जयपुर, 30 अगस्त राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को आरोप लगाया कि न्यायपालिका में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार है।
गहलोत ने यह भी कहा कि केंद्रीय एजेंसियों की प्रतिष्ठा खराब हुई है क्योंकि वे पूर्व आकलन किए बिना छापेमारी करती हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ‘‘आज न्यायपालिका में भ्रष्टाचार व्याप्त है। मैंने सुना है कि कुछ वकील खुद ही फैसला लिखकर लाते हैं और वही फैसला सुनाया जाता है।’’
उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘न्यायपालिका में क्या हो रहा है? चाहे निचली हो या ऊपरी (अदालतें), चीजें गंभीर हैं और लोगों को इसके बारे में सोचना चाहिए।’’
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), आयकर विभाग को ऊपर से निर्देश मिलते हैं और एजेंसियां बिना पूर्व आकलन किये छापेमारी करती हैं।
गहलोत ने कहा, ‘‘हमें अपनी प्रमुख एजेंसियों पर गर्व है लेकिन केंद्र ने उनकी हालत खराब कर दी है। एजेंसियों की प्रतिष्ठा धूमिल हुई है।’’ गहलोत ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शासन में लोकतंत्र खतरे में है।
मुख्यमंत्री ने भाजपा विधायक कैलाश मेघवाल के उस आरोप का भी समर्थन किया, जिन्होंने एक सार्वजनिक बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल पर ‘‘भ्रष्ट नंबर एक’’ होने का आरोप लगाया था।
गहलोत ने कहा, ‘‘उन्होंने ठीक कहा है। हम इसकी जांच करवा रहे हैं। मुझे पता चला है कि उनके (अर्जुन राम मेघवाल के) वक्त में बहुत भ्रष्टाचार हुआ है।’’
कैलाश ने आरोप लगाया था कि राजनीति में आने से पहले अर्जुन राम मेघवाल जब अधिकारी पद पर थे तो वह भ्रष्टाचार में लिप्त थे।
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