देश की खबरें | भाजपा की समिति ने बंगाल हिंसा पर नड्डा को सौंपी रिपोर्ट, ममता पर बंगाल को ‘अराजक’ बनाने का आरोप

नयी दिल्ली, 20 जुलाई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनावों के दौरान महिलाओं के खिलाफ हुई कथित हिंसा की जांच के लिए गठित पांच महिला सांसदों की जांच समिति ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा को अपनी रिपोर्ट सौंप दी।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में जहां यह आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल को ‘‘अराजक’’ प्रदेश बना दिया है, वहीं नड्डा ने कहा कि रिपोर्ट राज्य में ‘‘अराजकता’’ की स्थिति और राजनीतिक विरोधियों के प्रति तृणमूल कांग्रेस की सरकार की ‘‘असंवेदनशीलता’’ को उजागर करती है।

राज्यसभा की सदस्य सरोज पांडेय को इस समिति का संयोजक बनाया गया था। सांसद रमा देवी, अपराजिता सारंगी, कविता पाटीदार और संध्या राय को इस समिति का सदस्य बनाया गया था।

समिति के सदस्यों ने मंगलवार को उत्तर 24 परगना के हिंसा प्रभावित देगंगा का दौरा किया था और आगजनी के संबंध में सीधे जानकारी जुटाने के अलावा उन लोगों से मुलाकात की थी जिनके घर जला दिए गए थे।

अगले दिन बुधवार को पांच महिला सांसदों की टीम ने हावड़ा जिले के आमटा का दौरा किया और पंचायत चुनाव के बाद हुई हिंसा के पीड़ितों से मुलाकात की थी।

नड्डा ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के दौरान महिलाओं पर की गई हिंसा और अत्याचारों के बारे में जांच के लिए गठित भाजपा की समिति ने रिपोर्ट सौंपी है। यह रिपोर्ट पश्चिम बंगाल में अराजकता की स्थिति और राजनीतिक विरोधियों के प्रति राज्य सरकार की असंवेदनशीलता को उजागर करती है। भाजपा जनता के इस दमन को कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।’’

समिति की संयोजक सरोज पांडेय ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव में महिलाओं पर हुए अत्याचार एवं व्यापक हिंसा की जांच के लिए बनाई गई समिति ने अध्यक्ष जे पी नड्डा को अपनी रिपोर्ट सौंपी। साथ ही संयोजक होने के नाते मैंने यह भी अवगत कराया कि ममता बनर्जी ने बंगाल को एक अराजक प्रदेश बना दिया है।’’

महिला सांसदों की समिति से पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के नेतृत्व वाले पार्टी के तथ्यान्वेषी दल ने भी बंगाल का दौरा किया था और हिंसा के पीड़ित परिवारों से मुलाकात की थी।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया कि आठ जून को चुनाव की तारीख की घोषणा के बाद से चुनाव संबंधी हिंसा में 19 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर उनकी पार्टी टीएमसी के थे। पुलिस सूत्रों ने मरने वालों की संख्या 37 बताई है।

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