विदेश की खबरें | जीवनशैली में बदलाव से डिमेंशिया के 40 प्रतिशत मामलों से बचा जा सकता है
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

मांट्रियल, 27 अगस्त (द कन्वरसेशन) पैंसठ वर्ष की एक महिला अपनी कमजोर होती याददाश्त के लिए बार-बार इलाज कराती हैं। पहले तो उन्हें बताया गया कि इसमें चिंता की कोई बात नहीं है, फिर एक साल बाद कहा गया कि यह ‘‘सामान्य रूप से बुढ़ापा है।’’ आख़िरकार, समझ में आया: ‘‘यह अल्जाइमर है जिसका कोई इलाज नहीं है।’’

इस तरह के परिदृश्य बहुत आम हैं।

काफी हद तक डिमेंशिया का पता नहीं चल पाता है, कनाडा जैसे उच्च आय वाले देशों में भी, जहां पता न चलने वाले मामलों की दर 60 प्रतिशत से अधिक है। मान्यता है कि बुजुर्गों में संज्ञानात्मक हानि सामान्य है और चिकित्सकों में डिमेंशिया के लक्षणों और जांच मानदंडों को लेकर ज्ञान की कमी को इसकी शुरुआत में पहचान नहीं होना और देर से पता चलने के मुख्य कारण के तौर पर पहचाना गया है।

आयु से संबंधित स्मृतिलोप को केवल सामान्य उम्र बढ़ने का हिस्सा मानकर अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। कभी-कभी यह भूल जाना कि हमने कार कहां खड़ी की थी या हमने अपनी चाबी कहां छोड़ी थी, ऐसा हर किसी के साथ हो सकता है, लेकिन जब ऐसी स्थितियां बार-बार होने लगती हैं तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी होता है।

कई व्यक्तियों की सोचने और जानकारी याद रखने की क्षमता में हल्के बदलाव का अनुभव करने से डिमेंशिया नहीं होगा, दूसरों में, ये प्रारंभिक चेतावनी संकेत हो सकता है। अनुसंधान से पता चला है कि अनुभूति में हल्के बदलाव वाले लोगों को जीवन में बाद में डिमेंशिया विकसित होने का अधिक खतरा होता है।

वास्तव में, यह बात सामने आयी है कि रोग प्रक्रिया (मस्तिष्क की संरचना और चयापचय में परिवर्तन) स्मृतिलोप जैसे लक्षणों के सामने आने से दशकों पहले शुरू होती है। इसके अलावा, वैज्ञानिक समुदाय में यह तेजी से स्वीकार किया जा रहा है कि जिन हस्तक्षेपों का उद्देश्य रोग के विकास को धीमा करना या रोकना है, उनके रोग के शुरुआती चरण में शुरू किये जाने पर प्रभावी होने की संभावना अधिक होती है।

इसके बावजूद, चिकित्सा समुदाय में शीघ्र पता लगाने के प्रोटोकॉल मानक नहीं हैं, क्योंकि आंशिक रूप से डिमेंशिया की हमारी समझ में महत्वपूर्ण अंतर बना हुआ है।

डिमेंशिया और बढ़ती उम्र की आबादी

अपने शोध में, मैं वृद्धों में मस्तिष्क स्वास्थ्य को चिह्नित करने के लिए उन्नत मस्तिष्क एमआरआई तरीकों का उपयोग करता हूं, जिनमें डिमेंशिया होने का खतरा अधिक होता है।

हमारी जनसंख्या में वरिष्ठ कनाडाई लोगों का अनुपात बढ़ रहा है। डिमेंशिया उम्र बढ़ने के साथ जुड़ा है, इसलिए अल्जाइमर सहित - डिमेंशिया से पीड़ित कनाडाई लोगों की संख्या अगले कुछ दशकों में काफी बढ़ने की उम्मीद है, जो 2050 तक 17 लाख होने की आशंका है। यह मैनिटोबा की आबादी से अधिक है।

यदि इस प्रवृत्ति को पलटने के लिए कोई महत्वपूर्ण कदम नहीं उठाये गए तो यह अनुमानित वृद्धि हमारी स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली पर भारी दबाव डालेगी, जिस पर पहले से ही दबाव है। इसका मतलब यह है कि प्रभावी रोकथाम रणनीति अब पहले से कहीं अधिक जरूरी हैं।

अल्जाइमर रोग के इलाज के लिए नयी दवाओं के वादे के बारे में हालिया खबरें भी शीघ्र पता लगाने की आवश्यकता पर प्रकाश डालती हैं। क्लीनिकल ट्रायल से पता चला है कि ये दवाएं बीमारी के शुरुआती चरण में दिए जाने पर संज्ञानात्मक गिरावट को धीमा करने में सबसे प्रभावी होती हैं।

जीवनशैली और मस्तिष्क स्वास्थ्य

दूसरी ओर, जीवनशैली में बदलाव से न्यूनतम लागत और बिना किसी दुष्प्रभाव के डिमेंशिया के विकास के जोखिम को कम किया जा सकता है।

वर्ष 2020 में ‘द लांसेट’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, डिमेंशिया के 40 प्रतिशत मामलों के लिए 12 ऐसे कारकों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है जिन्हें रोका जा सकता है। इनमें उच्च रक्तचाप, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, मधुमेह, धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन और कम सामाजिक संपर्क शामिल हैं।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)