नयी दिल्ली, 21 जून दूरसंचार कंपनियों के निकाय सीओएआई ने बुधवार को कहा कि नीलामी के बगैर छह गीगाहर्ट्ज बैंड में स्पेक्ट्रम आवंटन होने से देश को लगभग तीन लाख करोड़ रुपये तक का नुकसान होने की आशंका है।
भारतीय सेल्युलर ऑपरेटर संघ (सीओएआई) ने कहा कि दूरसंचार कंपनियों को अपने उपभोक्ताओं को 100 मेगाबाइट प्रति सेकंड (एमबीपीएस) डाउनलोड स्पीड और 50 एमबीपीएस अपलोड स्पीड देने की जरूरत होती है इसलिए सरकार को 5जी मोबाइल सेवा के लिए छह गीगाहर्ट्ज बैंड में उपलब्ध समूची 1,200 मेगाहर्ट्ज़ (मेगाहर्ट्ज) फ्रीक्वेंसी चिह्नित कर देनी चाहिए।
सीओएआई के महानिदेशक एस पी कोचर ने एक कार्यक्रम में दूरसंचार सेवाओं के लिए छह गीगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम पर चर्चा करते हुए कहा, “अगर हम मिड-बैंड स्पेक्ट्रम के लिए पिछली नीलामी में मिली कीमत को लेते हैं तो यह लगभग 317 करोड़ रुपये प्रति मेगाहर्ट्ज आती है।”
उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि कीमत काफी हद तक कम हो लेकिन अगर हम इसे एक संदर्भ बिंदु के रूप में देखें तो नीलामी के बिना छह गीगाहर्ट्ज में स्पेक्ट्रम दिए जाने पर सरकारी खजाने को होने वाले नुकसान की गणना कोई भी आसानी से कर सकता है।”
दूरसंचार उद्योग की अन्य इकाइयों ने सीओएआई की इस मांग का विरोध करते हुए सरकार को पत्र लिखकर छह गीगाहर्ट्ज का लाइसेंस खत्म करने की मांग की है ताकि वाई-फाई सेवाओं के लिए इसका निःशुल्क इस्तेमाल किया जा सके।
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