देश की खबरें | भाजपा ने आंदोलनकारी स्कूल शिक्षकों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर तृणमूल सरकार की आलोचना की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भाजपा ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि आंदोलनकारी स्कूली शिक्षकों पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई ‘‘क्रूरता का भयावह प्रदर्शन’’ है।

कोलकाता, 16 मई भाजपा ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि आंदोलनकारी स्कूली शिक्षकों पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई ‘‘क्रूरता का भयावह प्रदर्शन’’ है।

बेरोजगार शिक्षकों के नेतृत्व में प्रदर्शन बृहस्पतिवार को राज्य शिक्षा विभाग के मुख्यालय विकास भवन के बाहर हुआ।

इन शिक्षकों ने 2016 स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) परीक्षा उत्तीर्ण की थी, लेकिन हाल ही में अदालत के आदेश के बाद अपनी नियुक्ति खो चुके हैं।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने लाठीचार्ज के दौरान उनमें से कई लोगों की पिटाई की जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

घायलों में एक महिला शिक्षक भी शामिल है, जिसका पैर कथित तौर पर टूट गया है, जबकि एक अन्य के सिर में चोट आई है।

प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि घायल महिलाएं जमीन पर पड़ी थीं, दर्द से चिल्ला रही थीं और रो रही थीं, लेकिन पुलिस ने मदद करने के बजाय लाठीचार्ज जारी रखा।

बढ़ते आक्रोश के बीच, भाजपा विधायक और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेन्दु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आलोचना की और उन पर तानाशाही तथा भ्रष्टाचारियों को बचाने का आरोप लगाया।

अधिकारी ने कहा, ‘‘अगर कैबिनेट चोरों को बचाने का फैसला करती है, तो मंत्रिपरिषद में शामिल लोगों को जेल में होना चाहिए।’’

भाजपा नेता ने दावा किया, ‘‘यह मुद्दा मेरे दिल के बहुत करीब है, क्योंकि इसी परीक्षा के ज़रिए मुझे अपनी पहली नौकरी मिली थी। कल विश्वविद्यालय का एक स्वर्ण पदक विजेता ममता बनर्जी की वजह से रो रहा था। अगर इसके लिए कोई ज़िम्मेदार है, तो वह ममता बनर्जी और उनकी पूरी कैबिनेट है।’’

अधिकारी ने आरोप लगाया कि ईमानदार और योग्य उम्मीदवारों को उनकी योग्यता के बावजूद नौकरी नहीं दी गई, जबकि भर्ती में ‘‘राजनीतिक लाभ के लिए हेराफेरी’’ की गई।

उन्होंने पुलिस पर लोगों की सुरक्षा करने के बजाय सत्तारूढ़ पार्टी के इशारे पर काम करने का आरोप भी लगाया।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा कि प्रदर्शनकारी शिक्षकों पर पुलिस की कार्रवाई ‘‘क्रूरता का एक भयावह प्रदर्शन’’ है।

इस बीच, साल्ट लेक में पश्चिम बंगाल शिक्षा विभाग के मुख्यालय में और उसके आसपास आंदोलनकारी स्कूल शिक्षकों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पों के एक दिन बाद, प्रदर्शनकारियों ने शुक्रवार को इमारत के बाहर अपना प्रदर्शन फिर से शुरू कर दिया।

भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के कारण सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में हजारों नियुक्तियों को रद्द करने के हालिया अदालती आदेश के बाद अपनी नौकरी गंवाने वाले शिक्षकों ने विकास भवन के बाहर पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ नारे लगाए।

योग्य शिक्षक अधिकार मंच के एक सदस्य ने कहा कि बृहस्पतिवार को झड़पों में घायल हुए कई लोग प्रदर्शन स्थल पर लौट आए और धरने में शामिल हो गए।

वे अपनी नौकरियों की स्थायी बहाली के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग कर रहे हैं और उनकी मांग है कि 2016 में स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) की परीक्षा पास करने के बाद अब उन्हें नई भर्ती परीक्षा में बैठने के लिए नहीं कहा जाना चाहिए।

विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले शिक्षकों ने कहा कि उन्होंने चोटों और परेशानी का सामना करते हुए विकास भवन के बाहर रात बिताई।

उनमें से एक प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘‘जब तक न्याय नहीं मिल जाता, हम कहीं नहीं जाएंगे।’’

बृहस्पतिवार शाम को विकास भवन के आसपास का इलाका एक तरह से युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया, जब प्रदर्शनकारी स्कूली शिक्षकों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि एक घंटे से अधिक समय तक चली पुलिस कार्रवाई में कई महिलाओं सहित कई शिक्षक घायल हो गए।

पुलिस उपायुक्त (बिधाननगर) अनीश सरकार ने बताया कि शिक्षा विभाग के फंसे हुए कर्मचारियों को घर लौटने देने के लिए शिक्षकों से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने बृहस्पतिवार शाम को अपना आंदोलन जारी रखा।

इस बीच, पश्चिम बंगाल पुलिस ने शुक्रवार को कहा कि यहां साल्ट लेक स्थित राज्य शिक्षा विभाग मुख्यालय के बाहर आंदोलनकारी स्कूल शिक्षकों के साथ झड़प में उसके 19 कर्मी घायल हो गए, जिनमें से एक की हालत गंभीर है।

अधिकारियों ने कहा कि पुलिस ने हिंसा भड़काने वाले लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

उच्चतम न्यायालय ने राज्य-सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति को अमान्य करार दिया था और पूरी चयन प्रक्रिया को ‘दूषित और दागी’ करार दिया था।

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