देश की खबरें | निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित विधेयक इस सत्र में पेश नहीं किए जाने के आसार: सूत्र

नयी दिल्ली, 18 सितंबर सरकार सोमवार से शुरू हुए संसद के पांच दिवसीय सत्र में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों (ईसी) की नियुक्ति से संबंधित विधेयक पारित नहीं कराने पर विचार कर रही है। सूत्रों ने यह बात कही।

विधेयक के प्रावधानों की विपक्ष और पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्तों (सीईसी) द्वारा आलोचना किए जाने के बीच सूत्रों ने यह बात कही है।

उन्होंने कहा कि सरकार के भीतर एक विचार यह है कि विधेयक को कानून और न्याय से संबंधित स्थायी समिति को भेजा जाए।

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 10 अगस्त को राज्यसभा में यह विधेयक पेश किया था।

एन. गोपालस्वामी, वीएस संपत और एस.वाई. कुरैशी सहित कुछ पूर्व सीईसी ने शनिवार को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सीईसी और ईसी को कैबिनेट सचिव के बराबर दर्जा देने के प्रावधान का विरोध किया था।

अभी तक, निर्वाचन आयोग के सदस्य उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के बराबर होते हैं।

पत्र में कहा गया है कि यह न केवल व्यवस्था है, बल्कि प्रतीक भी है कि चुनाव आयुक्तों को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के समान ही दर्जा प्राप्त है और इससे यह माना जाता है कि जिस तरह न्यायपालिका स्वतंत्र है, उसी तरह निर्वाचन आयोग भी स्वतंत्र है।

पत्र में कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश का दर्जा संस्था की स्वायत्तता को दर्शाता है।

पत्र के अनुसार, यह दर्जा वापस नहीं लिया जाना चाहिए क्योंकि निर्वाचन आयोग का काम चुनाव कराना और राजनीतिक नेताओं व नौकरशाहों से विमर्श करना होता है।

रविवार को संसद सत्र की पूर्व संध्या पर सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों के नेताओं ने इस विधेयक का विरोध किया।

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि विधेयक को मौजूदा सत्र में चर्चा और पारित कराने के लिए पेश न किया जाए।

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