जरुरी जानकारी | विभिन्न कारणों से 35 लाख रिफंड मामले रुके, समाधान के प्रयास जारी: सीबीडीटी चेयरमैन

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. आयकर विभाग के पास करदाताओं के बैंक खातों के मिलान और सत्यापन में गड़बड़ी के कारण 35 लाख रिफंड के मामले अटके हुए हैं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन नितिन गुप्ता ने मंगलवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि कर अधिकारी एक विशेष कॉल सेंटर के जरिये ऐसे करदाताओं से संपर्क कर रहे हैं।

नयी दिल्ली, 10 अक्टूबर आयकर विभाग के पास करदाताओं के बैंक खातों के मिलान और सत्यापन में गड़बड़ी के कारण 35 लाख रिफंड के मामले अटके हुए हैं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन नितिन गुप्ता ने मंगलवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि कर अधिकारी एक विशेष कॉल सेंटर के जरिये ऐसे करदाताओं से संपर्क कर रहे हैं।

सीबीडीटी प्रमुख ने कहा कि विभाग ऐसे करदाताओं के साथ ‘पत्राचार कर रहा है’ और इन मुद्दों को जल्द हल करने की उसकी कोशिश है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम करदाताओं के सही बैंक खातों में रिफंड जल्दी जमा करना चाहते हैं।’’

गुप्ता ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि विभाग ने 2011 में एक तकनीकी बदलाव किया था, और कागज आधारित रजिस्टर की जगह कंप्यूटर को अपनाया गया और इसलिए कुछ पुरानी मांगेंकरदाताओं के खातों में दिख रही हैं।

उनसे करदाताओं को 2010-11 के आसपास के वर्षों से संबंधित पुरानी मांगें मिलने के बारे में पूछा गया था, जिनके चलते उनका रिफंड अटक गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे सभी मामलों का समाधान किया जा रहा है।

सीबीडीटी प्रमुख ने कहा कि मैसूरु स्थित कॉल सेंटर के जरिये पिछले साल ऐसे 1.4 लाख मामलों का समाधान किया गया। शुरुआत में यह कॉल सेंटर कर्नाटक और गोवा, मुंबई, दिल्ली तथा उत्तर-पश्चिम क्षेत्र के लिए काम कर रहा था, लेकिन अब इसे अन्य क्षेत्रों में विस्तारित करने की योजना है। सीबीडीटी आयकर विभाग का प्रशासनिक निकाय है।

गुप्ता ने कहा कि विभाग या मूल्यांकन अधिकारी के स्तर पर रिकॉर्ड अद्यतन के अलावा रिफंड रुकने का एक और कारण हैं। कुछ मामलों में रिफंड इसलिए रुका है, क्योंकि करदाता ने अपने बैंक खाते का सत्यापन नहीं किया है। इन मामलों में या तो बैंक का विलय हो गया है या करदाता ने शहर बदल दिया है।

नयी कर व्यवस्था के बारे में उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट ने पिछले वित्त वर्ष के दौरान अपने मुनाफे का लगभग 60 प्रतिशत नयी कर व्यवस्था के तहत दाखिल किया है और यह भी उम्मीद है कि 60-70 प्रतिशत व्यक्तिगत करदाता इस नयी कर व्यवस्था को अपनाएंगे।

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