देश की खबरें | मुक्केबाजी महासंघ के मामलों के लिए विशेष समिति बनाने के फैसले पर रोक

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) द्वारा भारतीय मुक्केबाजी महासंघ के कामकाज को देखने के लिए एक विशेष समिति गठित करने के फैसले पर सोमवार को रोक लगा दी।

नयी दिल्ली, तीन मार्च दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) द्वारा भारतीय मुक्केबाजी महासंघ के कामकाज को देखने के लिए एक विशेष समिति गठित करने के फैसले पर सोमवार को रोक लगा दी।

न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने आईओए को नोटिस जारी कर महासंघ द्वारा विशेष समिति गठित करने के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका पर तलब किया है।

अदालत ने आईओए को याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया तथा सुनवाई 27 मार्च के लिए निर्धारित की।

यह अंतरिम आदेश बिहार ओलंपिक संघ के मामले में उच्च न्यायालय के फैसले को ध्यान में रखते हुए किया गया, जिसमें राज्य संस्था के मामलों की जांच के लिए एक विशेष समिति गठित करने के आईओए के फैसले को रद्द कर दिया गया था।

बिहार ओलंपिक संघ के मामले में फैसला देते हुए उच्च न्यायालय ने कहा था कि आईओए के अध्यक्ष को किसी राज्य संघ के मामलों को एकतरफा रूप से अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है तथा विशेष निकाय बनाने का प्रस्ताव संघ की आम सभा के क्षेत्राधिकार में है।

मुक्केबाजी महासंघ के अधिवक्ता ने दलील दी कि महासंघ के मामलों के प्रबंधन के लिए विशेष समिति नियुक्त की गई और 24 फरवरी का आदेश बिना किसी पूर्व सूचना के एकतरफा पारित किया गया जो कि नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन है।

उन्होंने कहा कि आईओए अध्यक्ष के पास विशेष समिति गठित करने का अधिकार नहीं है।

आईओए के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि इस मुद्दे के सौहार्दपूर्ण समाधान के वास्ते सात मार्च को उसके अध्यक्ष और भारतीय मुक्केबाजी महासंघ के अधिकारियों के बीच बैठक निर्धारित है।

आईओए ने 24 फरवरी को महासंघ द्वारा समय पर चुनाव कराने में विफलता का हवाला देते हुए उसके कामकाज को देखने के लिए पांच सदस्यीय विशेष समिति का गठन किया था।

उच्च न्यायालय ने 24 फरवरी के अपने फैसले में आईओए अध्यक्ष पी टी उषा के एक जनवरी के आदेश को खारिज कर दिया था जिसमें बिहार ओलंपिक संघ के मामलों की देखभाल के लिए एक विशेष समिति गठित करने का आदेश दिया गया था।

अदालत ने याचिकाकर्ता को तीन महीने के भीतर चुनाव कराने का निर्देश दिया और कहा कि ऐसा न करने पर आईओए उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।

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