देश की खबरें | फर्जी एनसीसी शिविर में लड़कियों का कथित यौन शोषण: अदालत ने तमिलनाडु पुलिस से जांच पर सवाल पूछे

चेन्नई, 23 अक्टूबर मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु के कृष्णागिरि जिले के एक स्कूल में असामाजिक तत्वों द्वारा आयोजित फर्जी ‘नेशनल कैडेट कोर’ (एनसीसी) शिविर में 13 लड़कियों के कथित यौन शोषण से संबंधित मामले की जांच के संबंध में बुधवार को पुलिस से कई सवाल पूछे।

न्यायमूर्ति डी. कृष्णकुमार और न्यायमूर्ति पी. बी. बालाजी की खंडपीठ ने अधिवक्ता द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई 30 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दी।

ए. पी. सूर्यप्रकाशम ने घटना की जांच कृष्णागिरि पुलिस से केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का अनुरोध किया है।

जब मामला सुनवाई के लिए आया तो अतिरिक्त महाधिवक्ता जे. रवींद्रन ने कहा कि मामले में चार स्कूलों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है।

उन्होंने कहा कि गोपू नामक व्यक्ति सरकारी उच्च विद्यालय में काम करता था, जिसकी आरोपी शिवरमन से दोस्ती हो गई थी और उसके माध्यम से एनसीसी शिविरों का संचालन किया जाता था।

जब पीठ ने पूछा कि क्या इस मामले में कथित रूप से शामिल एक अन्य व्यक्ति से पूछताछ की गई थी तो रवींद्रन ने कहा कि ऐसा किया गया था और ऐसा लगता है कि वह व्यक्ति निर्दोष था।

सरकारी वकील हसन मोहम्मद जिन्ना ने दलील दी कि जिस व्यक्ति से पुलिस द्वारा पूछताछ की गई वह शिवरमन के अधीन अंशकालिक कर्मचारी के रूप में काम कर रहा था।

जब पीठ ने पूछा कि क्या स्कूलों ने शिविर आयोजित करने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी से अनुमति ली है तो रवींद्रन ने कहा कि उन्हें एनसीसी कमांडेंट से अनुमति लेनी थी लेकिन, वे ऐसा करने में विफल रहे।

पीठ ने कहा कि पुलिस ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की है और गिरफ्तारियां दर्ज की हैं।

इसने कहा कि लेकिन, क्या उन्होंने इस बात की जांच की है कि स्कूलों ने एनसीसी कमांडेंट से मंजूरी लिए बिना एनसीसी शिविर क्यों आयोजित किए, स्कूल प्रबंधन शिवरमन से कैसे जुड़े थे या छात्रों को अन्य स्कूलों में क्यों ले जाया गया।

सूर्यप्रकाशम ने कहा कि उनके आचरण से ही पता चला है कि वे जांच करने में अक्षम हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस मामले को शुरुआती चरण में ही बंद करके दबा देना चाहती थी।

पीठ ने पुलिस से पूछा कि असली अपराधी कौन है। उन्होंने शिविरों से जुड़े कई पहलुओं की जांच क्यों नहीं की। उनकी कार्यप्रणाली क्या थी?

जिन्ना ने कहा कि पुलिस को अभी तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट और न्यायिक मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट नहीं मिली है। आरोपी शिवरमन अन्नाई उदवी मैयम नामक संस्था चला रहा था, जो एक फर्जी ट्रस्ट था।

उन्होंने कहा कि जांच में पता चला कि पीड़ितों को कार्यालय ले जाया गया और उनका कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया गया।

उन्होंने बताया कि जांच में यह भी पता चला कि पीड़ितों को केरल, कर्नाटक, पुडुचेरी और महाबलीपुरम ले जाया गया था।

सूर्यप्रकाशम ने कहा कि अब यह अंतरराज्यीय यौन उत्पीड़न का मामला बन गया है और यह बहुत दुखद स्थिति है।

रवींद्रन ने कहा कि अगली सुनवाई के दौरान पुलिस जांच के बारे में एक व्यापक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करेगी।

पीठ ने पुलिस को जांच का विवरण दाखिल करने का निर्देश दिया।

पीठ ने तमिलनाडु विधिक सेवा प्राधिकरण को पीड़ितों को 1.63 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित करने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया।

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