पणजी, 29 मार्च भारतीय नौसेना के दूसरे पी-8 आई विमान स्क्वाड्रन, भारतीय नौसेना एयर स्क्वाड्रन (आईएनएएस) 316, को मंगलवार को गोवा में नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार की मौजूदगी में सेवा में शामिल किया गया।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि आईएनएएस 316 को ‘कोंडोर्स’ नाम दिया गया है, जो विशाल पंखों की सहायता से उड़ने वाले पृथ्वी के सबसे बड़े पक्षियों में से एक हैं। इस स्क्वाड्रन के प्रतीक चिन्ह में समुद्र के विशाल नीले विस्तार में खोज करते हुए एक ‘कोंडोर’ को दर्शाया गया है।
नौसेना ने कहा कि ‘कोंडोर्स’ को उत्कृष्ट संवेदी क्षमताओं, शक्तिशाली और तेज नाखूनों और बड़े विशाल पंखों के लिए जाना जाता है, जो वायुयान की क्षमताओं और स्क्वाड्रन की परिकल्पित भूमिकाओं का प्रतिरूपण है।
आईएनएस हंसा में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए एडमिरल कुमार ने कहा कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में एक ‘पसंदीदा सुरक्षा भागीदार’ है, जो इस क्षेत्र में प्रभावी रणनीतिक भूमिका निभाने में हमारे देश की क्षमता और इसकी परिचालन पहुंच का विस्तार करने की आवश्यकता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा, “भारतीय नौसेना इस प्रतिबद्धता का अभिन्न अंग है और इस उद्देश्य के अनुपालन में, आईएनएएस 316 को सेवा में शामिल किया जाना हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और निगरानी को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।”
विज्ञप्ति के मुताबिक आईएनएएस 316 बोइंग पी-8आई विमानों का संचालन करेगा, यह कई भूमिकाओं वाला, लंबी दूरी का टोही पनडुब्बी रोधी जंगी (एलआरएमआर एएसडब्ल्यू) विमान है, जिसे हवा से पोत प्रक्षेपास्त्रों और टॉरपीडो की से लैस किया जा सकता है। इसमें बताया गया कि यह ‘बाजी पलटने वाला’ विमान समुद्री निगरानी और आक्रमण करने, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध मिशन, खोज और बचाव, आयुध मंचों के लिए लक्षित आंकड़े उपलब्ध कराने, भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना के लिए महत्वपूर्ण निगरानी जानकारी प्रदान करने के लिए सक्षम मंच है।
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