देश की खबरें | भारत में 30 वर्षों में पक्षियों की 60 प्रतिशत प्रजातियों में गिरावट आई: रिपोर्ट

नयी दिल्ली, 25 अगस्त भारत में पिछले 30 वर्षों में 338 प्रजातियों के पक्षियों की संख्या में बदलावों पर अध्ययन किया गया, जिनमें से 60 प्रतिशत प्रजातियों की तादाद में गिरावट देखी गई। देशभर में पक्षियों पर नजर रखने वाले 30 हजार लोगों से मिले आंकड़ों पर आधारित एक नयी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।

इसके अलावा, ‘स्टेट ऑफ इंडियाज बर्ड’ नामक इस रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सात वर्षों में 359 प्रजातियों में हुए परिवर्तनों के मूल्यांकन के दौरान 40 प्रतिशत (142) में गिरावट देखी गई।

यह आकलन तीन सूचकांकों पर आधारित है। पहला सूचकांक दीर्घकालिक रुझान (30 वर्षों में हुए बदलाव), दूसरा वर्तमान ‍वार्षिक रुझान (बीते सात साल में हुए बदलाव) और तीसरा तीसरा भारत के भीतर वितरण सीमा के आकार का माप है।

मूल्यांकन की गई कुल 942 प्रजातियों में से 338 प्रजातियों को दीर्घकालिक रुझान के तहत रखा गया।

बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस), वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) और जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जेडएसआई) समेत 13 सरकारी व गैर-सरकारी संस्थानों के एक समूह द्वारा प्रकाशित की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से 204 प्रजातियों की संख्या में गिरावट आई, 98 स्थिर रहीं और 36 में वृद्धि देखी गई।

वर्तमान वार्षिक रुझान के तहत 359 प्रजातियों को रखा गया, जिनमें से 142 में गिरावट आई है, 189 स्थिर हैं, और 28 में वृद्धि हुई है।

रिपोर्ट में नॉर्दर्न शॉवेलर, नॉर्दर्न पिंटेल, कॉमन टील, टफ्टेड डक, ग्रेटर फ्लेमिंगो, सारस क्रेन, इंडियन कौरसर और अंडमान सर्पेंट ईगल समेत 178 प्रजातियों को "उच्च संरक्षण प्राथमिकता" के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

इसमें कहा गया है कि इंडियन रोलर, कॉमन टील, नॉर्दर्न शॉवेलर और कॉमन सैंडपाइपर समेत 14 प्रजातियों की संख्या में 30 प्रतिशत या उससे अधिक की गिरावट आई है और उनका आईयूसीएन रेड लिस्ट से पुनर्मूल्यांकन कराने की अनुशंसा की गई है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)