Maharashtra Politics: अजित पवार 30 जून को राकांपा अध्यक्ष चुने गए, समूह ने निर्वाचन आयोग को बताया
निर्वाचन आयोग आगामी दिनों में याचिकाओं पर कार्रवाई कर सकता है और दोनों पक्षों से उसके समक्ष प्रस्तुत संबंधित दस्तावेजों का आदान-प्रदान करने के लिए कह सकता है. शरद पवार द्वारा 1999 में गठित राकांपा में रविवार को विभाजन हो गया और अजित पवार 40 से अधिक विधायकों के समर्थन का दावा करते हुए महाराष्ट्र में शिवसेना-भारतीय जनता पार्टी गठबंधन सरकार में शामिल हो गए.
मुंबई/नयी दिल्ली: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने निर्वाचन आयोग को सूचित किया है कि उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है. अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट की ओर से बुधवार को जारी एक बयान के मुताबिक, निर्वाचन आयोग को एक हलफनामे के माध्यम से सूचित किया गया है कि उन्हें 30 जून, 2023 को राकांपा के सदस्यों, विधायी और संगठनात्मक, दोनों इकाइयों के ‘‘भारी बहुमत’’ द्वारा हस्ताक्षरित एक प्रस्ताव के माध्यम से राकांपा प्रमुख चुना गया.
बयान में कहा गया है कि प्रफुल्ल पटेल राकांपा के कार्यकारी अध्यक्ष बने रहेंगे. बयान में कहा गया है कि राकांपा ने अजित पवार को महाराष्ट्र विधानसभा में राकांपा विधायक दल का नेता नियुक्त करने का भी फैसला किया है और इस फैसले को राकांपा विधायकों के भारी बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा अनुमोदित भी किया गया है. 45 साल पहले शरद पवार ने भी की थी बगावत, एक झटके में पलट दिया था पासा, बसंत दादा पाटिल हुए थे शिकार
बयान में कहा गया, ‘‘राकांपा के भीतर कुछ तत्वों द्वारा पार्टी के निर्वाचित प्रतिनिधियों और पार्टी के विभिन्न संगठनात्मक पदों पर काम करने वालों के बीच भय और भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है.’’
इसमें कहा गया है, ‘‘राकांपा की महाराष्ट्र इकाई के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में जयंत पाटिल की पहले की नियुक्ति स्पष्ट रूप से अवैध थी क्योंकि यह राकांपा के संविधान द्वारा अनिवार्य किसी भी प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई थी.’’
बयान में कहा गया है कि राकांपा के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में प्रफुल्ल पटेल ने पाटिल को पद से हटा दिया है और सुनील तटकरे को प्रदेश राकांपा अध्यक्ष नियुक्त किया है. बयान में कहा गया, ‘‘राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ-साथ पार्टी के अन्य सभी पदाधिकारियों की नियुक्ति 10/11 सितंबर 2022 के एक कथित राष्ट्रीय सम्मेलन में की गई थी. उक्त नियुक्ति की कोई वैधता नहीं है क्योंकि राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने वाले व्यक्तियों तथा शरद पवार के पक्ष में मतदान करने वालों का कोई रिकॉर्ड नहीं है.’’
राकांपा की गुटीय लड़ाई निर्वाचन आयोग के दरवाजे तक पहुंच गयी है और अजित पवार के नेतृत्व वाले समूह ने उनके समर्थन में विधायकों और सांसदों के 40 से अधिक हलफनामे दाखिल किये हैं. निर्वाचन आयोग के सूत्रों ने बताया कि शरद पवार खेमे ने आयोग के समक्ष एक याचिका दायर कर अनुरोध किया है कि गुटीय लड़ाई के संबंध में कोई भी निर्देश पारित करने से पहले उनकी बात सुनी जाए.
निर्वाचन आयोग आगामी दिनों में याचिकाओं पर कार्रवाई कर सकता है और दोनों पक्षों से उसके समक्ष प्रस्तुत संबंधित दस्तावेजों का आदान-प्रदान करने के लिए कह सकता है. शरद पवार द्वारा 1999 में गठित राकांपा में रविवार को विभाजन हो गया और अजित पवार 40 से अधिक विधायकों के समर्थन का दावा करते हुए महाराष्ट्र में शिवसेना-भारतीय जनता पार्टी गठबंधन सरकार में शामिल हो गए.
रविवार को अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री और राकांपा के आठ अन्य विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली. अजित पवार ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल, दिलीप वाल्से पाटिल के साथ असली राकांपा होने का दावा किया.
शरद पवार ने भी असली राकांपा होने का दावा किया और पटेल तथा लोकसभा सदस्य सुनील तटकरे को पार्टी से निष्कासित कर दिया. उनके गुट ने महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर को भी पत्र लिखकर रविवार को मंत्री पद की शपथ लेने वाले नौ विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है.
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 05, 2023 08:16 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

