देश की खबरें | असम: अंतिम परिसीमन रिपोर्ट के खिलाफ प्रदर्शन

गुवाहाटी, 12 अगस्त असम में विधानसभा और लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों से संबंधित अंतिम परिसीमन रिपोर्ट के खिलाफ राज्य के शिवसागर जिले में शनिवार को प्रदर्शन किया गया।

कुछ प्रदर्शनकारियों ने अंतिम परिसीमन रिपोर्ट के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराने के लिए अपनी कमीज भी उतार दी।

वहीं, एक तिवा संगठन ने दावा किया कि मोरीगांव सीट के आरक्षण की उसकी मांग अनसुनी कर दी गई है।

‘ऑल तिवा स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ ने मोरीगांव विधानसभा क्षेत्र को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित न करने के खिलाफ अपना विरोध जताया।

अंतिम रिपोर्ट शुक्रवार को प्रकाशित की गई जिसमें विधानसभा क्षेत्रों की संख्या 126 और लोकसभा सीट की संख्या 14 बरकरार रखी गई है। हालांकि, इसमें एक संसदीय क्षेत्र और 19 विधानसभा क्षेत्रों का नाम संशोधित किया गया है जैसा कि मसौदा अधिसूचना में उल्लिखित था।

परिसीमन की कार्यवाही निर्वाचन आयोग ने पूरी की थी। आयोग के एक बयान के अनुसार, 19 विधानसभा और दो लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित किए गए हैं, जबकि नौ विधानसभा और एक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित किए गए हैं।

अंतिम रिपोर्ट के खिलाफ नाराजगी मोरीगांव विधानसभा क्षेत्र को आरक्षित नहीं करने, शिवसागर जिले में लाहोवाल और अमगुरी विधानसभा क्षेत्र को अक्षुण्ण रखने की मांग को स्वीकार न करने और शिवसागर के क्षेत्रों को आसपास के जिलों में शामिल करने के कारण है।

स्थानीय लोगों और संगठनों ने फैसले के खिलाफ अमगुरी शहर में विरोध प्रदर्शन किया। इन प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा और राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा नीत गठबंधन सरकार के सहयोगी दल असम गण परिषद (एजीपी) के स्थानीय विधायक प्रदीप हजारिका के खिलाफ नारे लगाए।

जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को शर्मा और हजारिका के पुतले फूंकने से रोका, तो उन्होंने अंतिम परिसीमन रिपोर्ट के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराने के लिए अपनी कमीज तक उतार दी।

विपक्षी रायजोर दल के कार्यकर्ताओं ने भी शिवसगर शहर के पास परिसीमन की अंतिम रिपोर्ट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और कुछ समय के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया।

रायजोर दल के अध्यक्ष और शिवसागर सीट से विधायक अखिल गोगोई ने कहा कि निर्वाचन आयोग का अंतिम आदेश संपूर्ण परिसीमन प्रक्रिया के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में दाखिल कई राजनीतिक दलों की याचिका पर सुनवाई के परिणाम के अधीन है।

विपक्षी दलों ने अंतिम परिसीमन रिपोर्ट की आलोचना की और इसके प्रकाशित होने के तुरंत बाद आरोप लगाया कि यह सत्तारूढ़ भाजपा द्वारा अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने की एक चाल है।

वर्ष 2001 की जनगणना के आधार पर राज्य के सभी विधानसभा और संसदीय क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण किया गया। असम में पिछली परिसीमन प्रक्रिया 1971 की जनगणना के आधार पर 1976 में हुई थी।

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