नयी दिल्ली, 28 नवंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि बैंकों को पुलिस की साइबर शाखा द्वारा मांगी गयी सूचनाओं पर तत्परता से जवाब देना चाहिए। साथ ही, न्यायालय ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से बताने को कहा कि क्या पुलिस या अदालतों द्वारा जारी किये गये आदेशों के अनुपालन के संबंध में बैंकों के लिए कोई दिशानिर्देश है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने निर्दोष ग्राहकों की ठगी से संबंधित फर्जी लेन-देन की घटनाओं पर कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कई बैंकों को वह प्रक्रिया भी अदालत के सामने रखने को कहा जिसका वे जांच एजेंसी द्वारा पूछे गये सवालों का जवाब देने में पालन करते हैं।
उच्च न्यायालय ने मंगलवार को जारी किये गये आदेश में कहा, ‘‘ यह स्पष्ट किया जाता है कि जब कभी पुलिस की साइबर अपराध शाखा द्वारा किसी सूचना के बारे में अनुरोध किया जाता है तो बैंकों को तत्परता से उसका जवाब देना चाहिए।’’
एकल पीठ ने कहा, ‘‘आरबीआई एक विशिष्ट हलफनामा दाखिल करे और यह बताए कि बैंकों से पुलिस द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्नों/मांगी गयी सूचना तथा पुलिस या अदालत से जारी आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित करने के संबंध में उसने क्या कोई दिशानिर्देश जारी किया है।’’
उच्च न्यायालय ने यह आदेश तब दिया जब दिल्ली पुलिस के वकील ने कहा कि कई मामलों में देखा गया कि पुलिस या अदालत से जारी आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए जब एजेंसी (पुलिस) सवाल पूछती है तो बैंक उसका जवाब नहीं देते हैं।
वकील ने यह भी कहा कि कई मामलों में आखिरी आरोपी पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र जैसे विभिन्न राज्यों में होते हैं और ऐसे में दिल्ली पुलिस की साइबर अपराध शाखा के लिए उन राज्यों में इन मामलों में मुकदमा चला पाना कठिन हो जाता है।
न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि ‘‘सभी पुलिस प्रशासनों की साइबर अपराध शाखाओं के बीच कुछ तालमेल तो जरूरी ही है’’, ऐसे में केंद्र को निर्देश है कि वह ऐसी शाखाओं की एक बैठक बुलाये।
अदालत ने आदेश में कहा, ‘‘ गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव ऐसे फर्जी लेन-देन के मामलों से निपटने के लिए कुछ तालमेल के लिए विभिन्न राज्यों की साइबर अपराध शाखाओं की 20 दिसंबर, को तीन बजे एक बैठक बुलाएं।’’
मामले की अगली सुनवाई एक फरवरी को होगी।
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