देश की खबरें | अफगानिस्तान में युद्ध के अंधकार के अंत में अब शांति की उम्मीद की किरण दिख रही है: अब्दुल्ला

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. अफगानिस्तान के शीर्ष शांति वार्ताकार अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनके देश में संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं है और चार दशक से अधिक समय तक चले युद्ध के अंधकार के अंत में अब वहां शांति की उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर अफगानिस्तान के शीर्ष शांति वार्ताकार अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनके देश में संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं है और चार दशक से अधिक समय तक चले युद्ध के अंधकार के अंत में अब वहां शांति की उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है।

अफगानिस्तान की राष्ट्रीय मेल-मिलाप उच्च परिषद के अध्यक्ष अब्दुल्ला ने अफगान शांति प्रक्रिया को समर्थन देने के लिए भारतीय नेतृत्व का भी धन्यवाद व्यक्त किया और कहा कि भारत ‘‘सदाबहार मित्र’’ है।

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उन्होंने मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान में एक व्याख्यान में कहा, ‘‘42 साल बाद पहली बार, हम अफगानिस्तान में युद्ध के अंधकार के अंत में शांति की उम्मीद की किरण देख रहे हैं। यह आसान नहीं है क्योंकि हमें सुनिश्चित करना होगा कि यह सही उम्मीद की किरण हो और सही दिशा हो।’’

अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि उनके देश में संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं हो सकता।

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इससे पूर्व, आज दिन में अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और युद्ध से तबाह अपने देश में स्थिरता वापस लाने के लिए जारी शांति पहल पर चर्चा की।

अब्दुल्ला अफगान शांति प्रक्रिया पर क्षेत्रीय सहमति और समर्थन के प्रयास के तहत यहां पांच दिन की यात्रा पर मंगलवार को पहुंचे थे।

उन्होंने बुधवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से गहन चर्चा की।

अफगान सरकार और तालिबान के मध्य दोहा में शांति वार्ता के बीच अब्दुल्ला की भारत यात्रा हुई है।

तालिबान और अफगान सरकार 19 साल से चले आ रहे युद्ध को खत्म करने के लिए सीधे वार्ता कर रहे हैं। इस युद्ध में हजारों लोग मारे गए हैं और अफगानिस्तान के अनेक इलाके बर्बाद हो गए हैं।

अफगानिस्तान की शांति एवं स्थिरता की प्रक्रिया में भारत एक बड़ा भागीदार रहा है जो युद्ध से तबाह देश में सहायता और पुनर्निर्माण गतिविधियों के लिए पहले ही दो अरब डॉलर का निवेश कर चुका है।

भारत युद्धग्रस्त देश में राष्ट्रीय शांति एवं मेल-मिलाप प्रक्रिया का समर्थन कर रहा है जो अफगान नीत और अफगान नियंत्रित है।

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