नयी दिल्ली, 13 जुलाई डेवलपर को 50 मेगावाट या उससे अधिक क्षमता वाले पवन और सौर ऊर्जा संयंत्रों पर एक स्वचालित मौसम केंद्र स्थापित करना चाहिए।
हरित ऊर्जा परियोजनाओं की ग्रिड विश्वसनीयता और दक्षता बढ़ाने के लिए केंद्रीय बिजली प्राधिकरण (सीईए) ने यह प्रस्ताव दिया है।
सीईए ने फरवरी में ग्रिड की लागत दक्षता और स्थिरता बढ़ाने के लिए सौर ऊर्जा परियोजनाओं के साथ ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को स्थापित करने की सलाह भी दी थी।
सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन मौसम की स्थिति पर निर्भर करता है। ऐसे में उन्हें सटीक मौसम पूर्वानुमान न मिलने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
सीईए ने सात जुलाई की एक अधिसूचना में कहा कि कई बार पूर्वानुमान संबंधी गलतियों के कारण विचलन निपटान तंत्र (डीएसएम) के तहत भारी वित्तीय दंड लगाया जाता है।
प्राधिकरण ने कहा कि सौर और पवन ऊर्जा संयंत्रों में स्वचालित मौसम केंद्र स्थापित करने की जरूरत है।
इसके लिए दिशानिर्देश तैयार किए गए हैं और सीईए ने सभी नवीकरणीय ऊर्जा कार्यान्वयन एजेंसियों (आरईआईए) को बोली दस्तावेजों में स्वचालित मौसम केंद्रों की आवश्यकता को शामिल करने का निर्देश दिया है।
अधिसूचना में कहा गया है कि मौसम संबंधी मापदंडों का सटीक अनुपालन नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को अनुकूलित करेगा। साथ ही, यह समग्र उत्पादन पूर्वानुमान और दक्षता में सुधार करेगा, ग्रिड की विश्वसनीयता को बढ़ाएगा और नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करेगा।
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