देश की खबरें | भोपाल त्रासदी: न्यायालय का पीथमपुर में कचरे के निपटान पर केंद्र, मध्यप्रदेश सरकार से जवाब तलब

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नयी दिल्ली, 17 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के खतरनाक अपशिष्ट का इंदौर के पास पीथमपुर में निपटान किए जाने के मामले में केंद्र, मध्यप्रदेश सरकार और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से सोमवार को जवाब तलब किया।

बंद हो चुके यूनियन कार्बाइड कारखाने के लगभग 377 टन खतरनाक कचरे को धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया गया है, जो भोपाल से लगभग 250 किलोमीटर और इंदौर से तकरीबन 30 किलोमीटर दूर है।

शीर्ष अदालत ने स्वास्थ्य का अधिकार और इंदौर शहर सहित आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सेहत को खतरे जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाने वाली याचिका पर संज्ञान लिया।

वर्ष 1984 में दो-तीन दिसंबर की दरमियानी रात को यूनियन कार्बाइड कारखाने से अत्यधिक जहरीली गैस मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) का स्राव हुआ, जिससे 5,479 लोगों की मौत हो गई और पांच लाख से ज्यादा लोग अपंग हो गए। भोपाल गैस त्रासदी को दुनिया की सबसे भयानक औद्योगिक आपदाओं में से एक माना जाता है।

न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के तीन दिसंबर 2024 और छह जनवरी 2025 के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई।

उच्च न्यायालय ने दिसंबर 2024 के अपने आदेश में शीर्ष अदालत के निर्देशों के बावजूद भोपाल में यूनियन कार्बाइड कारखाना स्थल को खाली न करने को लेकर प्राधिकारियों को फटकार लगाई थी और वहां मौजूद अपशिष्ट हटाने के लिए चार हफ्ते की समय-सीमा निर्धारित की थी।

उच्च न्यायालय ने कहा था कि गैस त्रासदी के 40 साल बाद भी प्राधिकारी “निष्क्रियता की स्थिति” में हैं। उसने आदेश का पालन न होने पर सरकार के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने की चेतावनी दी थी।

एक अधिकारी ने बताया कि एक जनवरी की रात को 12 सीलबंद कंटेनर ट्रक के जरिये जहरीले कचरे को निपटान के लिए ले जाने का काम शुरू हुआ।

भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के निदेशक स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि शुरुआत में कुछ कचरे को पीथमपुर स्थित अपशिष्ट निपटान इकाई में जलाया जाएगा और अवशेष (राख) की जांच कर यह पता लगाया जाएगा कि उसमें कोई हानिकारक तत्व तो नहीं बचा है।

सिंह के मुताबिक, भट्टी से निकलने वाला धुआं चार-परत वाले विशेष फिल्टरों से होकर गुजरेगा, ताकि आसपास की हवा प्रदूषित न हो।

अधिवक्ता सर्वम रीतम खरे के माध्यम से शीर्ष अदालत में दायर याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता चिन्मय मिश्रा पीथमपुर में 337 टन खतरनाक रासायनिक कचरे के निपटान के अधिकारियों के फैसले से चिंतित हैं।

शीर्ष अदालत ने याचिका का संज्ञान लेते हुए केंद्र, मध्यप्रदेश सरकार और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किए तथा मामले को एक हफ्ते बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

याचिका में दावा किया गया है कि निपटान स्थल से एक किलोमीटर के दायरे में कम से कम चार-पांच गांव स्थित हैं।

इसमें आरोप लगाया गया है, “इन गांवों के निवासियों का जीवन और स्वास्थ्य अत्यधिक खतरे में है।”

याचिका में कहा गया है, “इस बात का जिक्र करना उचित है कि गंभीर नदी कचरा निपटान स्थल के बगल से बहती है और ‘यशवंत सागर बांध’ को पानी उपलब्ध कराती है।”

इसमें कहा गया है कि यह बांध इंदौर की 40 फीसदी आबादी को पेयजल की आपूर्ति करता है।

याचिका में दावा किया गया है, “प्रतिवादियों की घोर लापरवाही, तैयारी के अभाव और अस्पष्टता के कारण हजारों लोगों का जीवन खतरे में है।”

इसमें कहा गया है कि मामले में सर्वोच्च न्यायालय के विचारार्थ कई कानूनी प्रश्न उठते हैं।

याचिका में उठाए गए कानूनी प्रश्नों में से एक के अनुसार, “क्या पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना घनी आबादी वाले क्षेत्रों में खतरनाक रासायनिक कचरे के निपटान की अनुमति देकर संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जीवन के मौलिक अधिकार का उल्लंघन किया जा रहा है, जिसमें स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार भी शामिल है?”

याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्राधिकारियों ने इंदौर और धार जिले के प्रभावित लोगों को स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में सूचित नहीं किया या स्वास्थ्य संबंधी सलाह जारी नहीं की, जिससे उनकी सुनवाई के अधिकार और स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है।

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