देश की खबरें | एयरइंडिया की गैर नियमित उड़ानों में बीच की सीट बुक करने की अनुमति वाले आदेश में हस्तक्षेप से इंकार

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नयी दिल्ली, 27 मई उच्चतम न्यायालय ने विदेशों में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिये दस दिन तक एयरइंडिया की गैर नियमित उड़ानों में बीच की सीट पर छह जून तक यात्रियों को बिठाने की अनुमति देने के अपने आदेश में सुधार करने से बुधवार को इंकार कर दिया।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये पायलट देवेन कनानी के आवेदन पर सुनवाई के बाद अपने 25 मई के आदेश में कोई भी बदलाव करने से इंकार कर दिया। पीठ ने कहा कि वह इसी सप्ताह दिये गये अपने आदेश के बारे में किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति पैदा करना चाहती है।

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पीठ ने अपने आदेश में किसी प्रकार का बदलाव करने से इंकार करते हुये कहा कि उन्होंने (एयरइंडिया और केन्द्र) जो कुछ भी, चाहे कितना ही खराब क्यों नहीं किया हो, अंतरिम आदेश दस दिन जारी रहने दीजिये।

देवेन कनानी की याचिका पर बंबई उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश के खिलाफ जब एयरइंडिया और केन्द्र ने शीर्ष अदालत में अपील दायर की थी तो पिछले सोमवार को न्यायालय ने दस दिन के लिये गैर नियमित उड़ानों में बीच की सीट पर यात्रियों को बिठाने की अनुमति दी थी।

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पायलट देवेन ने इस मामले में दायर अपने आवेदन मे कहा था कि कोविड-19 के मामलों की संख्या बढ़ रही है और यदि एक भी अंतरराष्ट्रीय या घरेलू उड़ान को पूरी क्षमता के साथ परिचालन की इजाजत दी गयी तो इससे अनेक यात्रियों और चालक दल के सदस्यों के इस संक्रमण की चपेट में आने की संभावना बढ़ जायेगी।

पायलट देवेन के वकील अभिलाष पणिक्कर का कहना था कि विमानों में सामाजिक दूरी बनाये रखने संबंधी नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के दिशा-निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए। इसके तहत विमानों में बीच की सीट रिक्त रखनी है।

पीठ ने पणिक्कर से कहा कि यदि वह इस मामले में कोई अन्य मुद्दा उठाना चाहते हैं तो उन्हें बंबई उच्च न्यायालय जाना होगा।

केन्द्र और एयरइंडिया की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सारे मामले पर गौर करने के लिये विशेषज्ञों की समिति गठित की गयी है।

न्यायालय ने 25 मई को केन्द्र और एयर इंडिया को बीच की सीट पर यात्रियों को बिठाने की अनुमति देते हुये तल्ख टिप्पणी की थी कि सरकार को वाणिज्यिक विमान सेवाओं की सेहत की बजाय नागरिकों की सेहत के लिये अधिक चिंतित होना चाहिए।

शीर्ष अदालत ने यह भी कहा था कि छह जून के बाद एयर इंडिया बंबई उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश के अनुरूप ही अपनी गैर नियमित उड़ानों का परिचालन करेगा।

पीठ ने इसके साथ ही यह मामला वापस बंबई उच्च न्यायालय के पास भेज दिया था। पीठ ने उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि दो जून, 2020 को सुनवाई के लिये निर्धारित दिन सभी पक्षों को सुनने के बाद इस मामले में एक प्रभावी अंतरिम आदेश पारित करे।

अनूप

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