देश की खबरें | कृषि संबंधी विधेयक किसान विरोधी और कॉर्पोरेट हितैषी : टी एस सिंहदेव

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने हाल में संसद से पारित कृषि सुधार संबंधी तीन विधेयकों को किसान विरोध और कॉर्पोरेट हितैषी बताया है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

भोपाल, 27 सितंबर छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने हाल में संसद से पारित कृषि सुधार संबंधी तीन विधेयकों को किसान विरोध और कॉर्पोरेट हितैषी बताया है।

उन्होंने कहा कि कृषि आर्थिकी में कोई भी सुधार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सुनिश्चित किये बिना किसानों का हितौषी नहीं हो सकता है।

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उन्होंने कहा कि यदि यह विधेयक कानून में बदल जाते हैं तो यह अमेरिका और अन्य विकसित देशों के कृषि क्षेत्र में प्रचलित अस्वस्थ कॉर्पोरेट प्रणाली को सुगम बनायेंगे और यह किसानों को तबाह कर देगा।

देव ने मध्यप्रदेश कांग्रेस कार्यालय में शनिवार को पत्रकार वार्ता में कहा, ‘‘यह विधेयक किसान विरोधी हैं और इससे कॉर्पोरेट घरानों को मदद मिलेगी। वे आस्ट्रेलिया, फ्रांस, इंग्लेंड और अमेरिका के समान कृषि क्षेत्र में कॉर्पोरेट प्रणाली को सुगम बनाने जा रहे हैं। इससे किसानों की आत्महत्या दर बढ़ेगी।’’

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उन्होंने कहा, ‘‘हमारी मांग है कि सरकार इन विधेयकों को वापस ले।’’

उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के प्रावधान के बिना गरीब किसानों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा और इससे आत्महत्या की घटनाएं बढ़ेगीं। ये विधेयक छोटे किसानों के दमन का मौका देते हैं।

देव ने बताया कि देश में 86.21 प्रतिशत किसानों के परिवार पांच एकड़ से कम की जोत के हैं। क्या ऐसा किसान कॉर्पोरेट अनुबंधों के खिलाफ मुक्दमें लड़ सकता है, जो किसान पेट भरने की, फसल के मूल्य की लड़ाई लड़ रहा है, क्या वह वकीलों की फीस भी चुका सकता है।

उन्होंने कहा कि अगर सरकार कहती है कि एमएसपी खत्म नहीं होगा तो इसे विधेयक में लिखने में क्या आपत्ति है।

ग़ौरतलब है कि हाल ही संपन्न मानसून सत्र में संसद ने कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक-2020 और कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 को मंजूरी दी है।

कम से कम 18 विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से विवादास्पद विधेयकों पर हस्ताक्षर नहीं करने का आग्रह किया है। इन दलों ने यह आरोप लगाया कि संसदीय मानदंडों के "पूर्ण अवहेलना" कर "असंवैधानिक रूप से" इन विधेयकों को पारित किया गया।

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