नयी दिल्ली, 30 सितंबर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और रामजन्मभूमि आंदोलन की अगुवाई करने वाले उसके आनुषांगिक संगठन विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत द्वारा सभी आरोपियों को बरी किए जाने का बुधवार को स्वागत किया।
दोनों भगवा संगठनों ने अलग-अलग बयान जारी कर देशवासियों से समाज में परस्पर विश्वास व सौहार्द के साथ एकजुट होकर भावी चुनौतियों से निपटने और संगठित व विकसित भारत के निर्माण के लिए काम करने की अपील की।
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आरएसएस के सरकार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी ने कहा, ‘‘सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा विवादास्पद ढांचे के विध्वंस मामले में आरोपित सभी दोषियों को ससम्मान बरी करने के निर्णय का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्वागत करता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इस निर्णय के उपरांत समाज के सभी वर्गों को परस्पर विश्वास और सौहार्द के साथ एकजुट होकर देश के सामने आने वाली चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करते हुए राष्ट्र को प्रगति की दिशा में ले जाने के कार्य में जुट जाना चाहिए।’’
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मालूम हो कि आरएसएस और विश्व हिन्दू परिषद ने राम मंदिर आंदोलन को देश भर में खड़ा करने में व्यापक भूमिका निभाई थी।
सीबीआई की विशेष अदालत ने छह दिसम्बर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले में बुधवार को बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाते हुए सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया।
इस मामले में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह सहित कुल 32 आरोपी थे।
विहिप ने अदालत के फैसले को ‘‘सत्य और न्याय’’ की जीत बताते हुए कहा कि इस निर्णय ने षड्यंत्र के आरोपों को ध्वस्त कर दिया।
विहिप के कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा, ‘‘सत्य और न्याय की विजय हुई है। हालांकि, न्यायालयों को यह निर्णय देने में 28 वर्ष लग गये। हम आशा करते हैं कि इस निर्णय से उन विषयों का पटाक्षेप हो जायेगा जो गत 472 वर्षों से हिन्दू मानस को व्यथित करते रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि ‘‘राम भक्तों’’ ने इन ‘‘झूठे मुकदमों’’ का 28 वर्ष तक धैर्य और साहस से सामना किया।
उन्होंने बताया कि इस मामले में 49 प्राथमिकी थीं, अभियोजन ने 351 गवाह पेश किये और लगभग 600 दस्तावेज न्यायालय में दिए गये। मुकदमे को सुन रहे न्यायाधीश का कार्यकाल, उनके सेवानिवृत होने के बाद भी कई बार बढ़ाना पड़ा और तब जाकर यह फैसला आ पाया है।
उन्होंने कहा, ‘‘आज के निर्णय ने षड्यंत्र के आरोपों को ध्वस्त कर दिया है। अब समय है कि हम राजनीति से ऊपर उठें, और बार-बार पीछे देखने की बजाय एक संगठित और विकसित भारत के निर्माण के लिए आगे बढ़ें।’’
उन्होंने कहा कि भारतीय समाज को अब अपना ध्यान आगे आने वाले कार्यों की ओर लगाना है।
कुमार ने कहा, ‘‘हमें ऐसा सशक्त भारत बनाना है जो अपने अन्दर के और सीमाओं पर की चुनौतियों का सफलता से सामना कर सके।’’
उन्होंने कहा कि विहिप एक बार फिर अपने आप को श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण, सामाजिक ऊंच-नीच को दूर करके समरस समाज की स्थापना, अनुसूचित जाति-जनजाति और आर्थिक रूप से पिछड़े अन्य वर्गों की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक उन्नति के लिए समर्पित करती है।
उन्होंने कहा, ‘‘साथ ही विहिप मंदिर और उनकी सम्पत्तियों की रक्षा और मंदिरों की आय, धर्म एवं समाज हित के कार्यों के लिए ही व्यय होने के लिए भी अपना संघर्ष सतत जारी रखेगी।’’
इस मामले में प्रारंभ में जिन 49 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था उनमें अशोक सिंघल, महंत अवैद्यनाथ, परमहंस रामचन्द्र दास, विजया राजे सिंधिया, आचार्य गिरिराज किशोर, बाल ठाकरे, विष्णुहरि डालमिया और वैकुण्ठ लाल शर्मा (प्रेम जी) शामिल थे।
इन सभी दिवंगत नेताओं को भी आज के अवसर पर याद करते हुए विहिप ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
ज्ञात हो कि विहिप ने राम मंदिर निर्माण आंदोलन के जरिए जनसमर्थन जुटाने का काम किया था। इसमें अशोक सिंघल की अहम भूमिका रही। वे 2011 तक विहिप के अध्यक्ष रहे और फिर स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। उनका निधन 17 नवंबर 2015 को हुआ।
विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश एस के यादव ने फैसला सुनाते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना पूर्व नियोजित नहीं थी, यह एक आकस्मिक घटना थी। उन्होंने कहा कि आरोपियों के खिलाफ कोई पुख्ता सुबूत नहीं मिले, बल्कि आरोपियों ने उन्मादी भीड़ को रोकने की कोशिश की थी।
ब्रजेन्द्र
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