नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर आईटी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने सोमवार को कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) में विकास के लिए विशाल संभावनाएं हैं और भारत अपने कुशल पेशेवरों की मदद से इस अवसर का फायदा उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
उन्होंने ‘रेज 2000 शिखर सम्मेलन’ में कहा कि प्रस्तावित डेटा संरक्षण कानून से देश की डेटा अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
प्रसाद ने आगे कहा कि एआई तभी सार्थक होगा, जब यह आम भारतीयों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रौद्योगिकी का विकास जारी है... हम एआई का स्वागत करते हैं क्योंकि इसमें विकास करने की क्षमता है और ये समानता और आपूर्ति को बढ़ावा देता है... हम यह भी चाहते हैं कि एआई विकास के इस समावेशी चरित्र को और बढ़ावा दे।’’
यह भी पढ़े | Gandhi Jayanti 2020: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा- महात्मा गांधी की विचारधारा से प्रभावित मोदी सरकार.
उन्होंने कहा कि भारतीय आईटी कंपनियां विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी हैं और साथ ही भरोसा जताया कि देश के कुशल पेशेवरों का एक बड़ा हिस्सा न सिर्फ भारत, बल्कि दुनिया भर में एआई पारिस्थितिकी तंत्र का प्रबंधन करेगा।
उन्होंने आयुष्मान भारत, जीएसटी और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) का उदाहरण देकर बताया कि सरकार ने सार्वजनिक सेवाओं के वितरण में किस तरह प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया है।
प्रसाद ने कहा कि सरकार व्यापक विचार-विमर्श के बाद डेटा संरक्षण कानून तैयार कर रही है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि यह विधेयक जल्द ही संसद से पारित हो जाएगा।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)










QuickLY