Ganesh Chaturthi Celebration in Thailand Video: थाईलैंड में पहली बार गणेशोत्सव की धूम, फुकेट की सड़कों पर दिखा भारत जैसा भव्य नजारा
गणेशोत्सव के उद्घाटन जुलूस ने पूरे ओल्ड टाउन को भक्ति रंग में रंग दिया. ढोल-ताशे और पारंपरिक संगीत की गूंज से माहौल बेहद खुशनुमा हो उठा. इस दौरान सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुतियों ने पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. सड़कों पर दो लाख से अधिक ताजे फूलों की सजावट ने शहर को की खूबसूरती में कायापलट कर दिया.
फुकेट (थाईलैंड): थाईलैंड (Thailand) का ऐतिहासिक फुकेट (Phuket) ओल्ड टाउन इस बार एक अनोखे और भव्य आयोजन का गवाह बना. यहां पहली बार गणेश चतुर्थी के मौके पर गणेशोत्सव (Ganeshotsav 2025) का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालु और पर्यटक शामिल हुए. रंग-बिरंगे जुलूस, ढोल-ताशे की थाप और भक्ति गीतों से गूंजते माहौल ने फुकेट की सड़कों को भारत जैसा दिव्य रूप दे दिया.
इस अनूठे उत्सव के पीछे प्रेरणा थीं थाई उद्यमी पापाचसॉर्न मिपा (Papachsorn Meepa) जिन्होंने मात्र 15 महीनों में रवाई क्षेत्र में भव्य गणेश मंदिर का निर्माण कराया. उनका सपना था कि थाईलैंड में भी गणेशोत्सव भारत की तरह भव्य रूप से मनाया जाए. इस आयोजन ने उनके सपने को न सिर्फ पूरा किया बल्कि फुकेट को वैश्विक धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों के नए केंद्र के रूप में पहचान भी दिलाई.
थाईलैंड के फुकेट में पहली बार मनाया गया गणेशोत्सव
जुलूस में उमड़ा जनसैलाब
गणेशोत्सव के उद्घाटन जुलूस ने पूरे ओल्ड टाउन को भक्ति रंग में रंग दिया. ढोल-ताशे और पारंपरिक संगीत की गूंज से माहौल बेहद खुशनुमा हो उठा. इस दौरान सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुतियों ने पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. सड़कों पर दो लाख से अधिक ताजे फूलों की सजावट ने शहर को की खूबसूरती में कायापलट कर दिया. यह भव्य नजारा देखने के लिए न सिर्फ स्थानीय लोग बल्कि दुनियाभर से आए पर्यटक भी शामिल हुए.
भारत-थाईलैंड की दोस्ती का प्रतीक
पापाचसॉर्न मिपा ने कहा, “यह सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि भारत और थाईलैंड की दोस्ती का प्रतीक है और फुकेट की नई परंपरा की शुरुआत.” कार्यक्रम में कई सरकारी प्रतिनिधि और बड़े अधिकारी भी मौजूद रहे, जिनमें चायताम प्रोम्मासॉर्न (स्थायी सचिव, परिवहन मंत्रालय), सुवित फुन्सियाम (फुकेट के उप-गवर्नर) और रवि चंद्रन (पूर्व सीईओ, लगूना फुकेट) शामिल थे.
पर्यटन और भक्ति का संगम
फुकेट का यह पहला गणेशोत्सव न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी बेहद खास साबित हुआ. इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि गणेश भक्ति की शक्ति सीमाओं से परे है, और भविष्य में यह उत्सव हर साल दुनियाभर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों को फुकेट की ओर आकर्षित करेगा.