उन्होंने कहा कि इन कानूनों से किसानों को नहीं बल्कि बिचौलियों को सबसे ज्यादा परेशानी है।
सिंह ने कहा कि सबसे अधिक मंडी कर पंजाब में है और भाजपा शासित राज्यों में यह सबसे कम है। लेकिन पंजाब के नेता दोहरा मापदंड अपना रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं जिम्मेदारी से कह रहा हूं कि किसान के मन में कोई संदेह नहीं है, लेकिन कुछ बिचौलिये और नेता उन्हें भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं।’’
सिंह ने कहा कि किसानों को परंपरागत खेती से हटकर व्यावसायिक कृषि को भी अपनाना होगा।
निर्दलीय सदस्य नवनीत कौर राणा ने कहा कि कोरोना काल में 80 करोड़ से अधिक गरीबों को अनाज और उज्ज्वला योजना के तहत महिलाओं को गैस देकर सरकार ने उल्लेखनीय कार्य किया है।
उन्होंने महाराष्ट्र सरकार पर कोरोना काल में असंवेदनशीलता का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार की नाकामी और लापरवाही के कारण राज्य के नागरिकों को बहुत नुकसान झेलना पड़ा है।
राणा ने कुछ विदेशी हस्तियों द्वारा भारत में किसान आंदोलन का समर्थन करने के खिलाफ पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और गायिका लता मंगेशकर के ट्वीट का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों भारत रत्न विभूतियों के खिलाफ महाराष्ट्र में आरोप लग रहे हैं और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराये जाने की बात कही जा रही है।
भाजपा के पीपी चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कोरोना संकट के समय जो कदम उठाए गए, उनकी पूरी दुनिया में सराहना हुई है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता आनंद शर्मा की अध्यक्षता वाली गृह मामलों से संबंधित संसदीय समिति और सपा नेता रामगोपाल यादव की अध्यक्षता वाली स्वास्थ्य मामलों से संबंधित समिति ने सरकार के प्रयासों की सराहना की।
चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश को नयी दिशा प्रदान की है और देश के विकास के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
कांग्रेस के गुरजीत सिंह औजला ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने 200 किसानों की मौत पर एक शब्द नहीं बोला। अगर उन्हें पंजाब के लोगों को लेकर दर्द है तो फिर लोगों की जीविका पर वार क्यों किया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि इस सरकार ने अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया और आम लोगों पर महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के डा. अमोल कोल्हे ने कहा कि हिंसा के आड़ में किसान आंदोलन को बदनाम करने की साजिश रची गई।
उन्होंने कहा कि आज देश को ‘आंदोलनजीवी’ शब्द मिला है। कल को महाराष्ट्र में विपक्ष के नेता आंदोलन करेंगे तो क्या वो भी ‘आंदोलनजीवी’ होंगे।
उन्होंने कहा कि जिस देश में स्वतंत्रता की बुनियाद ही आंदोलन हो, उस देश में इस तरह के शब्द का इस्तेमाल नहीं हो सकता।
कांग्रेस के जसबीर गिल और अन्नद्रमुक के सांसद पी रवींद्रनाथ कुमार ने भी चर्चा में भाग लिया।
चर्चा अधूरी रही ।
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