विदेश की खबरें | बांग्लादेश में फंसे करीब 350 भारतीयों को जमीनी मार्ग के जरिये लाया गया

ढाका, 28 मई कोविड-19 लॉकडाउन की वजह से यात्रा पाबंदियों के चलते बांग्लादेश में फंसे 350 भारतीयों का एक समूह पूर्वोत्तर सीमा के जरिये बृहस्पतिवार को स्वदेश लौटा। इन लोगों में अधिकतर मेडिकल के छात्र हैं।

बांग्लादेश में फंसे इन भारतीयों में ज्यादातर पूर्वोत्तर राज्यों के निवासी हैं, इन लोगों ने मेघालय, असम और त्रिपुरा से लगते जांच स्थलों से सीमा पार करके भारत में प्रवेश किया।

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ढाका में भारत की उच्चायुक्त रीवा गांगुली दास ने इन भारतीय नागरिकों को भारत-बांग्लादेश सीमा स्थित तीन चौकियों में से एक से विदा किया।

उन्होंने कहा, ‘‘यह महामारी के दौरान बांग्लादेश से हमारे नागरिकों की जमीन के रास्ते पहली वापसी है।’’

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भारतीय उच्चायुक्त ने अखौरा-अगरतला एकीकृत जांच चौकी का दौरा किया और त्रिपुरा जाने वाले भारतीयों से बातचीत की।

इसके अलावा, मेघालय से सटी दावकी-तमाबिल सीमा चौकी और असम सीमा से सटी सुतरकांडी-शिओला चौकी से भी भारतीयों को वापस भेजा गया।

उच्चायोग ने इससे पहले ट्वीट किया, ‘‘करीब 200 भारतीय नागरिक, जिसमें अधिकतर पूर्वोत्तर भारत से हैं, आज तीन जमीनी सीमा चौकियों (दावकी-तमाबिल, अगरतला-अखौरा, सुतरकांडी-शिओला) के रास्ते भारत में प्रवेश कर रहे हैं। उच्चायुक्त रीवा गांगुली दास ने अगरतला-अखौरा का दौरा किया और स्वदेश जा रहे हमारे नागरिकों से बातचीत की।’’

भारतीय उच्चायोग ने एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें घर वापस जाने वाले छात्र बेहद उत्साहित नजर आ रहे हैं।

उच्चायोग ने वतन वापसी के इच्छुक भारतीयों के लिए अपनी वेबसाइट पर एक लिंक साझा किया था, जहां वह लौटने के लिए अपना पंजीकरण करवा सकते हैं।

बांग्लादेश में फंसे भारतीयों को वापस लाने की कवायद आठ मई से शुरू की गई थी। इसके तहत, पहले चरण में एअर इंडिया की एक विशेष उड़ान के जरिए 168 भारतीय छात्र ढाका से भारत लौटे थे। ढाका से यह उड़ान श्रीनगर में उतरी थी। उसके बाद पांच और उड़ानें संचालित हुई हैं।

भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों का कहना है कि वंदे भारत अभियान के तहत विशेष उड़ानों से बांग्लादेश से 1500 भारतीयों को निकाला गया है।

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