3 जून की बड़ी खबरें और अपडेट्स
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

भारत और दुनिया की बड़ी खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं. इस लाइव ब्लॉग को हम लगातार अपडेट कर रहे हैं, ताकि ताजा खबरें आप तक पहुंचा सकें.दिल्ली की एक इमारत में भीषण आग लगने से कई लोगों की मौत

ईरान युद्ध: अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे पर दागीं मिसाइलें

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने सोना बेचने की खबरों को गलत बताया

अमेरिका ने रखा भारत समेत 60 देशों के सामानों पर टैरिफ लगाने का प्रस्ताव

इस्राएल और लेबनान के बीच आज वॉशिंगटन में फिर शुरू होगी उच्च स्तरीय वार्ता

ब्रिटेन में छात्र की हत्या के मामले में हिंसक प्रदर्शन, पुलिस पर लगा 'एंटी-व्हाइट' होने का आरोप

जर्मनी में 2025 में रिकॉर्ड 3.32 लाख से अधिक लोगों को मिली नागरिकता

सेंट पीटर्सबर्ग में यूक्रेन का बड़ा ड्रोन हमला, तेल और सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना

स्पेन में गर्मी ने तोड़ा रिकॉर्ड, मई महीने में दर्ज हुईं सबसे अधिक मौतें

डीके शिवकुमार बने कर्नाटक के 34वें मुख्यमंत्री, सिद्धारमैया की जगह ली

ट्रंप ने स्वीकारा- फोन पर नेतन्याहू को सुनाई थी खरी-खोटी

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इस्राएली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू के साथ फोन पर हुई अपनी बेहद तीखी बातचीत की पुष्टि की है. न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने माना कि उन्होंने सोमवार को हुई बातचीत के दौरान नेतन्याहू को अपशब्द कहे थे और यहां तक याद दिलाया था कि उन्होंने ही नेतन्याहू को जेल जाने से बचाने में मदद की थी.

ट्रंप ने साफ किया कि लेबनान के साथ इस्राएल की लगातार जारी जंग से वे काफी परेशान थे, जिसके चलते उन्होंने बेहद कड़े लहजे में कहा, "बीबी, हमें अब इसे हर हाल में रोकना होगा."

अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, डॉनल्ड ट्रंप के इस गुस्से की मुख्य वजह लेबनान की राजधानी बेरूत पर बमबारी करने की इस्राएल की धमकियां थीं. ट्रंप को डर था कि इस्राएल के इन आक्रामक कदमों के कारण मध्य पूर्व में युद्ध को समाप्त करने के लिए ईरान के साथ चल रही शांति वार्ता पूरी तरह ठप्प हो जाएगी.

हालांकि, इस तीखी नोकझोक के बावजूद ट्रंप ने इंटरव्यू में यह भी कहा कि नेतन्याहू के साथ उनके संबंध बहुत अच्छे हैं और वे उन्हें निजी तौर पर पसंद करते हैं. दूसरी तरफ इस्राएली मीडिया ने इस तरह की किसी भी बातचीत से इनकार किया है.

ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खमेनेई से मिलने की जताई इच्छा

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खमेनेई युद्ध को समाप्त करने के लिए चल रही कूटनीतिक बातचीत में पूरी तरह शामिल हैं. न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए एक इंटरव्यू में डॉनल्ड ट्रंप ने कहा, "वे इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं. बिल्कुल, मेरा मानना है कि ईरान में लोग उनका बहुत सम्मान करते हैं." इसके साथ ही ट्रंप ने ईरान के शीर्ष नेता से आमने-सामने मुलाकात करने की इच्छा भी जाहिर की है.

गौरतलब है कि ईरान में युद्ध की शुरुआत के बाद से ही मोजतबा खमेनेई को सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है. वे केवल टेलीविजन एंकरों द्वारा पढ़े जाने वाले लिखित बयानों के जरिए ही देश को संबोधित करते रहे हैं. अमेरिकी अधिकारियों का लंबे समय से दावा रहा है कि युद्ध के पहले ही दिन एक भीषण बमबारी में अपने पिता अयातुल्लाह अली खमेनेई की मौत के बाद, मोजतबा भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे और फिलहाल उनका इलाज चल रहा है.

जब डॉनल्ड ट्रंप से मोजतबा खमेनेई की सेहत और शारीरिक स्थिति को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "मुझे ठीक से नहीं पता, क्योंकि मुझे अभी तक उनसे मिलने का सौभाग्य नहीं मिला है. लेकिन अगर आप मीडिया में चल रही खबरों पर यकीन करें, तो उनके शरीर के कई हिस्से गायब हैं." खमेनेई से भविष्य में मुलाकात की संभावना पर ट्रंप ने कहा, "हां, मैं उनसे मिलना चाहूंगा. मैं हर किसी से मिलना चाहता हूं... स्थितियां कैसी रहती हैं, इस आधार पर हम शायद किसी मोड़ पर जरूर मिलेंगे."

इस साल 1,000 से ज्यादा पर्वतारोहियों ने माउंट एवरेस्ट फतह किया

दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई के मामले में इस साल नया रिकॉर्ड बना है. न्यूज एजेंसी एएफपी ने नेपाल के पर्यटन विभाग के अधिकारियों के हवाले से बताया है कि इस सीजन में एक हजार से अधिक पर्वतारोहियों ने एवरेस्ट फतह किया है. इसके साथ ही यह अब तक का सबसे व्यस्त सीजन बन गया है. इससे पहले साल 2019 के सीजन में 877 पर्वतारोहियों ने एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की थी.

नेपाल के पर्यटन विभाग के अधिकारी हिमाल गौतम ने बताया कि लंबी समिट विंडो होने के चलते इतनी बड़ी संख्या में पर्वतारोही एवरेस्ट पर चढ़ने में सफल हो सके. समिट विंडो उस समय को कहा जाता है जब मौसम चढ़ाई के प्रयास करने के लिए अनुकूल होता है. शेरपाओं का कहना है कि बेहतर लॉजिस्टिक्स और तकनीक ने भी चढ़ाई को सुरक्षित बनाया है. इसमें इंटरनेट तक पहुंच मिलना भी शामिल है.

हिमालय की करीब 8,849 मीटर ऊंची इस चोटी पर दो तरफ से चढ़ाई हो सकती है. एक- नेपाल की और से और दूसरा- चीनी नियंत्रण वाले तिब्बत की ओर से. इस साल चीन की ओर से चढ़ाई नहीं हुई है. नेपाल ने इस साल एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए 494 परमिट जारी किए थे. पर्वतारोहियों के साथ उतनी ही संख्या में शेरपा भी एवरेस्ट पर जाते हैं. इस साल कामी रीता शेरपा ने सबसे ज्यादा32वीं बार एवरेस्ट फतह करने का रिकॉर्ड अपने नाम किया है.

भारत दे सकता है दो अरब डॉलर से अधिक के सैन्य ड्रोन खरीदने का ऑर्डर

भारत सरकार इस साल घरेलू कंपनियों से दो अरब डॉलर से अधिक के सैन्य ड्रोन खरीदने का ऑर्डर दे सकती है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सरकार के साथ काम करने वाली संस्था 'ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया' (डीएफआई) के हवाले से यह जानकारी दी है. यह फेडरेशन 550 से अधिक ड्रोन कंपनियों का प्रतिनिधित्व करती है. इसके मुताबिक, यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा स्वदेशी ड्रोन खरीद सौदा हो सकता है.

रॉयटर्स के मुताबिक, डीएफआई के अध्यक्ष स्मित शाह ने बताया कि खरीद की यह योजना काफी आगे बढ़ चुकी है और 18 से 24 महीनों के भीतर ड्रोनों की डिलीवरी मिलने की उम्मीद है. उन्होंने बताया कि पहले ही सरकार 31.3 करोड़ डॉलर के रणनीतिक ड्रोन खरीदने का ऑर्डर दे चुकी है और अगले चरण में यह आंकड़ा दो अरब डॉलर को पार कर सकता है. उन्होंने कहा कि सेना की तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया के तहत ये ऑर्डर दिए जा सकते हैं.

हालिया सालों में वैश्विक और क्षेत्रीय संघर्षों ने सैन्य ड्रोन की मांग बढ़ा दी है. पिछले साल मई में पाकिस्तान के साथ हुए संघर्ष के दौरान दोनों पक्षों ने पहली बार बड़े पैमाने पर ड्रोनों का इस्तेमाल किया था. इस दौरान कम लागत वाले ड्रोनों की आक्रामक क्षमता सामने आई थी. रूस-यूक्रेन की जंग में भी बड़े पैमाने पर ड्रोनों का इस्तेमाल हो रहा है. ईरान भी अपने हमलों में अक्सर ड्रोनों का इस्तेमाल करता है. इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना भी अपनी ड्रोन शक्ति बढ़ा रही है.

जर्मनी में 5,500 करोड़ की ड्रग्स जब्त, स्पेन में दो गिरफ्तार

जर्मनी के शहर विल्हेल्म्सहावेन में सीमा शुल्क अधिकारियों ने हाल के वर्षों की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए एक शिपिंग कंटेनर से 8 टन से अधिक कोकीन जब्त की है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लगभग 50 करोड़ यूरो (करीब 5,557 करोड़ रुपये) आंकी गई है. यह रिकॉर्ड बरामदगी इसी साल फरवरी के महीने में की गई थी, लेकिन इस बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट से जुड़े तस्करों को पकड़ने और गोपनीय जांच जारी रहने के कारण अधिकारियों ने बुधवार, 3 जून को इसका औपचारिक खुलासा किया है.

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नशीले पदार्थों की यह खेप पश्चिमी अफ्रीका से एक कंटेनर के जरिए स्पेन भेजी जा रही थी, जिसके आधिकारिक दस्तावेजों में कोको बीन्स होने का दावा किया गया था. जर्मनी में चेकिंग के दौरान जब कस्टम अधिकारियों ने इस कंटेनर का एक्स-रे किया, तो उन्हें कई संदिग्ध चीजें नजर आईं. गहराई से जांच करने पर कोको बीन्स के बीच छिपाए गए काले प्लास्टिक से लिपटे 400 से अधिक पैकेट बरामद हुए, जिनमें से प्रत्येक में भारी मात्रा में कोकीन के ब्लॉक्स और अंतरराष्ट्रीय तस्करों द्वारा लोकेशन ट्रैक करने के लिए लगाए गए जीपीएस ट्रैकर्स मौजूद थे.

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इस बड़ी बरामदगी के बाद शुरू हुई अंतरराष्ट्रीय स्तर की जांच के तहत स्पेनिश पुलिस ने मई महीने में दो मुख्य संदिग्धों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है. पकड़े गए आरोपियों में से एक व्यक्ति स्पेन की एक इम्पोर्ट कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर है. फिलहाल दोनों देशों की जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि यूरोप और अफ्रीका में फैले इस विशाल ड्रग कार्टेल के पीछे और कौन से बड़े चेहरे शामिल हैं.

डीके शिवकुमार बने कर्नाटक के 34वें मुख्यमंत्री, सिद्धारमैया की जगह ली

कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने बुधवार, 3 जून को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. लोकभवन में हुए शपथग्रहण समारोह में उन्होंने भारत के संविधान को हाथ में लेकर पद की शपथ ली. उनके साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जी परमेश्वर ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली. इस समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए.

शिवकुमार कर्नाटक में कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में से एक हैं. वे लगातार आठ बार के विधायक हैं और साल 2020 से कर्नाटक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं. पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद उनकी इस पद पर ताजपोशी हुई है. सिद्धारमैया ने कांग्रेस हाईकमान के कहने पर 28 मई को अपना इस्तीफा सौंप दिया था. 29 मई को उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया और डीके शिवकुमार को कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया.

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, डीके शिवकुमार और जी परमेश्वर के बाद 12 अन्य नेताओं को भी मंत्रीपद की शपथ दिलवाई गई. इनमें पूर्व सीएम सिद्धारमैया के बेटे यतिंद्र सिद्धारमैया और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे भी शामिल हैं. इनके अलावा, एमबी पाटिल, रामलिंगा रेड्डी और शरण प्रकाश पाटिल आदि नेताओं को भी शपथ दिलवाई गई.

जर्मनी: यहूदी विरोधी टिप्पणी करने वाले होटल ने इस्राएली नागरिक से मांगी माफी

जर्मनी के बवेरिया क्षेत्र में स्थित एक होटल ने एक इस्राएली ग्राहक की ऑनलाइन बुकिंग को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि "हमारे होटल में यहूदियों को आने की अनुमति नहीं है." इस नस्लीय और आपत्तिजनक संदेश के सामने आने के बाद जर्मनी में बड़ा कूटनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. दक्षिण जर्मनी में इस्राएल की कॉन्सल जनरल ताल्या लादोर ने बुकिंग प्लेटफॉर्म का यह स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर साझा करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी और पूछा, "क्या हम वापस 1930 के नाजी काल में लौट आए हैं?"

चौतरफा आलोचनाओं से घिरने के बाद होटल के जूनियर डायरेक्टर आंद्रियास वोग्ल ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है. होटल प्रबंधन ने पीड़ित इस्राएली परिवार को एक माफीनामा भेजकर खुद को गैर-भेदभावपूर्ण साबित करने के लिए एक हफ्ते के मुफ्त प्रवास की पेशकश की है. इसके साथ ही होटल ने अपनी इस गलती की जानकारी बवेरियन स्टेट चांसलरी को भी लिखित रूप में दी है.

अक्टूबर 2023 के बाद से जर्मनी में युवा यहूदी क्यों पहले से ज्यादा सतर्क रहने लगे हैं?

होटल प्रबंधन ने अपनी सफाई में दावा किया है कि वे पिछले काफी समय से ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म्स पर बड़े पैमाने पर फर्जी बुकिंग और साइबर धोखाधड़ी (फिशिंग) के हमलों से जूझ रहे थे. इस विवाद के सार्वजनिक होने के बाद ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म 'बुकिंग डॉट कॉम' ने सख्त कार्रवाई करते हुए इस होटल को अपनी वेबसाइट से पूरी तरह हटा दिया है. दूसरी तरफ, होटल प्रबंधन का कहना है कि मामला बढ़ने के बाद से उन्हें लगातार आलोचनाओं और जान से मारने की धमकियों का सामना करना पड़ रहा है.

स्पेन में गर्मी ने तोड़ा रिकॉर्ड, मई महीने में दर्ज हुईं सबसे अधिक मौतें

यूरोप के कई हिस्सों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के बीच स्पेन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को बेहद चिंताजनक आंकड़े जारी किए हैं. सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, स्पेन में इस साल मई महीने में अत्यधिक तापमान के कारण रिकॉर्ड स्तर पर मौतें दर्ज की गई हैं, जो साल 2015 में इस तरह के रिकॉर्ड रखना शुरू होने के बाद से सबसे अधिक हैं.

इतना गर्म कैसे हो गया यूपी का बांदा जिला?

स्पेन के दैनिक मृत्यु दर निगरानी तंत्र के अनुमानों के मुताबिक, इस साल मई में उच्च तापमान की वजह से 101 लोगों की जान चली गई. स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बात पर विशेष चिंता जताई है कि यह आंकड़ा पिछले एक दशक के मई महीने के औसत से लगभग 3.6 गुना अधिक है. अधिकारियों का कहना है कि उत्तरी गोलार्ध में गर्मी का मौसम आधिकारिक रूप से शुरू होने से पहले ही अत्यधिक तापमान का स्वास्थ्य पर इतना गंभीर और घातक प्रभाव दिखना बेहद खतरनाक संकेत है.

निगरानी प्रणाली के ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2015 से 2025 के बीच स्पेन में भीषण गर्मी के कारण कुल 27,564 मौतें होने का अनुमान लगाया गया है. इस पूरी अवधि में साल 2022 अब तक का सबसे जानलेवा साल रहा था, जब गर्मी की वजह से 4,789 लोगों की मौत हुई थी, जिसके बाद पिछले साल 2025 में भी 3,832 लोगों ने दम तोड़ा था.

सेंट पीटर्सबर्ग में यूक्रेन का बड़ा ड्रोन हमला, तेल और सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना

रूस के दूसरे सबसे बड़े शहर सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम की शुरुआत के ठीक बीच यूक्रेन ने बुधवार को वहां कई ऊर्जा और सैन्य ठिकानों पर बड़ा ड्रोन हमला किया है. स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में शहर के बाहरी इलाकों में स्थित कई बुनियादी ढांचों को नुकसान पहुंचा है, हालांकि फिलहाल किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने चश्मदीदों के हवाले से बताया कि हमलों के बाद आसमान में काला धुआं उठता देखा गया.

यूक्रेनी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस हमले का मुख्य उद्देश्य रूस के इस हाई-प्रोफाइल आर्थिक सम्मेलन में खलल डालना था. 'रूस का दावोस' कहे जाने वाले इस वैश्विक मंच पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ-साथ जर्मनी की धुर दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) के सदस्यों के भी शामिल होने की उम्मीद है. यूक्रेन के इस बड़े कदम को रूस के आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव को सीधे चुनौती देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है.

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर एक जलते हुए तेल डिपो का वीडियो साझा करते हुए पुष्टि की कि उनके ड्रोनों ने सेंट पीटर्सबर्ग ऑयल टर्मिनल और क्रोनस्टैड सैन्य ठिकाने को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है. जेलेंस्की ने इन हमलों को कीव की भाषा में दूरगामी प्रतिबंध करार दिया, जिसका इस्तेमाल यूक्रेन रूसी तेल और गैस से जुड़े बुनियादी ढांचे पर सीधे हमलों के लिए करता है. उन्होंने कहा, "शांति को और करीब लाने के लिए यूक्रेन के दूरगामी प्रतिबंधों की योजना पर बिल्कुल वैसे ही अमल किया जा रहा है, जैसी जरूरत थी."

पश्चिम बंगाल में नेता प्रतिपक्ष पद को लेकर ममता बनर्जी को मिली चुनौती

ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर विवाद लगातार गहरा रहा है. टीएमसी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने बुधवार, 3 जून को नेता प्रतिपक्ष पद के लिए अपना दावा पेश किया. उन्होंने दावा किया कि पार्टी के 58 विधायक उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाने के समर्थन में हैं. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, उन्होंने विधायकों के हस्ताक्षरों वाला जो पत्र विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा है, उसमें पार्टी की नेता के तौर पर ममता बनर्जी का नाम अभी भी लिखा हुआ है.

इससे संकेत मिलता है कि ये विधायक अभी भी ममता बनर्जी को अपना नेता मानते हैं लेकिन नेता प्रतिपक्ष पद के लिए उनकी पसंद से सहमत नहीं हैं. ममता बनर्जी ने इस पद के लिए शोभनदेब चटोपाध्याय का नाम सामने रखा है. इसका विरोध कर रहे विधायकों ने विधानसभा स्पीकर को पत्र सौंपकर ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष और संदीपन साहा, जावेद अहमद खान, सेउली साहा और सबीना यास्मीन को उप-नेता प्रतिपक्ष बनाने की मांग की है.

इस घटनाक्रम की वजह से टीएमसी में टूट होने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं. हालिया विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने 80 सीटें जीती थीं और इनमें से 58 विधायक कथित तौर पर ऋतब्रत बनर्जी का समर्थन कर रहे हैं. अगर ये सभी विधायक टीएमसी से अलग हो जाते हैं तब भी इन पर दलबदल कानून लागू नहीं होगा क्योंकि इनकी संख्या कुल विधायकों के दो तिहाई से अधिक है. इससे पहले महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी पार्टी में भी इसी तरह की टूट हो चुकी है.

जर्मनी में 2025 में रिकॉर्ड 3.32 लाख से अधिक लोगों को मिली नागरिकता

जर्मनी ने पिछले वर्ष (2025) रिकॉर्ड 332,500 प्रवासियों को अपने देश की नागरिकता प्रदान की है, जो उससे पिछले साल के मुकाबले 14 प्रतिशत अधिक है. संघीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, नागरिकता हासिल करने वालों में लगातार पांचवें साल सीरियाई मूल के लोग सबसे बड़ा समूह रहे. साल 2025 में जर्मन पासपोर्ट हासिल करने वाले हर पांच में से एक व्यक्ति सीरिया से था. इनमें से अधिकांश 2015 और 2016 के शरणार्थी संकट के समय जर्मनी आए थे और अब नागरिकता के पात्र बन चुके हैं.

इस उछाल के पीछे मुख्य वजह जून 2024 में जर्मन सरकार द्वारा नागरिकता कानून में किए गए बड़े सुधार हैं. इन नए नियमों के तहत जर्मनी में रहने की अनिवार्य अवधि को 8 साल से घटाकर केवल 5 साल कर दिया गया था, साथ ही प्रवासियों को अपनी मूल नागरिकता छोड़े बिना दोहरी नागरिकता रखने की अनुमति भी दी गई थी. इन सहूलियतों के कारण आवेदन प्रक्रिया में तेजी आई और रिकॉर्ड संख्या में लोगों को जर्मन पासपोर्ट जारी किए गए.

आंकड़ों के अनुसार, सीरिया के बाद जर्मन नागरिकता पाने वालों में तुर्की के लोग दूसरे और रूसी नागरिक तीसरे स्थान पर रहे. इसके अलावा, बोस्निया, अमेरिका और अल्बानिया के प्रवासियों की संख्या में भी पिछले साल की तुलना में भारी बढ़त देखी गई है. वहीं, नाजी शासन के दौरान अपनी नागरिकता गंवाने वाले यहूदियों और उनके वंशजों को 'पुनर्स्थापन कानूनों' के तहत दोबारा नागरिकता देने के मामलों में भी 61 प्रतिशत की बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है.

पद्म श्री पुरस्कारों में जर्मन विद्वान भी शामिल

ब्रिटेन में छात्र की हत्या के मामले में हिंसक प्रदर्शन, पुलिस पर लगा 'एंटी-व्हाइट' होने का आरोप

दक्षिणी इंग्लैंड के साउथेम्प्टन शहर में एक 18 वर्षीय ब्रिटिश छात्र हेनरी नोवाक की हत्या के मामले को लेकर बड़े पैमाने पर हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में 'श्वेत-विरोधी' (एंटी-व्हाइट) रवैया अपनाया, जिसके कारण घायल छात्र की जान समय पर नहीं बचाई जा सकी. यह बवाल तब और बढ़ गया जब सोमवार को अदालत ने हेनरी के हत्यारे विक्रम दिगवा को उम्रकैद की सजा सुनाई, जिसके तुरंत बाद सैकड़ों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और दंगा नियंत्रण पुलिस पर पत्थरों, कुर्सियों और फ्लेयर्स से हमला कर दिया.

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तनाव को हवा देने में पुलिस का एक बॉडी कैम वीडियो मुख्य वजह बना, जो हाल ही में सार्वजनिक हुआ है. 3 दिसंबर 2025 को हुई इस वारदात के वीडियो में दिख रहा है कि जमीन पर घायल पड़े हेनरी नोवाक तड़पते हुए लगातार कह रहे थे कि उन्हें चाकू मारा गया है और वह सांस नहीं ले पा रहे हैं. इसके बावजूद मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनकी बात पर भरोसा नहीं किया और हत्यारे के झूठे आरोपों के आधार पर मरते हुए हेनरी को ही हथकड़ी लगा दी. जब तक पुलिस को उसकी गंभीर चोटों का अहसास हुआ और हथकड़ी खोली गई, तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

अदालत में सुनवाई के दौरान हत्या के आरोपी विक्रम दिगवा ने दावा किया था कि हेनरी ने उसकी पगड़ी गिराकर नस्लीय दुर्व्यवहार किया था, जिसके जवाब में उसने अपने कृपाण का इस्तेमाल किया. हालांकि, जज ने इस दावे को पूरी तरह मनगढ़ंत बताते हुए खारिज कर दिया. इस मामले में हत्या के हथियार को छिपाने के आरोप में विक्रम की मां किरन कौर को भी दोषी ठहराया गया है, जिन्हें 17 जुलाई को सजा सुनाई जाएगी.

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स्पेन की राजकुमारी ने लगाई पैराशूट से छलांग, पूरा किया सैन्य प्रशिक्षण

स्पेन के शाही तख्त की उत्तराधिकारी, राजकुमारी लियोनोर ने देश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित मुर्सिया के मिलिट्री पैराशूटिंग स्कूल में अपना बुनियादी पैराट्रूपर प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. मैड्रिड में रॉयल हाउसहोल्ड द्वारा मंगलवार को की गई घोषणा के अनुसार, 20 वर्षीय लियोनोर ने इस कठिन ट्रेनिंग के दौरान कई सफल छलांगें लगाईं. इनमें मई महीने में लगाई गई एक नाइट जंप भी शामिल थी. इस उपलब्धि के साथ ही उन्होंने 50 अन्य कैडेटों के साथ प्रतिष्ठित "काजादोर पैराकैडिस्टा" बैज और डिप्लोमा हासिल कर इतिहास रच दिया है.

यह पैराशूटिंग कोर्स राजकुमारी लियोनोर के 'जनरल एकेडमी ऑफ एयरोनॉटिक्स एंड एस्ट्रोनॉटिक्स' में चल रहे सैन्य प्रशिक्षण का एक अहम हिस्सा था, जहां वे वर्तमान में ऑफिसर ट्रेनिंग के अपने तीसरे और अंतिम वर्ष में हैं. किंग फेलिप छठवें और क्वीन लेतिजिया की बेटी होने के नाते, लियोनोर स्पेन के सिंहासन की अगली कतार में हैं. भविष्य में जब वे देश की कमान संभालेंगी, तो वे स्पेनिश सशस्त्र बलों की कमांडर-इन-चीफ भी बनेंगी.

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राजकुमारी लियोनोर ने अपने सैन्य करियर की शुरुआत महज 17 साल की उम्र में की थी, जिसके बाद वे कई महीनों की प्रशिक्षण यात्रा के लिए नौसेना में शामिल हुईं. पिछले साल सितंबर से वे वायुसेना में तैनात हैं और इस दौरान वे अपनी पहली सोलो फ्लाइट भी पूरी कर चुकी हैं.

इस्राएल और लेबनान के बीच आज वॉशिंगटन में फिर शुरू होगी उच्च स्तरीय वार्ता

मध्य पूर्व में जारी तनाव को कम करने के लिए इस्राएल और लेबनान के बीच बुधवार को अमेरिकी विदेश मंत्रालय में एक बेहद महत्वपूर्ण बातचीत फिर से शुरू होने जा रही है. सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक में इस्राएल और लेबनान दोनों देशों का प्रतिनिधित्व अमेरिका में तैनात उनके राजदूत करेंगे. यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब सोमवार को ही अमेरिकी मध्यस्थता में एक आंशिक संघर्ष विराम की घोषणा की गई थी, लेकिन इसके बावजूद जमीनी स्तर पर हमले पूरी तरह नहीं थमे हैं.

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इस कूटनीतिक प्रयास के बीच भी इस्राएल ने मंगलवार को दक्षिणी लेबनान के कई शहरों पर अपने हवाई हमले जारी रखे. सोमवार को इस्राएली नेतृत्व द्वारा बेरूत के दक्षिणी इलाके दहियाह पर बमबारी के आदेश दिए जाने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई थी. हालांकि युद्ध के शुरुआती दौर में इस्राएल ने दहियाह पर भारी बमबारी की थी, लेकिन अप्रैल में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा लेबनान संघर्ष विराम की घोषणा किए जाने के बाद से वहां केवल दो ही हमले हुए थे. मंगलवार के इस नए हमले के बाद ट्रंप ने इस्राएली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू को फोन किया.

इस पूरे क्षेत्रीय विवाद में ईरान का रुख भी बेहद अहम बना हुआ है. तेहरान लगातार इस बात पर अड़ा है कि लेबनान को भी इस व्यापक संघर्ष विराम समझौते का हिस्सा बनाया जाना चाहिए. ईरान का मानना है कि लेबनान में शांति होने के बाद ही होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नाकेबंदी को हटाने के लिए आगे की बातचीत का रास्ता साफ हो सकेगा.

दिल्ली की एक इमारत में भीषण आग लगने से 20 से अधिक लोगों की मौत

नई दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में एक इमारत में भीषण आग लगने से कई लोगों की मौत हो गई. न्यूज एजेंसी एएनआई ने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि इस हादसे में 20 से अधिक लोगों की मौत हो गई और 40 से अधिक लोगों को बचा लिया गया. इस इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर एक रेस्तरां संचालित हो रहा था, जबकि ऊपरी मंजिलों पर लोग रह रहे थे. आग पूरी बुझाई जा चुकी है लेकिन आग लगने की वजह तुरंत पता नहीं चल सकी है.

न्यूज एजेंसी एपी ने स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के हवाले से बताया है कि कुछ पीड़ित विदेशी नागरिक थे, जो इलाज करवाने के लिए भारत आए थे. कई विदेशी मरीज इलाज के लिए नई दिल्ली आते हैं और अक्सर इलाज के दौरान आस-पास के होटलों या घरों में रुकते हैं. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, आग की चपेट में आई इस इमारत की ऊपरी मंजिलों को होटल-कम-गेस्ट हाउस के तौर पर संचालित किया जा रहा था.

एक प्रत्यक्षदर्शी शेर खान ने एएनआई को बताया कि शुरुआत में छोटी आग लगी थी, जो बाद में बढ़ती चली गई. उन्होंने कहा कि जब आग से बचने का कोई रास्ता नहीं बचा तो लोगों ने जमीन पर गद्दे बिछा दिए और एक महिला एक छोटे बच्चे को लेकर तीसरी मंजिल से कूद गई. शेर खान ने कहा कि उस महिला का पैर गंभीर रूप से चोटिल हो गया. उन्होंने कहा कि इसके बाद कई और लोग भी ऊपरी मंजिलों से कूद गए.