SIPRI Arms Data: हथियारों की खरीद-फरोख्त के ये आंकड़े आपको हिला देंगे, देखें रिपोर्ट
पिछले पांच साल में यूरोप में हथियारों का आयात दोगुना हो गया है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट (SIPRI) के मुताबिक मुख्यतया यूक्रेन में जारी युद्ध के कारण यह वृद्धि हुई है.
पिछले पांच साल में यूरोप में हथियारों का आयात दोगुना हो गया है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट (SIPRI) के मुताबिक मुख्यतया यूक्रेन में जारी युद्ध के कारण यह वृद्धि हुई है.दुनियाभर में हथियारों के व्यापार पर नजर रखने वाले थिंक टैंक सिप्री का कहना है कि यूरोपीय देश जमकर हथियार खरीद रहे हैं. 2019 से 2023 के पांच साल में इससे पिछले पांच साल (2014-2018) के मुकाबले 94 फीसदी ज्यादा हथियार आयात किए गए.
सिप्री ने अपनी रिपोर्ट में हथियारों की संख्या का विश्लेषण किया है और उनकी कीमत के बारे में नहीं बताया है. चूंकि, साल दर साल हथियारों की संख्या ऑर्डर के हिसाब से बदल सकती है, इसलिए सिप्री के विशेषज्ञों ने पांच साल की लंबी अवधि में आयात किए गए हथियारों का विश्लेषण किया.
यूक्रेन सबसे बड़ा खरीददार
यूरोप में हथियारों का सबसे बड़ा आयातक यूक्रेन रहा, जो रूस के खिलाफ दो साल से जंग लड़ रहा है. यूक्रेन ने पूरे यूरोप के कुल आयात के 23 फीसदी हथियार खरीदे. 2023 में वह पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा हथियार खरीदने वाला देश था. हालांकि पांच साल की अवधि में उसका नंबर चौथा था. वह भारत, सऊदी अरब और कतर से पीछे था.
सिप्री की शोधकर्ता कटरीना जोकिच ने कहा, "हथियारों के आयात की यह वृद्धि मुख्यतया यूक्रेन के कारण है. पिछले पांच साल में यूक्रेन दुनिया का चौथा सबसे बड़ा खरीददार बन गया है.”
सिप्री के मुताबिक फरवरी 2022 में रूस के हमले के बाद से कम से कम 30 देशों ने यूक्रेन को हथियार दिए हैं. उसे सबसे ज्यादा हथियार बेचने वाले देशों में अमेरिका और जर्मनी सबसे ऊपर थे. अमेरिका ने 69 फीसदी जबकि जर्मनी ने 30 फीसदी हथियार बेचे. हालांकि, इतने बड़े निर्यात के बावजूद जर्मनी ने पिछले पांच साल में कम हथियार बेचे हैं. 2014-18 की तुलना में 2019-23 में उसका हथियार और गोला-बारूद का निर्यात 14 फीसदी कम रहा.
2019 से 2023 के बीच यूरोप 55 फीसदी हथियार अमेरिका ने बेचे, जो 2014-18 के मुकाबले 35 फीसदी ज्यादा है. जोकिच ने कहा कि ऐसा होने की एक वजह यह भी है कि अधिकतर यूरोपीय देश नाटो के सदस्य हैं और अमेरिका के एफ-35 लड़ाकू विमानों जैसे हथियारों के विकास में सहयोगी हैं.
लेकिन अमेरिका से हथियारों का आयात बढ़ने की एक वजह यूरोपीय देशों का अपने नए हथियार बनाने के बजाय जल्द से जल्द अमेरिकी हथियारों को खरीदकर अपना जखीरा बढ़ाने की चाह भी रही है.
रूस के निर्यात में गिरावट
कई दशकों में पहली बार ऐसा हुआ है कि रूस दुनिया के सबसे बड़े हथियार निर्यातकों में पहले दो स्थानों पर नहीं है. आमतौर पर अमेरिका और रूस दुनिया के सबसे बड़े हथियार सप्लायर रहे हैं. लेकिन पिछले पांच साल में अमेरिका का हथियार निर्यात 17 फीसदी बढ़ा है और अब वैश्विक बाजार में उसकी हिस्सेदारी 42 फीसदी हो गई है.
दूसरे नंबर पर रूस की जगह अब फ्रांस आ गया है, जिसका निर्यात 47 फीसदी बढ़ा है. रूस का हथियारों का निर्यात पिछले पांच साल में 53 कम हो गया.
पिछले पांच साल में रूस ने ना सिर्फ कम हथियार निर्यात किए हैं बल्कि उसके हथियार खरीदने वालों की संख्या भी घटी है. 2023 में उसने सिर्फ 12 देशों को हथियार बेचे जबकि 2019 में यह संख्या 31 थी.
जोकिच ने कहा, "चीन जैसे रूस के बड़े ग्राहकों की नीतियों में हुए बदलाव भी इस गिरावट की वजह हैं.”
पारंपरिक रूप से चीन रूसी हथियारों के सबसे बड़े खरीददारों में से एक है लेकिन अब वह अपने स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा दे रहा है. हालांकि अब भी रूस के कुल हथियार निर्यात का 21 फीसदी चीन को जाता है. भारत रूस का सबसे बड़ा खरीददार है और उसके कुल हथियारों का 34 फीसदी भारत ने ही खरीदा है.
2019 से 2023 के बीच बढ़ी हथियारों की खरीदा का अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा फायदा फ्रांस को हुआ है जिसने इस अवधि में कुल बिके हथियारों में से 11 फीसदी बेचे हैं. दोकिच कहती हैं कि फ्रांस राफाएल लड़ाकू विमानों को यूरोप के बाहर बेचने में कामयाब रहा है, जो उसकी सबसे बड़ी सफलता है.
गाजा की लड़ाई की भूमिका
हथियारों की खरीद पर पिछले साल अक्तूबर में गाजा में शुरू हुए युद्ध का भी बड़ा असर पड़ा है. सिप्री शोधकर्ता जैन हुसैन कहते हैं कि इस युद्ध की शुरुआत के बाद इस्राएल को अमेरिका ने मदद के नाम पर या पुराने खरीद समझौतों को गति देकर बड़ी संख्या में हथियार सप्लाई किए हैं.
हालांकि हुसैन कहते हैं कि गाजा की लड़ाई का हथियारों के व्यापार पर लंबी अवधि पर क्या असर होगा, यह कहना मुश्किल है. वह बताते हैं, "हम पहले देख चुके हैं कि कई यूरोपीय देश इस्राएल को हथियार देने के बारे में सीमा में रहने पर जोर दे रहे हैं क्योंकि गाजा में अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के उल्लंघन की आशंका है.”
इस वजह से इस्राएल को हथियारों का निर्यात प्रभावित हो सकता है लेकिन वह गाजा की लड़ाई खत्म होने के बाद भी जारी रहता है या नहीं, इस बारे में अनुमान लगाना मुश्किल है.
वीके/एए (डीपीए/एएफपी)
(The above story first appeared on LatestLY on Mar 11, 2024 01:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

