देश की खबरें | भाजपा नेता अशोक ने साधा कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया पर निशाना

बेंगलुरु, 13 सितंबर कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता एवं राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री आर अशोक ने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया पर पलटवार किया है। सिद्धरमैया ने कहा था कि राहुल गांधी की आरक्षण संबंधी टिप्पणी के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का प्रदर्शन किसी कसाई द्वारा पशु क्रूरता का विरोध किए जाने की तरह है।

अशोक मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के एक सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया जता रहे थे, जिसमें मुख्यमंत्री ने भाजपा नेताओं पर उनकी ‘‘आरक्षण विरोधी भावनाओं के लिए कटाक्ष किया था।

अशोक ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘एक मुख्यमंत्री, जिनकी सरकार पर अनुसूचित जनजाति समुदायों के कल्याण के लिए निर्धारित 187 करोड़ रुपये की राशि की हेराफेरी का आरोप है, उनका आरक्षण के बारे में बात करना 'शैतान द्वारा शास्त्रों का हवाला देने' के समान है।’’

उन्होंने यह भी कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 27 जून, 1961 को लिखे एक पत्र में जाति-आधारित आरक्षण और विशेषाधिकारों की परंपरा के बारे में अपनी आपत्तियां व्यक्त की थीं।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा, नेहरू ने लिखा था, "मैं किसी भी तरह के आरक्षण को नापसंद करता हूं, खासकर सेवा में। मैं ऐसी किसी भी चीज के खिलाफ दृढ़ता से प्रतिक्रिया जताता हूं जो अकुशलता और दोयम दर्जे के मानकों को जन्म देती है।’’

उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1980 में सौंपी गई मंडल आयोग रिपोर्ट को कभी लागू नहीं किया।

अशोक ने पोस्ट में लिखा, ‘‘उन्होंने (इंदिरा गांधी) एक नारा दिया: 'न जात पर न पात पर, मोहर लगेगी हाथ पर।' पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने मार्च 1985 में एक साक्षात्कार में कहा था: 'आरक्षण के नाम पर मूर्खों को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए और आरक्षण के नाम पर मूर्खों को बढ़ावा देने से पूरे देश को नुकसान होगा।' और अब कांग्रेस कहती है कि भाजपा अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के खिलाफ है। क्या यह विडंबना नहीं है?’’

कांग्रेस और भाजपा के बीच वाकयुद्ध कुछ दिनों पहले तब शुरू हुआ जब राहुल गांधी ने जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय में छात्रों से संवाद के दौरान कहा था कि ‘‘कांग्रेस तभी आरक्षण खत्म करने के बारे में सोचेगी, जब देश में सभी को समान अवसर मिलने लगेंगे और फिलहाल भारत में ऐसी स्थिति नहीं है।’’

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