देश की खबरें | सेना कश्मीर में पहुंच रहे अमेरिकी हथियारों का दस्तावेजीकरण कर रही : लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. सेना अमेरिकी हथियारों का दस्तावेजीकरण कर रही है जो संभवतः अफगानिस्तान के रास्ते कश्मीर पहुंचे हैं। घाटी में सेना के एक शीर्ष अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
श्रीनगर, चार अक्टूबर सेना अमेरिकी हथियारों का दस्तावेजीकरण कर रही है जो संभवतः अफगानिस्तान के रास्ते कश्मीर पहुंचे हैं। घाटी में सेना के एक शीर्ष अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
श्रीनगर स्थित चिनार कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने संवाददाताओं को बताया कि ऐसे हथियारों का पता लगाने के लिए अमेरिका के साथ यह मुद्दा उठाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
घई ने अफगानिस्तान से आए अमेरिकी हथियारों की घाटी में बरामदगी पर चिंताओं के बारे में पूछे गए सवाल पर यह जबाव दिए।
उन्होंने कहा, "मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता, क्योंकि यह हमारी खुफिया एजेंसियों के विशिष्ट क्षेत्र के अंतर्गत आता है और मेरा मानना है कि वे इस बारे में अधिक जानकारी प्रदान करने में सक्षम होंगे कि ये हथियार कहां से आ रहे हैं और वे हमारे देश के प्रति शत्रुतापूर्ण रुख रखने वाले लोगों के हाथों में कैसे पहुंच रहे हैं।"
लेफ्टिनेंट जनरल घई ने इन हथियारों का दस्तावेजीकरण करने और लोगों द्वारा इसके बारे में जानकारी मांगने के संबंध में पूछे जाने पर कहा "यह निश्चित रूप से जारी है और मैं निश्चित रूप से इसकी पुष्टि कर सकता हूं।"
सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर में मुठभेड़ों में मारे गए आतंकवादियों के पास से एम4 कार्बाइन असॉल्ट राइफलें बरामद की हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि 2021 में अफगानिस्तान से वापसी के बाद अमेरिकी सेना द्वारा छोड़े गए हथियार पाकिस्तानी आकाओं के माध्यम से आतंकवादियों तक पहुंचे हैं।
वर्ष 1980 के दशक में डिजाइन और विकसित की गई एम4 कार्बाइन राइफलों का व्यापक रूप से उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) द्वारा उपयोग किया गया है। बताया जाता है कि पाकिस्तानी विशेष बलों और सिंध पुलिस की विशेष सुरक्षा इकाई सहित कई सेनाओं द्वारा भी इनका उपयोग किया गया है।
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