जरुरी जानकारी | आंध्र प्रदेश के राजस्व घाटा अनुदान पर 15वां वित्त आयोग संज्ञान लेगा: सीतारमण

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि आंध्र प्रदेश को राजस्व घाटा अनुदान दिए जाने के मामले में 15वें वित्त आयोग को संज्ञान लेना चाहिये। उन्होंने माना कि केन्द्र और आंध्र प्रदेश सरकार के बीच राजस्व घाटा अनुदान को लेकर विवाद पिछले पांच साल से भी अधिक समय से सुलझ नहीं पाया है और इस मामले को वित्त आयोग को देखना चाहिये।

अमरावती, सात अक्ट्रबर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि आंध्र प्रदेश को राजस्व घाटा अनुदान दिए जाने के मामले में 15वें वित्त आयोग को संज्ञान लेना चाहिये। उन्होंने माना कि केन्द्र और आंध्र प्रदेश सरकार के बीच राजस्व घाटा अनुदान को लेकर विवाद पिछले पांच साल से भी अधिक समय से सुलझ नहीं पाया है और इस मामले को वित्त आयोग को देखना चाहिये।

उन्होंने राज्य सरकार से कहा कि वह 15वें वित्त आयोग के साथ इस मामले पर विचार विमर्श करे और इस मामले में उसे फैसला करने दे। उन्होंने कहा, ‘‘हां, यह मुद्दा सुलझा नहीं है, लेकिन इस बारे में 15वें वित्त आयोग को फैसला लेना है, वित्त मंत्रालय को नहीं।’’

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सीतारमण ने बुधवार शाम को विजयवाड़ा में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘जब मुझसे वित्त मंत्री मिले तो मैंने राज्य सरकार से भी यही कहा है।’’

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी ने हाल की अपनी नयी दिल्ली की यात्रा के दौरान केन्द्र सरकार को एक ज्ञापन सौंपा है जिसमें कहा गया है कि राज्य का राजस्व घाटा अनुदान का 18,830.87 करोड़ रुपये का बकाया अभी भी लंबित है।

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आंध्र प्रदेश का बंटवारा होने के समय 2014 में केन्द्र सरकार ने राज्य के राजस्व अंतर को पूरा करने पर सहमति जताई थी तब केन्द्र ने इस राशि को वर्ष 2014-15 के लिये 4,117.89 करोड़ रुपये पर तय किया था। दूसरी तरफ राज्य सरकार ने कैग की रिपोर्ट का हवाला देते हुये यह राशि 22,948.76 करोड़ रुपये होने का दावा किया है।

केन्द्र सरकार ने 4,117.89 करोड़ रुपये में से भी अब तक केवल 3,979.50 करोड़ रुपये का ही भुगतान किया है। इसमें भी 138.39 करोड़ रुपये का बकाया लंबित है।

सीतारमण ने संवाददाताओं के सवालों के जवाब में कहा, ‘‘मुझे राशि की जानकारी नहीं है, इसमें जो मुद्दा है, जिसका समाधान नहीं हुआ है और जिस पर मंत्रालय को काम करना है, यह देखते हुये कि यह 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों पर आधारित है। वहीं, 14वें वित्त आयोग का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, इसलिये इस मुद्दे पर विचार विमर्श की जरूरत है। ’’

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