नयी दिल्ली, 20 दिसंबर उच्चतम न्यायालय ने केंद्र को 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मुकदमों की मौजूदा स्थिति पर दो सप्ताह के भीतर नयी स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने शुक्रवार को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को हलफनामा दायर करने को कहा और मामले में याचिकाकर्ताओं को विस्तृत आपत्तियां दायर करने की अनुमति भी दी।
सुनवाई के दौरान भाटी ने कहा कि शीर्ष अदालत द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की सिफारिशों को लागू किया गया है।
एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि एसआईटी रिपोर्ट में कुछ स्पष्ट उदाहरण हैं और 500 मामलों को एक प्राथमिकी में शामिल कर दिया गया तथा जांच अधिकारी उनकी जांच नहीं कर पाए।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, ‘‘ ऐसे कई उदाहरण थे जहां 498 मामलों को एक प्राथमिकी में शामिल कर दिया गया और जांच अधिकारी (आईओ) को उन सभी की जांच करनी पड़ी। शुरुआती दौर में जब सुनवाई शुरू हुई तो अदालत को लगा कि इसे सिर्फ दिल्ली तक ही सीमित रखना चाहिए। लेकिन हमने बाकी राज्यों के बारे में कुछ नहीं किया। हमने कानपुर, बोकारो आदि का उदाहरण दिया, कुछ नहीं हुआ। ’’
शीर्ष अदालत ने आश्वासन दिया कि वह इन सभी पहलुओं पर गौर करेगी।
वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके अंगरक्षकों द्वारा हत्या के बाद दिल्ली में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई और सिख समुदाय के लोगों की हत्याएं हुईं थीं।
नानावती आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 1984 के दंगों के संबंध में दिल्ली में कुल 587 प्राथमिकी दर्ज की गईं। दंगों में कुल 2,733 लोग मारे गए थे।
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