देश की खबरें | भारत में स्कूल स्तर पर बच्चों को रोजगारपर शिक्षा में आ रही हैं बाधाएं: डब्ल्यूईएफ रिपोर्ट

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारत में विद्यार्थियों को स्कूल स्तर पर ही रोजगार के लिए तैयार करने की प्रक्रिया में बड़ी बाधा आ रही है। समन्वय की कमी की वजह से छिटपुट कौशल विकास प्रणाली स्थापित हुई है जो अधिकतम क्षमता हासिल नहीं कर पा रही है। यह दावा विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की रिपोर्ट में किया गया है।

नयी दिल्ली, सात अक्टूबर भारत में विद्यार्थियों को स्कूल स्तर पर ही रोजगार के लिए तैयार करने की प्रक्रिया में बड़ी बाधा आ रही है। समन्वय की कमी की वजह से छिटपुट कौशल विकास प्रणाली स्थापित हुई है जो अधिकतम क्षमता हासिल नहीं कर पा रही है। यह दावा विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की रिपोर्ट में किया गया है।

‘शिक्षा 4.0 रिपोर्ट’ शीर्षक इस रिपोर्ट में इस बात को वर्णित किया गया है कि कैसे डिजिटल और अन्य प्रौद्योगिकी से सीखने के अंतर को पाटा जा सकता है और शिक्षा तक सभी की पहुंच बनाई जा सकती है। यह रिपोर्ट डब्ल्यूईएफ की ‘‘शिक्षा 4.0 भारत पहल’’ के तहत जारी की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘‘ भारत में छह करोड़ से अधिक माध्यमिक और उच्च माध्यमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले विद्यार्थी हैं, लेकिन 85 प्रतिशत स्कूलों के पाठ्यक्रम में अब भी व्यावसायिक पाठ्यक्रम लागू नहीं किया जा सका है।’’

स्कूलों में ही विद्यार्थियों को रोजगार के लिए तैयार करने की प्रक्रिया को ‘स्कूल से कार्य परिवर्तन’ या एस2डब्ल्यू के तौर पर उल्लेख किया जाता है।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘एस2डब्ल्यू ट्रांजिशन प्रक्रिया प्रशिक्षकों की कमी, अपर्याप्त संसाधन और अवसंरचना, स्कूलों के मुख्य पाठ्यक्रम से लचर समन्वय, स्थानीय कौशल अंतर और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के बीच संबंध की कमी जैसी प्रमुख बाधाओं का सामना कर रहा है।’’

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘ समन्यवित कोशिश के अभाव में कौशल विकास का वातावरण छिटपुट स्तर पर तैयार हुआ है और यह पूरी क्षमता का दोहन करने में सफल नहीं है।’’

डब्ल्यूईएफ ने रेखांकित किया कि कई विद्यार्थी और अभिभावक मानते हैं कि व्यावसायिक शिक्षा, मुख्य धारा की शिक्षा के मुकाबले दूसरा बेहतर विकल्प है।

रिपोर्ट में कहा गया कि मौजूदा स्कूल अध्यापन प्रणाली में उद्योगों की जरूरतों का कोई संदर्भ नहीं है और इसलिए उद्योगों की हिस्सेदारी के लिए कोई औपचारिक व्यवस्था नहीं है।

इसमें कहा गया, ‘‘ औपचारिक और अनौपचारिक शिक्षा वर्ग के बीच क्रेडिट स्थानांतरित नहीं किया जा सकता, इसकी वजह से विद्यार्थी जो व्यावसायिक पाठ्यक्रम करने के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं वे इन क्रेडिट को जोड़ने में मुश्किल का सामना करते हैं। यह विद्यार्थियों को निरंतरता के साथ दोनों वर्गों में पढ़ाई करने से हतोत्साहित करता है।’’

गौरतलब है कि शिक्षा 4.0 भारत पहल को मई 2020 में शुरू किया गया था और इसमें शिक्षा प्रौद्योगिकी, सरकार, शैक्षणिक और स्टार्टअप समुदाय के करीब 40 साझेदार समन्वय करते हैं।

यह रिपोर्ट विश्व आर्थिक मंच, संयुक्त राष्ट्र बाल शिक्षा कोष (यूनीसेफ) और युवाह (जेनरेशन अनलिमिटेड इंडिया) के समन्वय से तैयार की जाती है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\