ताजा खबरें | लोकसभा में सहायता प्राप्त जननीय प्रौद्योगिकी विनियमन विधेयक पेश

नयी दिल्ली, एक दिसंबर लोकसभा में बुधवार को सहायता प्राप्त जननीय प्रौद्योगिकी (विनियमन) विधेयक, 2021 पेश किया गया जिसमें अंतर गर्भाशयी गर्भाधान से जुड़े विषयों पर दिशानिर्देशों एवं व्यवस्था का मानकीकरण करने तथा महिलाओं एवं बच्‍चों को शोषण से संरक्षण प्रदान करने का प्रावधान किया गया है।

लोकसभा में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया ने विधेयक पेश किया ।

मांडविया ने कहा कि यह विधेयक पहले सितंबर 2020 में सदन में आया था और इसे स्थायी समिति को भेज दिया गया था। इस पर संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट आई और इसमें से सुझावों को लेकर अब यह विधेयक लाया गया है।

उन्होंने कहा कि देश में काफी क्लीनिक ऐसे चल रहे हैं जो कृत्रिम गर्भाधान (आईवीएफ) सहित सहायक प्रजनन तकनीक का उपयोग कर रहे हैं और यह विधेयक इनका नियमन करने के लिये लाया गया है।

मंत्री ने कहा कि ऐसी तकनीक में इंजेक्शन देना पड़ता है जिससे महिलाओं के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा भ्रूण हस्तांतरण और भ्रूण बैंकिंग के लिये भी व्यस्था बनाने की जरूरत थी, ऐसे में यह विधेयक लाया गया है।

विधेयक के प्रस्ताव में कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) का चलन काफी तेजी से बढ़ा है। वैसे तो कृत्रिम गर्भाधान (आईवीएफ) सहित सहायक प्रजनन तकनीक ने बांझपन के शिकार तमाम लोगों में नई उम्‍मीदें जगा दी हैं, लेकिन इससे जुड़े कई कानूनी, नैतिक और सामाजिक मुद्दे भी सामने आए हैं।

इसमें कहा गया है कि इस वैश्विक प्रजनन उद्योग के प्रमुख केन्‍द्रों में अब भारत भी शामिल हो गया है। भारत में इससे संबंधित क्लीनिक अब जननकोश दान करना, अंतर गर्भाशयी गर्भाधान (आईयूआई), आईवीएफ, आईसीएसआई, पीजीडी और गर्भकालीन सरोगेसी जैसी लगभग सभी तरह की एआरटी सेवाएं मुहैया करा रहे हैं। हालांकि, भारत में इस तरह की अनेक सेवाएं मुहैया कराने के बावजूद संबंधित प्रोटोकॉल का अब तक कोई मानकीकरण नहीं हो पाया है और इस बारे में सूचनाएं देने का चलन अब भी काफी हद तक अपर्याप्‍त है।

सहायक प्रजनन तकनीक सेवाओं के नियमन का मुख्‍य उद्देश्‍य संबंधित महिलाओं एवं बच्‍चों को शोषण से संरक्षण प्रदान करना है।

दीपक

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