धरती पर सूरज बनाने की दौड़, मिलेगी अनलिमिटेड ऊर्जा! न्यूक्लियर फ्यूजन की पहेली सुलझाने के करीब पहुंचे वैज्ञानिक

जर्मनी के वैज्ञानिकों ने 'Wendelstein 7-X' रिएक्टर का उपयोग करके न्यूक्लियर फ्यूजन में एक नया रिकॉर्ड बनाया है. यह सफलता सूरज की तरह असीमित और स्वच्छ ऊर्जा पैदा करने के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है. इससे भविष्य में सुरक्षित फ्यूजन पावर प्लांट बनाने की तकनीक को और मजबूती मिली है.

सोचिए अगर हम धरती पर ही एक छोटा सूरज बना लें तो क्या होगा. एक ऐसा सूरज जो हमें कभी न खत्म होने वाली, साफ-सुथरी ऊर्जा दे. सुनने में यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी लगती है, लेकिन दुनिया भर के वैज्ञानिक इसी सपने को हकीकत में बदलने में जुटे हुए हैं. हाल ही में, जर्मनी के वैज्ञानिकों ने इस दिशा में एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है.

क्या है यह नई उपलब्धि

जर्मनी में वैज्ञानिकों ने एक खास तरह के न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्टर, जिसका नाम 'वें델स्टीन 7-एक्स' (Wendelstein 7-X) है, में एक नया रिकॉर्ड बनाया है. उन्होंने एक ऐसे प्रयोग को सफलतापूर्वक अंजाम दिया जो भविष्य में असीमित ऊर्जा के दरवाजे खोल सकता है.

इसे आसान भाषा में कहें तो, वैज्ञानिकों ने एक बेहद गर्म गैस (जिसे प्लाज्मा कहते हैं) को लगभग 2 करोड़ डिग्री सेल्सियस के तापमान तक गर्म किया और उसे अपनी जगह पर टिकाए रखने में सफलता हासिल की. यह कारनामा न्यूक्लियर फ्यूजन पावर प्लांट बनाने के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण पैमाना है, जिसे 'ट्रिपल प्रोडक्ट' कहते हैं. इस उपलब्धि ने इस टेक्नोलॉजी को असली पावर प्लांट बनाने के एक कदम और करीब ला दिया है.

न्यूक्लियर फ्यूजन क्या होता है

यह वही प्रक्रिया है जिससे हमारे सूरज को अरबों सालों से ऊर्जा मिल रही है. इसमें दो हल्के परमाणु (जैसे हाइड्रोजन) के नाभिक (केंद्र) आपस में जुड़कर एक भारी नाभिक बनाते हैं. इस प्रक्रिया में भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है.

यह मौजूदा परमाणु बिजलीघरों (Nuclear Power Plants) में इस्तेमाल होने वाली प्रक्रिया, जिसे न्यूक्लियर फिशन (Nuclear Fission) कहते हैं, से बिल्कुल अलग है. फिशन में एक भारी परमाणु को तोड़ा जाता है, जिससे ऊर्जा तो मिलती है लेकिन साथ में खतरनाक रेडियोएक्टिव कचरा भी पैदा होता है.

फ्यूजन बेहतर क्यों है

वैज्ञानिक न्यूक्लियर फ्यूजन को ऊर्जा का 'पवित्र खजाना' मानते हैं, क्योंकि इसके कई फायदे हैं:

चुनौतियां क्या हैं

सूरज जैसी प्रक्रिया को धरती पर दोहराना आसान नहीं है. इसके लिए 10 करोड़ डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा तापमान की जरूरत होती है, जो सूरज के केंद्र से भी कई गुना ज्यादा है. इतने गर्म प्लाज्मा को बनाना और फिर उसे एक जगह पर लंबे समय तक टिकाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है. अब तक इन मशीनों को चलाने में जितनी ऊर्जा लगती है, ये उससे कम ऊर्जा पैदा कर पाती हैं.

जर्मनी के 'Wendelstein 7-X' जैसे रिएक्टर, जिन्हें 'स्टेलरेटर' (Stellarator) कहा जाता है, इसी चुनौती से निपटने के लिए बनाए गए हैं. ये ताकतवर चुंबकों का एक जटिल जाल बनाकर उस बेहद गर्म प्लाज्मा को काबू में रखते हैं.

यह नई कामयाबी दिखाती है कि वैज्ञानिक इन चुनौतियों से धीरे-धीरे पार पा रहे हैं. हालांकि अभी भी हमें फ्यूजन से बिजली बनाने में कई साल लगेंगे, लेकिन यह रिकॉर्ड इस बात की उम्मीद जगाता है कि एक दिन हम भी धरती पर अपना सूरज बनाकर ऊर्जा की सभी समस्याओं को हमेशा के लिए खत्म कर देंगे.

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