गुवाहाटी, 26 जुलाई माता-पिता द्वारा नाबालिग बच्चों की जानकारी ऑनलाइन साझा करने के खतरों पर असम ने जागरूकता अभियान शुरू किया है और कृत्रिम मेधा (एआई) से निर्मित चार बच्चे इस अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं।
असम पुलिस ने बच्चों की जानकारियों को ऑनलाइन साझा करने के खतरों से आगाह करने के लिये शुरू किये गये जागरूकता अभियान के लिये इन चारों को हाल ही में ‘‘भर्ती’’ किया है। पुलिस का मकसद इस अभियान के माध्यम से बच्चों की तस्वीरें और उनकी निजी जानकारियों को शोसल मीडिया पर साझा करने (शेयरेंटिंग) से माता-पिता को रोकना है।
पुलिस के विशेष महानिदेशक हरमीत सिंह ने बताया इन चारों ‘बच्चों’ का निर्माण एआई के माध्यम से किया गया है, जिनका इस्तेमाल पुलिस लोगों को आकर्षित करने के लिये अपने अभियान में कर रही है।
इस अभियान की अगुवाई करने वाले सिंह ने कहा, ‘‘हमने बच्चों की जानकारी आनलाइन साझा करने के खिलाफ इस जागरूकता अभियान की शुरूआत की थी। चूंकि एआई अब प्रचलन में है, इसलिए हमने इसका उपयोग करने के बारे में सोचा और इसने सभी का ध्यान आकर्षित किया है। हम जागरूकता संदेश फैलाने के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं।’’
असम पुलिस अपने अभियान में पॉप संस्कृति, मीम्स, हास्य, आधुनिक मुहावरों का उपयोग साधन के रूप में कर रही है, जो माता-पिता से आग्रह करता है कि वे अपने बच्चों को ‘‘सोशल मीडिया ट्रॉफी’’ न बनाएं क्योंकि इससे विभिन्न स्तरों पर संभावित खतरे पैदा हो सकते हैं।
इस बात को समझाने के लिए अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘‘शहंशाह’’ के पोस्टर का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके लिये नर्सरी राइम्स का भी इस्तेमाल किया जा रहा है ।
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