नयी दिल्ली, 17 अगस्त बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने से पहले सोमवार को अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल की सहमति मांगी गई। अयोध्या में रामजन्मभूमि- बाबरी मस्जिद विवाद मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ उन्होंने कथित तौर पर ‘‘अपमानजनक और निंदनीय’’ बयान दिए थे।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि भास्कर ने ये बयान ‘मुंबई कलेक्टिव’ की तरफ से एक फरवरी 2020 को आयोजित पैनल चर्चा में दिया था।
इसमें दावा किया गया कि भास्कर ने देश की अदालतों के खिलाफ ‘‘अपमानजनक और निंदनीय’’ बयान दिए थे और अयोध्या मामले में फैसले का जिक्र किया था।
अदालत की अवमानना कानून, 1971 की धारा 15 के तहत किसी व्यक्ति के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने के लिए या तो अटॉर्नी जनरल या सॉलिसीटर जनरल की सहमति जरूरी होती है।
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वकील महक माहेश्वरी ने कहा, ‘‘‘मुंबई कलेक्टिव’ की तरफ से आयोजित पैनल चर्चा में एक फरवरी 2020 को उच्चतम न्यायालय के संदर्भ में दिए गए अपमानजनक एवं निंदनीय बयान के लिए स्वरा भास्कर के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के उद्देश्य से याचिका दी गई है।’’
माहेश्वरी ने वकील अनुज सक्सेना और प्रकाश शर्मा के साथ मिलकर याचिका दायर की है।
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