बेंगलुरु, 14 फरवरी ‘एयरो इंडिया 2025’ के अंतिम दिन शुक्रवार को दर्शकों को हवाई करतबों का बेहतरीन नजारा देखने को मिला।
सुबह 10.30 बजे से शुरू हुए शो में रूसी विमान एसयू-57 और अमेरिकी एफ-16, हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड (एचएएल) के एलयूएच, एचटीटी-40, एलसीए एमके-1ए और आईजेटी समेत 10 विमानों ने करतब दिखाए।
भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के एसयू-30 एमकेआई और प्रसिद्ध सूर्य किरण एरोबैटिक टीम (एसकेएटी), राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशाला (एनएएल) के हंसा और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के एफटीबी द्वारा संचालित नौ विमान (एचएडब्ल्यूके) भी प्रदर्शन में शामिल थे।
दोपहर 2.30 बजे अंतिम हवाई प्रदर्शन में भी 10 विमान शामिल थे। इसमें अमेरिकी एफ-16 के स्थान पर अमेरिकी विमान, केसी-135 को शामिल किया गया।
प्रदर्शन में शामिल कंपनियों के प्रतिनिधियों ने आयोजन की सराहना की।
बोइंग कंपनी के बिजनेस कम्युनिकेशंस के वरिष्ठ प्रबंधक सिद्धांत सिंह चौहान ने कहा कि वह रोमांचित हैं क्योंकि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उद्घाटन के दिन बोइंग स्टॉल पर आए थे।
चौहान ने कहा कि वह बोइंग की एआई-संचालित प्रस्तुति को मिली प्रतिक्रिया से भी खुश हैं। ‘साइंस-फिक्शन’ फिल्म के किसी दृश्य की तरह, लोगों ने सेंसर-सक्रिय पारदर्शी स्क्रीन पर बोइंग के उत्पादों के बारे में जाना।
लातविया स्थित सॉफ्टवेयर और विमान डिजाइन कंपनी फिक्सर के सीईओ और संस्थापक वसीली फेनवेट्स ने कहा कि उन्हें हैदराबाद स्थित अक्सी एयरोस्पेस ग्रुप में एक आदर्श साझेदार मिला है।
फेनवेट्स ने कहा कि भागीदार की मदद से वह अपने 'लक्जरी' ड्रोन फिक्सर-007 का उत्पादन बढ़ाने में सक्षम हो सकेंगे, जिससे उन्हें लागत प्रभावी ढंग से मूल्य निर्धारण का लाभ मिलेगा।
बेंगलुरु स्थित लॉजिस्टिक्स और निगरानी ड्रोन निर्माता स्कैंड्रोन के संस्थापक और सीईओ अर्जुन नाइक ने एयरो इंडिया 2025 के दौरान 200 किलोग्राम क्षमता वाला अपना लॉजिस्टिक ड्रोन पेश किया।
वहीं, सैन्य पोशाकों और एसकेएटी स्मृति चिह्नों को प्रदर्शित करने वाले स्टॉल आखिरी दिन भी खचाखच भरे रहे।
पहले तीन दिन उद्योग जगत के दर्शकों के लिए थे जबकि बृहस्पतिवार और शुक्रवार को आयोजन आम जनता के लिए खुला था।
विदेशी मेहमानों, रक्षा मंत्रियों और सेना प्रमुखों सहित 84 देशों के 500 से अधिक प्रतिनिधियों ने एयरो इंडिया 2025 में भाग लिया। यह द्विवार्षिक शो एशिया का सबसे बड़ा शो बन गया है। इस साल 931 प्रदर्शक शामिल हुए, जिनमें 782 भारतीय शामिल थे। इसमें 58 मूल उपकरण निर्माता (ओईएम) और 115 वैश्विक सीईओ भी शामिल थे।
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