अलवर (राजस्थान), 26 फरवरी पर्यावरणविद सुनीता नारायण ने बुधवार को कहा कि वैश्विक व्यापार संघर्षों और राजनीतिक बदलावों के कारण जलवायु न्याय की अवधारणा कमज़ोर हो रही है।
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरमेंट (सीएसई) के वार्षिक अनिल अग्रवाल संवाद को संबोधित करते हुए, सीएसई महानिदेशक ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और आर्थिक विवैश्वीकरण (डीग्लोबलाइजेशन) ने जलवायु न्याय को ‘गंदे शब्द’ में बदल दिया है।
नारायण ने कहा कि 1990 के दशक से ही अमीर देशों ने औद्योगिक उत्पादन को चीन और भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं में स्थानांतरित कर दिया, जिससे अमीर देशों को अपने उत्सर्जन में कटौती किए बिना उच्च उपभोग स्तर बनाए रखने की अनुमति मिल गई।
अब, जब देशों को अंततः जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, तो प्रतिक्रिया बढ़ रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार के खिलाफ, नवीकरणीय ऊर्जा के खिलाफ, विद्युतीकरण के खिलाफ गुस्सा है। ट्रंप ने केवल इस गुस्से को भुनाया है।’’
नारायण ने कहा, ‘‘वे अपनी नौकरियां वापस चाहते हैं। वे कहते हैं कि वे विनिर्माण वापस चाहते हैं। लेकिन श्रम कहां से आएगा? और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि क्या विनिर्माण को वापस लाने से उनके अपने देशों में अधिक उत्सर्जन नहीं होगा?’’
उन्होंने कहा कि इसका वैश्विक कार्बन बजट पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा, जो कि कार्बन डाइऑक्साइड की वह मात्रा है जिसे दुनिया 1850 से 2030 तक तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने के लिए उत्सर्जित कर सकती है।
सीएसई महानिदेशक ने कहा, ‘‘अमेरिका, जिसका बजट में 24 प्रतिशत हिस्सा था, उसे घटाकर 22 प्रतिशत करने की उम्मीद थी। लेकिन ट्रंप के आने से, उसका हिस्सा वास्तव में बढ़ जाएगा। चीन 13 प्रतिशत पर था और उसके बढ़कर 16 प्रतिशत होने की उम्मीद थी। इससे बाकी दुनिया के लिए कोई जगह नहीं बचती।’’
उन्होंने कहा कि घरेलू मोर्चे पर अच्छी खबर है जहां 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में, सीएसई द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण से पता चला है कि मतदाताओं ने यमुना की स्थिति, वायु गुणवत्ता और कचरे जैसे मुद्दों को आप सरकार को बाहर करने के अपने फैसले में प्रमुख कारक बताया।
उन्होंने कहा कि यह एक बदलाव का संकेत है, क्योंकि पर्यावरण संबंधी चिंताएं अब केवल कुलीन, मध्यम वर्ग के इलाकों तक सीमित नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि आबादी का एक बड़ा हिस्सा अब इन समस्याओं को महत्वपूर्ण मानता है, यह दर्शाता है कि वे मुख्यधारा के राजनीतिक मुद्दे बन गए हैं।
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