जरुरी जानकारी | त्योहारी मांग के बीच सभी तेल तिलहन कीमतों में सुधार, मूंगफली पूर्ववत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. खाद्यतेलों का आयात घटने की उम्मीदों के बीच शनिवार को देश के तेल-तिलहन बाजारों में सरसों और सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ), पामोलीन और बिनौला तेल के भाव में मजबूती दिखी। लेकिन सस्ते आयातित तेलों से लगभग दोगुना भाव होने और नये फसल की आवक बढ़ने के बीच मूंगफली तेल तिलहन पूर्वस्तर पर बने रहे।

नयी दिल्ली, 28 अक्टूबर खाद्यतेलों का आयात घटने की उम्मीदों के बीच शनिवार को देश के तेल-तिलहन बाजारों में सरसों और सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ), पामोलीन और बिनौला तेल के भाव में मजबूती दिखी। लेकिन सस्ते आयातित तेलों से लगभग दोगुना भाव होने और नये फसल की आवक बढ़ने के बीच मूंगफली तेल तिलहन पूर्वस्तर पर बने रहे।

बाजार सूत्रों ने कहा कि पिछले दिनों जिस तरह से आयातित खाद्यतेलों में लागत से कम दाम पर बिक्री हो रही थी, उसी समय यह अंदेशा हो रहा था कि आगे चल कर खाद्यतेलों का आायत घटेगा। उन्होंने कहा कि नवंबर और दिसंबर के महीने में खाद्यतेलों के आयात के आंकड़े घटने की पूरी संभावना को देखते हुए अधिकांश तेल तिलहनों में सुधार आया। जाड़े में नरम तेल (सॉफ्ट आयल) की मांग बढ़ेगी और इसका आयात कम रहने की संभावना को देखते हुए तेल कीमतों में मजबूती दिखी।

आयातित सस्ते खाद्यतेल के मुकाबले देश के मूंगफली तेल तिलहन की उत्पादन लागत लगभग दोगुनी होने के बीच इसकी सामान्य मांग है और जिस वजह से मूंगफली तेल तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।

सूत्रों के मुताबिक, पिछले साल के मुकाबले मंडियों में सोयाबीन की आवक कम हो रही है। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के आसपास कीमत मिलने के बावजूद यह पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम लग रही है। ऐसे में जरूरतमंद किसान ही अपनी ऊपज बेचते हुए नजर आ रहे हैं।

मुर्गीदाने में इस्तेमाल होने वाले डी-आयल्ड केक (डीओसी) की स्थानीय मांग बढ़ रही है और इसकी खपत भी अच्छी है। विदेशों से भी डीओसी की मांग बढ़ रही है। इस वजह से शुक्रवार रात विदेशी बाजारों में सोयाबीन तिलहन और डीओसी के दाम मजबूत हुए। सोयाबीन डीओसी में 12 डॉलर की मजबूती आई थी।

कारोबारी सूत्रों ने कहा कि सरसों के अच्छे माल की कमी बनी हुई है और सर्दी के मौसम में मांग बढ़ने के पूरे आसार हैं। अगली फसल आने में कुछ महीनों का समय है और इस बार सरसों की पूरी पेराई भी नहीं हो पाई है। मजबूत किसानों ने सस्ते आयातित तेलों के दबाव में सरसों को अपने पास ही रोक लिया था।

शनिवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 5,795-5,845 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 6,850-6,900 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 15,500 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,305-2,590 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 10,875 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,835 -1,930 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,835 -1,945 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,035 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 9,885 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,350 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 7,900 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 8,925 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,300 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 8,350 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 5,050-5,150 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 4,850-4,950 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,015 रुपये प्रति क्विंटल।

राजेश

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