 73 प्रतिशत छात्र उच्च माध्यमिक तक पहुंचने से पहले छोड़ रहे पढ़ाई
संसद की एक समिति ने शिक्षा के उच्च स्तरों पर स्कूलों और छात्रों की संख्या में "चिंताजनक गिरावट" पर चिंता जताते हुए कहा है कि देश में लगभग 73 प्रतिशत छात्र उच्च माध्यमिक स्तर तक पहुंचने से पहले ही शिक्षा व्यवस्था से बाहर हो जाते हैं.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यूपी में क्या है मदरसों की शिक्षा का भविष्य?
लोकसभा में बुधवार को पेश समिति ऑन एस्टीमेट्स (2026-27) की दसवीं रिपोर्ट में कहा गया है कि प्राथमिक स्तर पर बड़ी संख्या में स्कूल होने के बावजूद माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर संस्थानों की उपलब्धता काफी कम है.
समिति ने शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली (यूडीआईएसई) 2024-25 के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि देश के 10.92 लाख से अधिक सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में 9.11 लाख प्राथमिक, 4.12 लाख उच्च प्राथमिक, 1.61 लाख माध्यमिक और केवल 90,866 उच्च माध्यमिक स्कूल हैं. छात्र नामांकन में भी इसी तरह की गिरावट देखी गई है. प्राथमिक स्तर पर 6.18 करोड़ से अधिक छात्र नामांकित हैं, जबकि उच्च प्राथमिक में यह संख्या 4.08 करोड़, माध्यमिक में 2.36 करोड़ और उच्च माध्यमिक में घटकर 1.64 करोड़ रह जाती है.
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रिपोर्ट में कहा गया है कि दस लाख अधिक सरकारी स्कूलों में अधिकांश केवल प्राथमिक स्तर तक सीमित हैं, जिससे छात्रों की आगे की पढ़ाई प्रभावित होती है. समिति ने शिक्षा मंत्रालय से मौजूदा प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को चरणबद्ध तरीके से उच्च माध्यमिक विद्यालयों में अपग्रेड करने को प्राथमिकता देने की सिफारिश की है, ताकि विभिन्न समुदायों के छात्रों को नजदीक ही उच्च माध्यमिक शिक्षा उपलब्ध हो सके और ड्रॉपआउट दर में कमी लाई जा सके.
जर्मनी में घटे काम के घंटे, पुरुषों ने किया कम काम
जर्मनी में प्रति व्यक्ति काम करने के औसत घंटे कई साल बढ़ने के बाद पिछले साल 2025 में थोड़े कम हुए हैं. जर्मनी के फेडरल इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन रिसर्च (बीआइबी) के बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, 20 से 64 साल की उम्र के लोगों ने 2025 में हर हफ्ते औसतन 0.3 घंटे कम काम किया. साल 2023 में काम के घंटे सबसे ज्यादा स्तर पर थे.
साल 2025 में काम के घंटों में आई कमी करीब 4.6 लाख फुल-टाइम नौकरियों के बराबर रही. सबसे ज्यादा कमी पुरुषों और 25 से 54 साल की उम्र के लोगों में देखी गई. वहीं, ज्यादा उम्र के लोगों के काम करने के घंटे बढ़ते रहे.
महिलाओं के काम के घंटे लगभग पहले जैसे ही रहे. वे हर हफ्ते औसतन 24 घंटे से कुछ ज्यादा काम करती हैं. इसकी एक वजह शिक्षा, बच्चों की देखभाल और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में कर्मचारियों की कमी है. वहीं 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के काम करने के घंटे भी बढ़े हैं. इसकी एक वजह जर्मनी में रिटायरमेंट की उम्र का धीरे-धीरे बढ़ना है.
शिक्षा के स्तर के हिसाब से भी फर्क सामने आया. कम पढ़े-लिखे लोगों के काम के घंटे सबसे ज्यादा घटे. जबकि ज्यादा पढ़े-लिखे और बेहतर योग्यता वाले लोगों में कमी कम रही.
लोकसभा और राज्यसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, 19 प्रतिशत रही लोकसभा की उत्पादकता
संसद का मानसून सत्र गुरुवार, 13 अगस्त को दोनों सदनों के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के साथ समाप्त हो गया. लोकसभा में अंतिम दिन कार्यवाही शुरू होते ही राष्ट्रगीत "वंदे मातरम्" बजाया गया, जिसके कुछ ही देर बाद सदन को स्थगित कर दिया गया. पूरे सत्र के दौरान विपक्ष ने नीट पेपर लीक, राम मंदिर दान राशि में कथित गड़बड़ी और छात्र आंदोलनों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरा, जिसके कारण बार-बार हंगामा हुआ और प्रश्नकाल नहीं चल सका.
एनसीपीआई: तृणमूल के बागी सांसदों ने एक अनाम राजनीतिक पार्टी का हाथ क्यों थामा?
राज्यसभा ने सत्र के अंतिम दिन खनिज एवं खदान (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को चर्चा के बाद पारित किया. राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने अपने समापन संबोधन में कहा कि उच्च सदन ने कुल 37 घंटे 49 मिनट काम किया और 12 विधेयकों पर विचार कर उन्हें पारित या वापस किया गया. हालांकि उन्होंने पूरे सत्र के दौरान बने रहे व्यवधानों और अव्यवस्था पर खेद भी जताया.
सत्र समाप्त होने के बाद कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने संसद की कार्यवाही बाधित होने के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में चर्चा से बच रहे थे और सरकार की प्राथमिकताएं जनता के मुद्दों से अलग हैं. वेणुगोपाल ने कहा कि सदन के वॉशआउट के लिए पूरी तरह सरकार जिम्मेदार है और देश की जनता ने उसके एजेंडे को खारिज कर दिया है.
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सत्र समाप्त होने के बाद कहा कि संसद ने मानसून सत्र के दौरान कुल 13 विधेयक पारित किए. हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि चर्चा के लिहाज से यह सत्र संतोषजनक नहीं रहा. रिजिजू के अनुसार, लोकसभा की उत्पादकता 19 प्रतिशत और राज्यसभा की 39 प्रतिशत रही. उन्होंने कहा, “यह अच्छा सत्र था क्योंकि 13 विधेयक पारित हुए, लेकिन चर्चा के लिहाज से यह अच्छा सत्र नहीं कहा जा सकता.”
यूएन की रिपोर्ट में दावा, लाल किला आतंकी हमला अल कायदा से जुड़ा
दिल्ली के लाल किले के पास नवंबर 2025 में हुए आतंकी धमाके को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की एक रिपोर्ट में इस हमले को "अल कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (एक्यूआईएस)" से जोड़ा गया है. हमले में 11 लोगों की मौत हुई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, धमाका ऐसे समय हुआ जब दिल्ली से करीब 50 किलोमीटर दूर हरियाणा के फरीदाबाद में लगभग 2,900 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी. इसमें अमोनियम नाइट्रेट भी शामिल था. जांच के दौरान डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. आदिल राथर को गिरफ्तार किया गया था.
रिपोर्ट के मुताबिक, एक्यूआईएस अब छोटे और विकेंद्रीकृत समूहों के जरिए अपनी गतिविधियां बढ़ा रहा है और दक्षिण एशिया में एक मजबूत क्षेत्रीय आतंकी नेटवर्क के तौर पर उभर रहा है. यह आकलन संयुक्त राष्ट्र की एनालिटिकल सपोर्ट एंड सैंक्शंस मॉनिटरिंग टीम की 38वीं रिपोर्ट में सामने आया है. यह टीम आईएसआईएस, अल कायदा और उनसे जुड़े संगठनों की गतिविधियों पर नजर रखती है और अपनी रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संबंधित समिति को सौंपती है.
संयुक्त राष्ट्र ने अपनी रिपोर्ट में दक्षिण एशिया की मौजूदा सुरक्षा स्थिति पर भी चिंता जताई है. रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार हमलों ने तनाव बढ़ाया है. इसमें आरोप लगाया गया कि अफगानिस्तान प्रशासन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को समर्थन देता रहा है. इसके कारण पाकिस्तान में हमलों में बढ़ोतरी हुई और दोनों पक्षों के बीच सैन्य टकराव भी देखने को मिले.
‘बर्थ टूरिज्म’ पर अमेरिका की सख्ती, 600 से ज्यादा वीजा रद्द
अमेरिका ने 'बर्थ टूरिज्म' के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है. इसके तहत 600 से ज्यादा विदेशी नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए गए हैं. अमेरिकी विदेश विभाग ने बुधवार को इसकी जानकारी दी. विदेश विभाग ने बताया कि उसने 'बर्थ टूरिज्म प्रिवेंशन टास्क फोर्स' नाम की एक खास टीम बनाई है. यह टीम उन लोगों की पहचान करेगी जो अमेरिका में बच्चे को जन्म देने के लिए आते हैं. साथ ही, ऐसे लोगों की मदद करने वाले एजेंट और नेटवर्क की भी जांच की जा रही है.
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, यह टीम यात्रियों का यात्रा रिकॉर्ड, वीजा जानकारी और दूसरी सरकारी एजेंसियों के डेटा की जांच करती है. अगर किसी ने वीजा लेते समय गलत जानकारी दी हो या यात्रा का असली मकसद छिपाया हो, तो उसका वीजा रद्द किया जा सकता है. विदेश मंत्री मार्को रुबियो के पास वीजा रद्द करने का व्यापक अधिकार है.
वीजा के लिए सालों का इंतजार, फिर भी अमेरिका क्यों जाना चाहती हैं भारतीय नर्सें
यह कार्रवाई राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के 6 अगस्त के कार्यकारी आदेश के बाद शुरू हुई. अमेरिकी सरकार के अनुसार यह मुख्य रूप से जन्म देने के उद्देश्य से अमेरिका आने वाले विदेशी यात्रियों और उन्हें सुविधा देने वाले नेटवर्क पर कार्रवाई से जुड़ा है. विभाग के मुताबिक कुछ संचालक मेडिकल दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा भी करते हैं या अपने ग्राहकों को यात्रा का असली उद्देश्य छिपाने और अस्पताल का बिल न चुकाने के तरीके बताते हैं. ऑनलाइन विज्ञापनों में 'अपने आप अमेरिकी नागरिकता' और 'सीमाओं से मुक्त भविष्य' जैसे वादे भी किए जाते हैं.
सीमा पर शांति से ही सुधरेंगे रिश्ते, चीन को भारत का संदेश
भारत ने एक बार फिर कहा है कि चीन के साथ विवादित सीमा पर शांति और स्थिरता दोनों देशों के संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सीमा से जुड़े मुद्दे भारत-चीन संबंधों में सबसे गंभीर विषयों में शामिल हैं और सीमा क्षेत्रों की स्थिति का असर व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ता है. यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देश 2020 के सीमा संघर्ष के बाद रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
चीन की आंखों का कांटा क्यों बना है अरुणाचल प्रदेश
यह टिप्पणी अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के तवक्सिंग क्षेत्र में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच कथित आमने-सामने की स्थिति की रिपोर्टों के बीच आई है. स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जुलाई के अंत में दोनों देशों के गश्ती दल आमने-सामने आए थे. दावा किया गया कि चीनी सैनिक पहले वापस लौट गए, लेकिन बाद में फिर लौटकर इलाके में कुछ अस्थायी ढांचे लगाए. चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताता है, जबकि भारत उसे अपना अभिन्न अंग मानता है.
हालांकि भारतीय रक्षा अधिकारियों ने नए तनाव की खबरों को खारिज करते हुए उन्हें "अप्रमाणित और पुष्टिहीन" बताया है. दूसरी ओर, चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सीमा क्षेत्र की स्थिति फिलहाल "सामान्य रूप से स्थिर" है. दोनों देशों ने हाल ही में नई दिल्ली में हुई सीमा मामलों पर परामर्श बैठक में राजनयिक और सैन्य स्तर पर संवाद जारी रखने तथा सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने पर सहमति जताई थी.
रांची में छात्रों का आंदोलन 20वें दिन भी जारी, सीएम आवास के घेराव की तैयारी
जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के अगले चरण को लेकर रांची जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है. आंदोलनकारी छात्रों ने 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की तैयारी की है.
हालांकि आंदोलित छात्रों ने औपचारिक तौर पर इसका एलान नहीं किया है, लेकिन खुफिया इनपुट के मद्देनजर कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास और आसपास के इलाकों में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है. तमाम सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं.
मुख्यमंत्री आवास की सुरक्षा में 100 से अधिक अतिरिक्त सशस्त्र जवानों को लगाया गया है. इनमें झारखंड जगुआर और झारखंड आर्म्ड पुलिस के जवान शामिल हैं.
आंदोलनकारी जेपीएससी और जेएसएससी की विवादित भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच समेत परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं. छात्रों की प्रमुख मांगों में जेपीएससी सिविल सेवा और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की सीबीआई जांच शामिल है.
10 अगस्त को छात्रों ने विधानसभा घेराव किया था. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ था. पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था. बाद में लाठीचार्ज भी हुआ. इस कार्रवाई के बाद आंदोलनकारी छात्रों ने अपना आंदोलन और तेज करने का एलान किया था.
छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती, आंदोलन जारी रहेगा.
झारखंड में क्यों नहीं शांत हो रहा छात्रों का गुस्सा
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 13, 2026 08:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

