देश की खबरें | राजनीतिक दल कर रहे आपराधिक छवि के नेताओं को उम्मीदवार बनाये जाने के नफे-नुकसान का आकलन

लखनऊ, 27 सितंबर उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष की शुरुआत में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से अपराधियों के खिलाफ राज्य सरकार के कड़े रुख को जनता के समक्ष पेश करने के बीच, दूसरे राजनीतिक दलों ने आपराधिक छवि के नेताओं को उम्मीदवार बनाए जाने के नफे नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है।

मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ से लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह तक सभी, अपनी सभाओं में पिछले साढ़े चार साल में माफियाओं के खिलाफ की गई ‘‘कठोर कार्रवाई’’ का ब्योरा दे रहे हैं।

हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने महराजगंज की एक सभा में कहा कि '' विकास के लिए उत्तम कानून व्यवस्था की आवश्यकता होती है और मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम सुनते ही अपराधी नींद में भी कांपने लगते हैं।''

माफिया संस्कृति के खिलाफ संदेश देने की योजना के तहत ही बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने 10 सितंबर को एक बयान जारी कर मऊ से बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी को टिकट न देने का ऐलान किया। उन्होंने ट्वीट किया कि बसपा आगामी विधानसभा चुनाव में किसी भी बाहुबली व माफिया को पार्टी का टिकट नहीं देगी। हालांकि उसी दिन ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने मुख्तार अंसारी को मनचाही सीट से चुनाव लड़ने का न्योता दे दिया। साथ ही अंसारी के पुराने सहयोगी रहे सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर भी उनके समर्थन में आ गये।

मऊ से विधायक मुख्तार अंसारी, ज्ञानपुर, भदोही के विधायक विजय मिश्र, सैयदराजा, चंदौली के विधायक सुशील सिंह, जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह और फूलपुर के पूर्व सांसद अतीक अहमद पिछले वर्षों में किसी न किसी पार्टी के टिकट पर विधानसभा पहुंचते रहे हैं। वर्ष 2005 में गाजीपुर के मोहम्मदाबाद क्षेत्र के विधायक कृष्णानंद राय की हत्या समेत कई गंभीर मामलों में आरोपी रहे मऊ से पांच बार के विधायक मुख्तार अंसारी इस समय बांदा की जेल में बंद हैं।

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म (एडीआर) की रिपोर्ट के मुताबिक, 403 सदस्यों वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा में 147 विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से भाजपा के 83, सपा के 11, बसपा के चार और कांग्रेस के एक विधायक पर गंभीर धाराओं में मामले दर्ज हैं।

उत्तर प्रदेश एडीआर के संयोजक संजय सिंह ने ''पीटीआई-' को बताया कि अपराधियों को टिकट देने के मामले में राजनीतिक दलों में होड़ लगी रहती है। ‘एडीआर और यूपी इलेक्शन वॉच’ के अनुसार उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के सभी चरणों के प्रत्याशियों की समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक 2017 में विधानसभा का चुनाव लड़ने वाले कुल 15 फीसदी यानी कि 704 प्रत्याशियों पर आपराधिक मामले दर्ज थे, वहीं 2012 के विधानसभा चुनावों में यह तादाद 557 यानी केवल आठ फीसदी ही थी।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)