चंडीगढ़, 20 जुलाई सीमा पार से हथियार और मादक द्रव्यों की तस्करी के मामले में पिछले हफ्ते एक बीएसएफ जवान और उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी के बाद सेना के एक जवान और तीन अन्य लोगों को भी इस सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है। पंजाब पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी।
पुलिस ने कहा कि गिरोह में शामिल लोगों के पाकिस्तानी मादक द्रव्य तस्करों से संबंध थे और उनसे इन लोगों को 39 लाख रुपये इसके बदले प्राप्त हुए थे।
पंजाब पुलिस के महानिदेशक (डीजीपी) दिनकर गुप्ता ने कहा कि इस मामले में गिरफ्तार किये गए लोगों की कुल संख्या बढ़कर आठ हो गई है।
उन्होंने कहा कि भारतीय सेना के सैनिक रमनदीप सिंह को उत्तर प्रदेश के बरेली से गिरफ्तार किया गया जहां वह अभी तैनात था।
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डीजीपी ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के कांस्टेबल सुमित कुमार और उसके तीन सहयोगियों द्वारा किये गए खुलासे के बाद यह गिरफ्तारी हुई। इन लोगों को जालंधर (ग्रामीण) पुलिस ने पिछले हफ्ते गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने कहा कि रमनदीप सिंह के तीन सहयोगियों तरनजोत सिंह ऊर्फ तन्ना, जगजीत सिंह ऊर्फ लाड़ी और सतिंदर सिंह उर्फ काला को भी गिरफ्तार किया गया है और पेशी वारंट पर लाया जा रहा है।
पुलिस ने कहा कि सतिंदर सिंह के पास से मादक द्रव्य के 10 लाख रुपये बरामद हुए हैं जिससे इस मामले में अबतक जब्त हुई रकम का आंकड़ा 42.30 लाख रुपये हो गया है।
डीजीपी ने कहा कि उन्हें मादक द्रव्य तस्करी के माध्यम से पाकिस्तान स्थित तस्करों से 39 लाख रुपये की रकम मिली थी।
गुप्ता ने एक बयान में कहा कि पुलिस ने पिछले हफ्ते कुमार की गिरफ्तारी के साथ इस रैकेट का खुलासा किया था। कुमार जम्मू कश्मीर के सांबा जिले में तैनात था। उसके तीन साथियों को भी गिरफ्तार किया गया था।
डीजीपी ने कहा कि पुलिस रुपये कहां से आए इस कड़ी की पड़ताल कर रही है जिससे राज्य से मादक द्रव्य के खतरे को खत्म किया जा सके।
कुमार और रमनदीप सिंह गुरदासपुर जिले के मगर मुडियन गांव के रहने वाले हैं। पूछताछ में कुमार ने बताया कि सीमा पार हथियार और मादक द्रव्य तस्करी के लिये उसे रमनदीप सिंह ने लालच दिया था।
दोनों हत्या के एक मामले में गुरदासपुर जेल में भी साथ ही बंद थे। कुमार को जनवरी 2018 में जमानत मिल गई जबकि रमनदीप सिंह को सितंबर 2019 में।
रमनदीप सिंह कथित तौर पर तरनजोत सिंह और सतिंदर सिंह के साथ मिलकर मादक द्रव्य और हथियारों की तस्करी का गिरोह चला रहा था।
डीजीपी ने बताया कि सतिंदर सिंह कुछ समय के लिये अमृतसर की जेल में बंद था जहां वह पाकिस्तानी नागरिक मौलवी उर्फ मुल्ला के संपर्क में आया जिसने उसका परिचय पाकिस्तानी तस्करों से कराया।
गुप्ता ने कहा कि सतिंदर सिंह को कपूरथला जेल स्थानांतरित किया गया जहां उसका परिचय तरनजोत सिंह से हुआ और उसने उसे अपना सहयोगी बना लिया।
डीजीपी ने कहा कि जब सतिंदर सिंह ने गिरोह में बीएसएफ के एक जवान को शामिल करने की जरूरत पर बल दिया तो रमनदीप सिंह ने कुमार को गिरोह से जुड़ने के लिये मनाया।
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